श्री लक्ष्मी सहस्रनाम
śrī lakṣmī sahasranāma
Shri Lakshmi Sahasranama
श्री लक्ष्मी सहस्रनाम माँ लक्ष्मी के सहस्र नामों का स्तोत्र है, जो स्कन्दपुराण की सनत्कुमार संहिता से आता है। यह नित्यागता से आरंभ होकर नारायणी पर समाप्त होता है और आधार-पाठ में 1003 नामों में विभाजित है। सम्पूर्ण पाठ में 35–45 मिनट लगते हैं।
परिचय
माँ लक्ष्मी धन, समृद्धि और सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी हैं — भगवान विष्णु की शक्ति।
स्रोत: स्कन्दपुराण, सनत्कुमार संहिता — सनत्कुमार द्वारा द्वादश योगियों को उपदिष्ट; विनियोग, ध्यान, नाम-श्लोक तथा फलश्रुति सहित
एक नज़र में
| मंत्र / पाठ | श्री लक्ष्मी सहस्रनाम |
|---|---|
| IAST | śrī lakṣmī sahasranāma |
| देवता | माँ लक्ष्मी |
| मूल स्रोत | स्कन्दपुराण, सनत्कुमार संहिता — सनत्कुमार द्वारा द्वादश योगियों को उपदिष्ट; विनियोग, ध्यान, नाम-श्लोक तथा फलश्रुति सहित |
| शुभ दिन | शुक्रवार; अष्टमी, नवमी व चतुर्दशी; पूर्णिमा व अमावस्या |
| पाठ समय | 35–45 मिनट (सम्पूर्ण) |
| कठिनाई | कठिन (Advanced) |
| छंद | अनुष्टुप् |
उद्भव / पृष्ठभूमि
श्री लक्ष्मी सहस्रनाम माँ लक्ष्मी के सहस्र नामों का स्तोत्र है और इसका मूल स्कन्दपुराण की सनत्कुमार संहिता में है — यह उन थोड़े सहस्रनामों में है जिनका ग्रंथ-संदर्भ स्पष्ट रूप से पाठ के अंत में दर्ज मिलता है।
इसकी कथा-भूमिका असामान्य है, और वह इस स्तोत्र का पूरा स्वर तय कर देती है। बारह योगी सनत्कुमार के पास आते हैं और एक बहुत सीधा प्रश्न रखते हैं — *"खिद्यन्ति मानवाः सर्वे धनाभावेन केवलम्"*, अर्थात सब मनुष्य केवल धन के अभाव से दुःखी होते हैं; धर्म, अर्थ और काम — कोई कामना निर्धन की सिद्ध नहीं होती। इसीलिए वे पूछते हैं कि वह कौन-सी विद्या है जिसे "दारिद्र्यध्वंसिनी" कहा गया है। उत्तर में सनत्कुमार यह सहस्रनाम कहते हैं। यानी यह स्तोत्र किसी दार्शनिक जिज्ञासा से नहीं, एक बहुत व्यावहारिक प्रश्न से जन्मा है।
पर सूची स्वयं धन तक कहीं सीमित नहीं रहती। पहले सौ नामों में ही लक्ष्मी महाकाली (8), सरस्वती (10), महामाया (14), भैरवी (28), कालरात्रि (35), भद्रकाली (37), चामुण्डा (48), दुर्गा (59) और पार्वती (67) कही जाती हैं। यह श्री-सूक्त वाली कमलासना लक्ष्मी नहीं; यह आदिशक्ति के रूप में लक्ष्मी हैं, और स्तोत्र इसे छिपाता नहीं।
सूची की सबसे विलक्षण बात उसका व्याकरण-खंड है, जो कहीं और नहीं मिलता। नाम 649–650 में देवी का शरीर ही व्याकरण से बनाया गया है — उपसर्ग ही जिनके नख हैं (उपसर्गनखाञ्चिता), निपात ही जिनकी दोनों जंघाएँ हैं (निपातोरुद्वयीजङ्घा)। आगे नाम 664–665 में समास, तद्धित, विभक्ति व वचन तक उनका स्वरूप कहे गए हैं। कोई दूसरा सहस्रनाम देवी को इस तरह भाषा का शरीर नहीं देता।
अंत के लगभग बीस नाम एक और कारण से उल्लेखनीय हैं — वे ध्यान के निर्देश हैं, विशेषण नहीं। नाम 934 से 948 तक क्रम से बताया गया है कि अठारह भुजाओं में क्या-क्या है: मातुलुंग-खेटक, स्वर्ण-चषक, दो कमल, पूर्ण कुंभ, शुक, वरद-अभय मुद्रा, पाश, अंकुश, शंख, चक्र, शूल, कृपाणिका, धनुष-बाण, अक्षमाला और चिन्मुद्रा — और उसके तुरंत बाद नाम 949 है अष्टादशभुजा। यानी सूची पहले आयुध गिनाती है, फिर भुजाओं की संख्या बताती है।
और समापन परंपरा का सबसे परिचित श्लोक है। अंतिम सात नाम — सर्वमङ्गलमाङ्गल्या, शिवा, सर्वार्थसाधिका, शरण्या, त्र्यम्बका, गौरी, नारायणी — वही हैं जो दुर्गा सप्तशती के प्रसिद्ध श्लोक "सर्वमङ्गलमाङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥" में आते हैं। एक लक्ष्मी-सहस्रनाम अपने अंतिम सात नामों में देवी-स्तुति के सबसे प्रसिद्ध श्लोक पर आकर ठहर जाता है।
ध्यान व आरंभिक श्लोक
॥ विनियोगः ॥ अस्य श्रीलक्ष्मीदिव्यसहस्रनामस्तोत्रमहामन्त्रस्य आनन्दकर्दमचिक्लीतेन्दिरासुतादयो महात्मानो महर्षयः, अनुष्टुप् छन्दः, विष्णुमाया शक्तिः, महालक्ष्मीः परा देवता, श्रीमहालक्ष्मीप्रसादद्वारा सर्वेष्टार्थसिद्ध्यर्थे जपे विनियोगः॥
इस श्रीलक्ष्मी-दिव्य-सहस्रनाम-स्तोत्र-महामंत्र के ऋषि आनन्द, कर्दम, चिक्लीत तथा इन्दिरासुत आदि महात्मा महर्षि हैं; छंद अनुष्टुप् है; शक्ति विष्णुमाया है; परा देवता महालक्ष्मी हैं। श्रीमहालक्ष्मी की कृपा द्वारा समस्त अभीष्ट अर्थों की सिद्धि के लिए इस जप में विनियोग किया जाता है।
॥ ध्यानम् ॥ पद्मनाभप्रियां देवीं पद्माक्षीं पद्मवासिनीम्। पद्मवक्त्रां पद्महस्तां वन्दे पद्मामहर्निशम्॥ पूर्णेन्दुवदनां दिव्यरत्नाभरणभूषिताम्। वरदाभयहस्ताढ्यां ध्यायेच्चन्द्रसहोदरीम्॥ इच्छारूपां भगवतः सच्चिदानन्दरूपिणीम्। सर्वज्ञां सर्वजननीं विष्णुवक्षःस्थलालयाम्॥
पद्मनाभ (विष्णु) की प्रिया, कमल-सदृश नेत्रों वाली, कमल में निवास करने वाली, कमल-सदृश मुख तथा हाथों वाली उन पद्मा देवी की मैं दिन-रात वंदना करता हूँ। पूर्ण चंद्र के समान मुख वाली, दिव्य रत्नाभूषणों से भूषित, वरद व अभय मुद्रा से युक्त हाथों वाली उन चंद्र-सहोदरी का ध्यान करना चाहिए। जो भगवान की इच्छा-स्वरूपा, सच्चिदानंद-रूपिणी, सर्वज्ञा, सबकी जननी तथा विष्णु के वक्षःस्थल में निवास करने वाली हैं।
ॐ नित्यागताऽनन्तनित्या नन्दिनी जनरञ्जनी। नित्यप्रकाशिनी चैव स्वप्रकाशस्वरूपिणी॥१॥
आरंभिक श्लोक: वे नित्यागता, अनन्त-नित्या, नन्दिनी तथा जनों को प्रसन्न करने वाली हैं; वे नित्य प्रकाशमान तथा स्वयं-प्रकाश स्वरूपा हैं। (इसी क्रम में आगे सहस्र नाम आते हैं।)
॥ समापन ॥ सर्वमङ्गलमाङ्गल्या शिवा सर्वार्थसाधिका। शरण्या त्र्यम्बका गौरी नारायणी नमोऽस्तु ते॥
अंतिम सात नाम: वे समस्त मंगलों की भी मंगल हैं, कल्याणस्वरूपा हैं, समस्त अर्थों को सिद्ध करने वाली हैं; शरण देने वाली, त्र्यम्बका, गौरी तथा नारायणी — आपको नमस्कार हो। (यही वह प्रसिद्ध श्लोक है जो दुर्गा सप्तशती में भी आता है; इस सहस्रनाम के अंतिम सात नाम इसी से बनते हैं।)
॥ फलश्रुति ॥ नाम्नां साष्टसहस्रं मे प्रमादाद्वापि यः सकृत्। कीर्तयेत्तत्कुले सत्यं वसाम्याचन्द्रतारकम्॥ मन्नाम स्तुवतां लोके दुर्लभं नास्ति चिन्तितम्। मत्प्रसादेन सर्वेऽपि स्वस्वेष्टार्थमवाप्स्यथ॥ तस्मादेतद्रहस्यं च गोप्यं जप्यं प्रयत्नतः। अष्टम्यां च चतुर्दश्यां नवम्यां भृगुवासरे॥ पौर्णमास्याममायां च पर्वकाले विशेषतः। जपेद्वा नित्यकार्येषु सर्वान्कामानवाप्नुयात्॥
फलश्रुति (महालक्ष्मी के वचन): जो मनुष्य मेरे इन एक हज़ार आठ नामों का प्रमादवश भी एक बार कीर्तन कर ले, उसके कुल में मैं चंद्र-तारा रहने तक सचमुच निवास करती हूँ। जो लोक में मेरे नामों की स्तुति करते हैं, उनके लिए कुछ भी दुर्लभ नहीं; मेरी कृपा से सब अपने-अपने अभीष्ट अर्थ प्राप्त करेंगे। इसलिए यह रहस्य गोपनीय है और प्रयत्नपूर्वक जपने योग्य है — अष्टमी, चतुर्दशी, नवमी, भृगुवार (शुक्रवार), पूर्णिमा, अमावस्या तथा विशेषतः पर्वकाल में; अथवा नित्य कार्यों में भी जप करने से मनुष्य समस्त कामनाएँ प्राप्त करता है।
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नाम सूची (Name List)
आरंभिक नाम — नित्या, महालक्ष्मी व शक्ति-स्वरूप (नाम 1–100)
- 1.ॐ नित्यागतायै नमःनित्य गतिशील; जो सदा प्राप्त रहती हैं
- 2.ॐ अनन्तनित्यायै नमःअनन्त तथा नित्य
- 3.ॐ नन्दिन्यै नमःआनंद देने वाली
- 4.ॐ जनरञ्जन्यै नमःजनों को प्रसन्न करने वाली
- 5.ॐ नित्यप्रकाशिन्यै नमःनित्य प्रकाशमान
- 6.ॐ स्वप्रकाशस्वरूपिण्यै नमःस्वयं-प्रकाश स्वरूपा
- 7.ॐ महालक्ष्म्यै नमःमहालक्ष्मी
- 8.ॐ महाकाल्यै नमःमहाकाली-स्वरूपा
- 9.ॐ महाकन्यायै नमःमहाकन्या
- 10.ॐ सरस्वत्यै नमःसरस्वती-स्वरूपा
- 11.ॐ भोगवैभवसन्धात्र्यै नमःभोग व वैभव का संधान करने वाली
- 12.ॐ भक्तानुग्रहकारिण्यै नमःभक्तों पर अनुग्रह करने वाली
- 13.ॐ ईशावास्यायै नमःईशावास्य उपनिषद् की वाच्य-स्वरूपा
- 14.ॐ महामायायै नमःमहामाया
- 15.ॐ महादेव्यै नमःमहादेवी
- 16.ॐ महेश्वर्यै नमःमहेश्वरी
- 17.ॐ हृल्लेखायै नमःहृल्लेखा बीज-स्वरूपा
- 18.ॐ परमायै नमःपरम
- 19.ॐ शक्तये नमःशक्ति-स्वरूपा
- 20.ॐ मातृकाबीजरुपिण्यै नमःमातृका-बीजों का रूप धारण करने वाली
- 21.ॐ नित्यानन्दायै नमःनित्य आनंद-स्वरूपा
- 22.ॐ नित्यबोधायै नमःनित्य बोध-स्वरूपा
- 23.ॐ नादिन्यै नमःनाद-स्वरूपा
- 24.ॐ जनमोदिन्यै नमःजनों को आनंदित करने वाली
- 25.ॐ सत्यप्रत्ययिन्यै नमःसत्य की प्रतीति कराने वाली
- 26.ॐ स्वप्रकाशात्मरूपिण्यै नमःस्वयं-प्रकाश आत्म-स्वरूपा
- 27.ॐ त्रिपुरायै नमःत्रिपुरा
- 28.ॐ भैरव्यै नमःभैरवी
- 29.ॐ विद्यायै नमःविद्या-स्वरूपा
- 30.ॐ हंसायै नमःहंस-स्वरूपा
- 31.ॐ वागीश्वर्यै नमःवाणी की ईश्वरी
- 32.ॐ शिवायै नमःशिवा; कल्याणस्वरूपा
- 33.ॐ वाग्देव्यै नमःवाग्देवी
- 34.ॐ महारात्र्यै नमःमहारात्रि-स्वरूपा
- 35.ॐ कालरात्र्यै नमःकालरात्रि-स्वरूपा
- 36.ॐ त्रिलोचनायै नमःतीन नेत्रों वाली
- 37.ॐ भद्रकाल्यै नमःभद्रकाली
- 38.ॐ कराल्यै नमःकराली
- 39.ॐ महाकाल्यै नमःमहाकाली
- 40.ॐ तिलोत्तमायै नमःतिलोत्तमा-स्वरूपा
- 41.ॐ काल्यै नमःकाली
- 42.ॐ करालवक्त्रान्तायै नमःकराल मुख वाली
- 43.ॐ कामाक्ष्यै नमःकामाक्षी
- 44.ॐ कामदायै नमःकामनाएँ पूर्ण करने वाली
- 45.ॐ शुभायै नमःशुभा
- 46.ॐ चण्डिकायै नमःचण्डिका
- 47.ॐ चण्डरूपेशायै नमःचण्ड-रूप की स्वामिनी
- 48.ॐ चामुण्डायै नमःचामुण्डा
- 49.ॐ चक्रधारिण्यै नमःचक्र धारण करने वाली
- 50.ॐ त्रैलोक्यजनन्यै नमःतीनों लोकों की जननी
- 51.ॐ देव्यै नमःदेवी
- 52.ॐ त्रैलोक्यविजयोत्तमायै नमःतीनों लोकों पर विजय में उत्तम
- 53.ॐ सिद्धलक्ष्म्यै नमःसिद्धि देने वाली लक्ष्मी
- 54.ॐ क्रियालक्ष्म्यै नमःक्रिया-रूपा लक्ष्मी
- 55.ॐ मोक्षलक्ष्म्यै नमःमोक्ष देने वाली लक्ष्मी
- 56.ॐ प्रसादिन्यै नमःप्रसाद देने वाली
- 57.ॐ उमायै नमःउमा
- 58.ॐ भगवत्यै नमःभगवती
- 59.ॐ दुर्गायै नमःदुर्गा
- 60.ॐ चान्द्र्यै नमःचन्द्र-संबंधी; चान्द्री
- 61.ॐ दाक्षायण्यै नमःदक्ष-पुत्री
- 62.ॐ प्रत्यङ्गिरायै नमःप्रत्यंगिरा-स्वरूपा
- 63.ॐ धरायै नमःधरा; पृथ्वी-स्वरूपा
- 64.ॐ वेलायै नमःवेला; समुद्र-तट व काल-मर्यादा स्वरूपा
- 65.ॐ लोकमात्रे नमःलोकों की माता
- 66.ॐ हरिप्रियायै नमःहरि को प्रिय
- 67.ॐ पार्वत्यै नमःपार्वती
- 68.ॐ परमायै नमःपरम
- 69.ॐ देव्यै नमःदेवी
- 70.ॐ ब्रह्मविद्याप्रदायिन्यै नमःब्रह्मविद्या प्रदान करने वाली
- 71.ॐ अरूपायै नमःरूप-रहित
- 72.ॐ बहुरूपायै नमःअनेक रूपों वाली
- 73.ॐ विरूपायै नमःविरूप; विलक्षण रूप वाली
- 74.ॐ विश्वरूपिण्यै नमःविश्व-रूप धारण करने वाली
- 75.ॐ पञ्चभूतात्मिकायै नमःपंचभूत-स्वरूपा
- 76.ॐ परायै नमःपर, श्रेष्ठ
- 77.ॐ काल्यै नमःकाली
- 78.ॐ मायै नमःमा; माता-स्वरूपा
- 79.ॐ पञ्चिकायै नमःपंचिका
- 80.ॐ वाग्म्यै नमःवाग्मी; सुवक्ता
- 81.ॐ हविःप्रत्यधिदेवतायै नमःहवि की प्रत्यधिदेवता
- 82.ॐ देवमात्रे नमःदेवों की माता
- 83.ॐ सुरेशानायै नमःदेवों की ईशानी
- 84.ॐ वेदगर्भायै नमःवेद जिनके गर्भ में हैं
- 85.ॐ अम्बिकायै नमःअम्बिका
- 86.ॐ धृत्यै नमःधृति-स्वरूपा
- 87.ॐ सङ्ख्यायै नमःसंख्या-स्वरूपा
- 88.ॐ जातये नमःजाति-स्वरूपा
- 89.ॐ क्रियाशक्त्यै नमःक्रिया-शक्ति
- 90.ॐ प्रकृत्यै नमःप्रकृति-स्वरूपा
- 91.ॐ मोहिन्यै नमःमोहित करने वाली
- 92.ॐ मह्यै नमःमही; पृथ्वी-स्वरूपा
- 93.ॐ यज्ञविद्यायै नमःयज्ञ-विद्या स्वरूपा
- 94.ॐ महाविद्यायै नमःमहाविद्या
- 95.ॐ गुह्यविद्यायै नमःगुह्य विद्या-स्वरूपा
- 96.ॐ विभावर्यै नमःविभावरी; रात्रि-स्वरूपा
- 97.ॐ ज्योतिष्मत्यै नमःज्योतिर्मयी
- 98.ॐ महामात्रे नमःमहामाता
- 99.ॐ सर्वमन्त्रफलप्रदायै नमःसमस्त मंत्रों का फल देने वाली
- 100.ॐ दारिद्र्यध्वंसिन्यै नमःदरिद्रता का ध्वंस करने वाली
विद्या, तीर्थ व नदी-स्वरूप (नाम 101–200)
- 101.ॐ देव्यै नमःदेवी
- 102.ॐ हृदयग्रन्थिभेदिन्यै नमःहृदय की ग्रंथि भेदने वाली
- 103.ॐ सहस्रादित्यसङ्काशायै नमःसहस्र सूर्यों के समान तेजस्विनी
- 104.ॐ चन्द्रिकायै नमःचन्द्रिका
- 105.ॐ चन्द्ररूपिण्यै नमःचन्द्र-रूप वाली
- 106.ॐ गायत्र्यै नमःगायत्री-स्वरूपा
- 107.ॐ सोमसम्भूत्यै नमःसोम से उत्पन्न
- 108.ॐ सावित्र्यै नमःसावित्री-स्वरूपा
- 109.ॐ प्रणवात्मिकायै नमःप्रणव अर्थात ॐ स्वरूपा
- 110.ॐ शाङ्कर्यै नमःशांकरी
- 111.ॐ वैष्णव्यै नमःवैष्णवी
- 112.ॐ ब्राह्म्यै नमःब्राह्मी
- 113.ॐ सर्वदेवनमस्कृतायै नमःसमस्त देवों द्वारा नमस्कृत
- 114.ॐ सेव्यदुर्गायै नमःसेवा करने योग्य दुर्गा
- 115.ॐ कुबेराक्ष्यै नमःकुबेर पर दृष्टि रखने वाली
- 116.ॐ करवीरनिवासिन्यै नमःकरवीर क्षेत्र में निवास करने वाली
- 117.ॐ जयायै नमःजया
- 118.ॐ विजयायै नमःविजया
- 119.ॐ जयन्त्यै नमःजयन्ती
- 120.ॐ अपराजितायै नमःअपराजिता
- 121.ॐ कुब्जिकायै नमःकुब्जिका
- 122.ॐ कालिकायै नमःकालिका
- 123.ॐ शास्त्र्यै नमःशास्त्र-स्वरूपा
- 124.ॐ वीणापुस्तकधारिण्यै नमःवीणा व पुस्तक धारण करने वाली
- 125.ॐ सर्वज्ञशक्त्यै नमःसर्वज्ञता की शक्ति
- 126.ॐ श्रीशक्त्यै नमःश्री की शक्ति
- 127.ॐ ब्रह्मविष्णुशिवात्मिकायै नमःब्रह्मा, विष्णु व शिव — तीनों की आत्म-स्वरूपा
- 128.ॐ इडापिङ्गलिकामध्यमृणालीतन्तुरुपिण्यै नमःइडा व पिंगला के मध्य मृणाल-तंतु के समान सूक्ष्म सुषुम्ना-रूपा
- 129.ॐ यज्ञेशान्यै नमःयज्ञ की ईशानी
- 130.ॐ प्रथायै नमःप्रथा; विस्तार-स्वरूपा
- 131.ॐ दीक्षायै नमःदीक्षा-स्वरूपा
- 132.ॐ दक्षिणायै नमःदक्षिणा-स्वरूपा
- 133.ॐ सर्वमोहिन्यै नमःसबको मोहित करने वाली
- 134.ॐ अष्टाङ्गयोगिन्यै नमःअष्टांग योग में स्थित
- 135.ॐ देव्यै नमःदेवी
- 136.ॐ निर्बीजध्यानगोचरायै नमःबीज-रहित निर्विकल्प ध्यान से ही जानने योग्य
- 137.ॐ सर्वतीर्थस्थितायै नमःसमस्त तीर्थों में स्थित
- 138.ॐ शुद्धायै नमःशुद्ध
- 139.ॐ सर्वपर्वतवासिन्यै नमःसमस्त पर्वतों पर निवास करने वाली
- 140.ॐ वेदशास्त्रप्रमायै नमःवेद व शास्त्र जिनका प्रमाण हैं
- 141.ॐ देव्यै नमःदेवी
- 142.ॐ षडङ्गादिपदक्रमायै नमःषडंग तथा पद-क्रम स्वरूपा
- 143.ॐ शिवायै नमःशिवा
- 144.ॐ धात्र्यै नमःधात्री; सबको धारण करने वाली
- 145.ॐ शुभानन्दायै नमःशुभ आनंद देने वाली
- 146.ॐ यज्ञकर्मस्वरूपिण्यै नमःयज्ञ-कर्म स्वरूपा
- 147.ॐ व्रतिन्यै नमःव्रत धारण करने वाली
- 148.ॐ मेनकायै नमःमेनका-स्वरूपा
- 149.ॐ देव्यै नमःदेवी
- 150.ॐ ब्रह्माण्यै नमःब्रह्माणी
- 151.ॐ ब्रह्मचारिण्यै नमःब्रह्मचारिणी
- 152.ॐ एकाक्षरपरायै नमःएकाक्षर (ॐ) में परायण
- 153.ॐ तारायै नमःतारा-स्वरूपा
- 154.ॐ भवबन्धविनाशिन्यै नमःभव-बंधन का नाश करने वाली
- 155.ॐ विश्वम्भरायै नमःविश्व का भरण करने वाली
- 156.ॐ धराधारायै नमःधरा को धारण करने वाली
- 157.ॐ निराधारायै नमःजिनका स्वयं कोई आधार नहीं
- 158.ॐ अधिकस्वरायै नमःअधिक स्वर वाली; उच्चतम
- 159.ॐ राकायै नमःराका; पूर्ण चंद्र की तिथि-स्वरूपा
- 160.ॐ कुह्वे नमःकुहू; अमावस्या-तिथि स्वरूपा
- 161.ॐ अमावास्यायै नमःअमावस्या-स्वरूपा
- 162.ॐ पूर्णिमायै नमःपूर्णिमा-स्वरूपा
- 163.ॐ अनुमत्यै नमःअनुमति-तिथि स्वरूपा
- 164.ॐ द्युतये नमःद्युति; कांति-स्वरूपा
- 165.ॐ सिनीवाल्यै नमःसिनीवाली-तिथि स्वरूपा
- 166.ॐ शिवायै नमःशिवा
- 167.ॐ अवश्यायै नमःअवश्याय; ओस-स्वरूपा
- 168.ॐ वैश्वदेव्यै नमःविश्वेदेवों की देवी
- 169.ॐ पिशङ्गिलायै नमःपिशंगिला; पिंगल वर्ण वाली
- 170.ॐ पिप्पलायै नमःपिप्पला; पीपल-स्वरूपा
- 171.ॐ विशालाक्ष्यै नमःविशाल नेत्रों वाली
- 172.ॐ रक्षोघ्न्यै नमःराक्षसों का नाश करने वाली
- 173.ॐ वृष्टिकारिण्यै नमःवृष्टि कराने वाली
- 174.ॐ दुष्टविद्राविण्यै नमःदुष्टों को भगा देने वाली
- 175.ॐ देव्यै नमःदेवी
- 176.ॐ सर्वोपद्रवनाशिन्यै नमःसमस्त उपद्रवों का नाश करने वाली
- 177.ॐ शारदायै नमःशारदा
- 178.ॐ शरसन्धानायै नमःबाण का संधान करने वाली
- 179.ॐ सर्वशस्त्रस्वरूपिण्यै नमःसमस्त शस्त्रों की स्वरूपा
- 180.ॐ युद्धमध्यस्थितायै नमःयुद्ध के मध्य में स्थित रहने वाली
- 181.ॐ देव्यै नमःदेवी
- 182.ॐ सर्वभूतप्रभञ्जन्यै नमःसमस्त भूतों का प्रभंजन करने वाली
- 183.ॐ अयुद्धायै नमःअयुद्धा; युद्ध-रहित
- 184.ॐ युद्धरूपायै नमःयुद्ध-रूपा
- 185.ॐ शान्तायै नमःशांत
- 186.ॐ शान्तिस्वरूपिण्यै नमःशांति-स्वरूपा
- 187.ॐ गङ्गायै नमःगंगा-स्वरूपा
- 188.ॐ सरस्वतीवेणीयमुनानर्मदापगायै नमःसरस्वती, वेणी, यमुना, नर्मदा तथा अन्य नदियों की स्वरूपा
- 189.ॐ समुद्रवसनावासायै नमःसमुद्र ही जिनका वस्त्र व निवास है
- 190.ॐ ब्रह्माण्डश्रेणिमेखलायै नमःब्रह्माण्डों की श्रेणी ही जिनकी मेखला है
- 191.ॐ पञ्चवक्त्रायै नमःपाँच मुख वाली
- 192.ॐ दशभुजायै नमःदस भुजाओं वाली
- 193.ॐ शुद्धस्फटिकसन्निभायै नमःशुद्ध स्फटिक के समान निर्मल
- 194.ॐ रक्तायै नमःरक्त वर्ण वाली
- 195.ॐ कृष्णायै नमःकृष्ण वर्ण वाली
- 196.ॐ सितायै नमःश्वेत वर्ण वाली
- 197.ॐ पीतायै नमःपीत वर्ण वाली
- 198.ॐ सर्ववर्णायै नमःसमस्त वर्णों वाली
- 199.ॐ निरीश्वर्यै नमःजिनके ऊपर कोई ईश्वर नहीं
- 200.ॐ कालिकायै नमःकालिका
काल, तिथि व गुण-स्वरूप (नाम 201–300)
- 201.ॐ चक्रिकायै नमःचक्र धारण करने वाली
- 202.ॐ देव्यै नमःदेवी
- 203.ॐ सत्यायै नमःसत्य-स्वरूपा
- 204.ॐ बटुकास्थितायै नमःबटुक के साथ स्थित
- 205.ॐ तरुण्यै नमःतरुणी
- 206.ॐ वारुण्यै नमःवारुणी
- 207.ॐ नार्यै नमःनारी-स्वरूपा
- 208.ॐ ज्येष्ठादेव्यै नमःज्येष्ठा देवी
- 209.ॐ सुरेश्वर्यै नमःदेवों की ईश्वरी
- 210.ॐ विश्वम्भराधरायै नमःविश्व का भरण करने वाली धरा
- 211.ॐ कर्त्र्यै नमःकर्त्री; करने वाली
- 212.ॐ गलार्गलविभञ्जन्यै नमःगले की अर्गला अर्थात अवरोध का भंजन करने वाली
- 213.ॐ सन्ध्यारात्रिर्दिवाज्योत्स्नायै नमःसंध्या, रात्रि, दिन व ज्योत्स्ना — सबकी स्वरूपा
- 214.ॐ कलाकाष्ठायै नमःकला व काष्ठा — काल-मात्राओं की स्वरूपा
- 215.ॐ निमेषिकायै नमःनिमेष-स्वरूपा
- 216.ॐ उर्व्यै नमःउर्वी; विस्तृत पृथ्वी-स्वरूपा
- 217.ॐ कात्यायन्यै नमःकात्यायनी
- 218.ॐ शुभ्रायै नमःशुभ्र, उज्ज्वल
- 219.ॐ संसारार्णवतारिण्यै नमःसंसार-सागर से तारने वाली
- 220.ॐ कपिलायै नमःकपिला
- 221.ॐ कीलिकायै नमःकीलिका; कीलक-स्वरूपा
- 222.ॐ अशोकायै नमःअशोका; शोक-रहित
- 223.ॐ मल्लिकानवमल्लिकायै नमःमल्लिका तथा नवमल्लिका पुष्प-स्वरूपा
- 224.ॐ देविकायै नमःदेविका
- 225.ॐ नन्दिकायै नमःनन्दिका
- 226.ॐ शान्तायै नमःशांता
- 227.ॐ भञ्जिकायै नमःभंजिका; भंग करने वाली
- 228.ॐ भयभञ्जिकायै नमःभय का भंजन करने वाली
- 229.ॐ कौशिक्यै नमःकौशिकी
- 230.ॐ वैदिक्यै नमःवैदिकी
- 231.ॐ देव्यै नमःदेवी
- 232.ॐ सौर्यै नमःसौरी; सूर्य-संबंधी
- 233.ॐ रूपाधिकायै नमःरूप में अधिक; अतिसुंदर
- 234.ॐ अतिभायै नमःअतिभा; अत्यंत कांतिमयी
- 235.ॐ दिग्वस्त्रायै नमःदिशाएँ ही जिनका वस्त्र हैं
- 236.ॐ नववस्त्रायै नमःनवीन वस्त्र धारण करने वाली
- 237.ॐ कन्यकायै नमःकन्यका
- 238.ॐ कमलोद्भवायै नमःकमल से उत्पन्न
- 239.ॐ श्रियै नमःश्री
- 240.ॐ सौम्यलक्षणायै नमःसौम्य लक्षणों वाली
- 241.ॐ अतीतदुर्गायै नमःदुर्गमता से भी परे
- 242.ॐ सूत्रप्रबोधिकायै नमःसूत्र का बोध कराने वाली
- 243.ॐ श्रद्धायै नमःश्रद्धा-स्वरूपा
- 244.ॐ मेधायै नमःमेधा-स्वरूपा
- 245.ॐ कृतये नमःकृति-स्वरूपा
- 246.ॐ प्रज्ञायै नमःप्रज्ञा-स्वरूपा
- 247.ॐ धारणायै नमःधारणा-स्वरूपा
- 248.ॐ कान्त्यै नमःकांति-स्वरूपा
- 249.ॐ श्रुतये नमःश्रुति-स्वरूपा
- 250.ॐ स्मृतये नमःस्मृति-स्वरूपा
- 251.ॐ धृतये नमःधृति-स्वरूपा
- 252.ॐ धन्यायै नमःधन्या
- 253.ॐ भूतये नमःभूति; ऐश्वर्य-स्वरूपा
- 254.ॐ इष्ट्यै नमःइष्टि; यज्ञ-स्वरूपा
- 255.ॐ मनीषिण्यै नमःमनीषिणी; बुद्धिमती
- 256.ॐ विरक्तये नमःविरक्ति-स्वरूपा
- 257.ॐ व्यापिन्यै नमःसर्वत्र व्यापिनी
- 258.ॐ मायायै नमःमाया-स्वरूपा
- 259.ॐ सर्वमायाप्रभञ्जन्यै नमःसमस्त माया का प्रभंजन करने वाली
- 260.ॐ माहेन्द्र्यै नमःमाहेन्द्री
- 261.ॐ मन्त्रिण्यै नमःमंत्रिणी
- 262.ॐ सिंह्यै नमःसिंही; सिंह-स्वरूपा
- 263.ॐ इन्द्रजालस्वरूपिण्यै नमःइन्द्रजाल-स्वरूपा
- 264.ॐ अवस्थात्रयनिर्मुक्तायै नमःजाग्रत्, स्वप्न व सुषुप्ति — तीनों अवस्थाओं से मुक्त
- 265.ॐ गुणत्रयविवर्जितायै नमःतीनों गुणों से रहित
- 266.ॐ ईषणत्रयनिर्मुक्तायै नमःपुत्र, वित्त व लोक — तीनों एषणाओं से मुक्त
- 267.ॐ सर्वरोगविवर्जितायै नमःसमस्त रोगों से रहित
- 268.ॐ योगिध्यानान्तगम्यायै नमःयोगियों के ध्यान के अंत में जानी जाने वाली
- 269.ॐ योगध्यानपरायणायै नमःयोग व ध्यान में परायण
- 270.ॐ त्रयीशिखायै नमःतीनों वेदों की शिखा-स्वरूपा
- 271.ॐ विशेषज्ञायै नमःविशेष ज्ञान रखने वाली
- 272.ॐ वेदान्तज्ञानरुपिण्यै नमःवेदांत-ज्ञान स्वरूपा
- 273.ॐ भारत्यै नमःभारती
- 274.ॐ कमलायै नमःकमला
- 275.ॐ भाषायै नमःभाषा-स्वरूपा
- 276.ॐ पद्मायै नमःपद्मा
- 277.ॐ पद्मवत्यै नमःपद्मवती
- 278.ॐ कृतये नमःकृति-स्वरूपा
- 279.ॐ गौतम्यै नमःगौतमी
- 280.ॐ गोमत्यै नमःगोमती
- 281.ॐ गौर्यै नमःगौरी
- 282.ॐ ईशानायै नमःईशाना
- 283.ॐ हंसवाहिन्यै नमःहंस पर विराजने वाली
- 284.ॐ नारायण्यै नमःनारायणी
- 285.ॐ प्रभाधारायै नमःप्रभा को धारण करने वाली
- 286.ॐ जाह्नव्यै नमःजाह्नवी; गंगा-स्वरूपा
- 287.ॐ शङ्करात्मजायै नमःशंकर की आत्मजा
- 288.ॐ चित्रघण्टायै नमःविचित्र घंटा वाली
- 289.ॐ सुनन्दायै नमःसुनंदा
- 290.ॐ श्रियै नमःश्री
- 291.ॐ मानव्यै नमःमानवी
- 292.ॐ मनुसम्भवायै नमःमनु से उत्पन्न
- 293.ॐ स्तम्भिन्यै नमःस्तंभन करने वाली
- 294.ॐ क्षोभिण्यै नमःक्षोभ उत्पन्न करने वाली
- 295.ॐ मार्यै नमःमारी-स्वरूपा
- 296.ॐ भ्रामिण्यै नमःभ्रमण कराने वाली
- 297.ॐ शत्रुमारिण्यै नमःशत्रुओं का नाश करने वाली
- 298.ॐ मोहिन्यै नमःमोहित करने वाली
- 299.ॐ द्वेषिण्यै नमःद्वेष उत्पन्न करने वाली
- 300.ॐ वीरायै नमःवीरा
योग, ग्रह-नक्षत्र व कला-स्वरूप (नाम 301–400)
- 301.ॐ अघोरायै नमःअघोरा
- 302.ॐ रुद्ररूपिण्यै नमःरुद्र-रूपिणी
- 303.ॐ रुद्रैकादशिन्यै नमःएकादश रुद्रों की स्वरूपा
- 304.ॐ पुण्यायै नमःपुण्या
- 305.ॐ कल्याण्यै नमःकल्याणी
- 306.ॐ लाभकारिण्यै नमःलाभ कराने वाली
- 307.ॐ देवदुर्गायै नमःदेवदुर्गा
- 308.ॐ महादुर्गायै नमःमहादुर्गा
- 309.ॐ स्वप्नदुर्गायै नमःस्वप्नदुर्गा
- 310.ॐ अष्टभैरव्यै नमःअष्ट भैरवी-स्वरूपा
- 311.ॐ सूर्यचन्द्राग्निरूपायै नमःसूर्य, चंद्र व अग्नि-रूपा
- 312.ॐ ग्रहनक्षत्ररूपिण्यै नमःग्रहों व नक्षत्रों की स्वरूपा
- 313.ॐ बिन्दुनादकलातीतायै नमःबिंदु, नाद व कला से परे
- 314.ॐ बिन्दुनादकलात्मिकायै नमःबिंदु, नाद व कला की स्वरूपा
- 315.ॐ दशवायुजयाकारायै नमःदश प्राण-वायुओं पर विजय का आकार
- 316.ॐ कलाषोडशसम्युतायै नमःसोलह कलाओं से युक्त
- 317.ॐ काश्यप्यै नमःकाश्यपी
- 318.ॐ कमलादेव्यै नमःकमलादेवी
- 319.ॐ नादचक्रनिवासिन्यै नमःनाद-चक्र में निवास करने वाली
- 320.ॐ मृडाधारायै नमःमृड अर्थात शिव की आधार-शक्ति
- 321.ॐ स्थिरायै नमःस्थिर
- 322.ॐ गुह्यायै नमःगुह्य; गोपनीय
- 323.ॐ देविकायै नमःदेविका
- 324.ॐ चक्ररूपिण्यै नमःचक्र-रूपिणी
- 325.ॐ अविद्यायै नमःअविद्या-स्वरूपा
- 326.ॐ शार्वर्यै नमःशार्वरी; रात्रि-स्वरूपा
- 327.ॐ भुञ्जायै नमःभुंजा; भोग कराने वाली
- 328.ॐ जम्भासुरनिबर्हिण्यै नमःजम्भासुर का संहार करने वाली
- 329.ॐ श्रीकायायै नमःश्री ही जिनकी काया है
- 330.ॐ श्रीकलायै नमःश्री की कला-स्वरूपा
- 331.ॐ शुभ्रायै नमःशुभ्र
- 332.ॐ कर्मनिर्मूलकारिण्यै नमःकर्म-बंधन को निर्मूल करने वाली
- 333.ॐ आदिलक्ष्म्यै नमःआदिलक्ष्मी
- 334.ॐ गुणाधारायै नमःगुणों की आधार
- 335.ॐ पञ्चब्रह्मात्मिकायै नमःपंच-ब्रह्म स्वरूपा
- 336.ॐ परायै नमःपर, श्रेष्ठ
- 337.ॐ श्रुतये नमःश्रुति-स्वरूपा
- 338.ॐ ब्रह्ममुखावासायै नमःब्रह्मा के मुख में निवास करने वाली
- 339.ॐ सर्वसम्पत्तिरूपिण्यै नमःसमस्त संपत्ति की स्वरूपा
- 340.ॐ मृतसञ्जीवन्यै नमःमृतकों को जिलाने वाली संजीवनी
- 341.ॐ मैत्र्यै नमःमैत्री-स्वरूपा
- 342.ॐ कामिन्यै नमःकामिनी
- 343.ॐ कामवर्जितायै नमःकाम-रहित
- 344.ॐ निर्वाणमार्गदायै नमःनिर्वाण का मार्ग दिखाने वाली
- 345.ॐ देव्यै नमःदेवी
- 346.ॐ हंसिन्यै नमःहंसिनी
- 347.ॐ काशिकायै नमःकाशिका; काशी-स्वरूपा
- 348.ॐ क्षमायै नमःक्षमा-स्वरूपा
- 349.ॐ सपर्यायै नमःसपर्या; पूजा-स्वरूपा
- 350.ॐ गुणिन्यै नमःगुणवती
- 351.ॐ भिन्नायै नमःभिन्ना; विभेद-स्वरूपा
- 352.ॐ निर्गुणायै नमःनिर्गुणा
- 353.ॐ खण्डिताशुभायै नमःअशुभ का खंडन करने वाली
- 354.ॐ स्वामिन्यै नमःस्वामिनी
- 355.ॐ वेदिन्यै नमःवेदिनी; जानने वाली
- 356.ॐ शक्यायै नमःशक्या; प्राप्त करने योग्य
- 357.ॐ शाम्बर्यै नमःशाम्बरी विद्या-स्वरूपा
- 358.ॐ चक्रधारिण्यै नमःचक्र धारण करने वाली
- 359.ॐ दण्डिन्यै नमःदंड धारण करने वाली
- 360.ॐ मुण्डिन्यै नमःमुंड धारण करने वाली
- 361.ॐ व्याघ्र्यै नमःव्याघ्री
- 362.ॐ शिखिन्यै नमःशिखिनी; शिखा वाली
- 363.ॐ सोमसंहतये नमःसोम के साथ संहति अर्थात एकता वाली
- 364.ॐ चिन्तामणये नमःचिंतामणि-स्वरूपा
- 365.ॐ चिदानन्दायै नमःचिदानंद-स्वरूपा
- 366.ॐ पञ्चबाणप्रबोधिन्यै नमःकामदेव के पाँच बाणों को जाग्रत करने वाली
- 367.ॐ बाणश्रेणये नमःबाणों की श्रेणी-स्वरूपा
- 368.ॐ सहस्राक्ष्यै नमःसहस्र नेत्रों वाली
- 369.ॐ सहस्रभुजपादुकायै नमःसहस्र भुजाओं व चरण-पादुकाओं वाली
- 370.ॐ सन्ध्यावलये नमःसंध्या का वलय-स्वरूपा
- 371.ॐ त्रिसन्ध्याख्यायै नमःत्रिसंध्या नाम वाली
- 372.ॐ ब्रह्माण्डमणिभूषणायै नमःब्रह्माण्ड ही जिनका मणि-आभूषण है
- 373.ॐ वासव्यै नमःवासवी
- 374.ॐ वारुणीसेनायै नमःवरुण की सेना-स्वरूपा
- 375.ॐ कुलिकायै नमःकुलिका
- 376.ॐ मन्त्ररञ्जिन्यै नमःमंत्रों से प्रसन्न होने वाली
- 377.ॐ जितप्राणस्वरूपायै नमःप्राण को जीत लेने के स्वरूप वाली
- 378.ॐ कान्तायै नमःकांता
- 379.ॐ काम्यवरप्रदायै नमःइच्छित वर देने वाली
- 380.ॐ मन्त्रब्राह्मणविद्यार्थायै नमःमंत्र, ब्राह्मण व विद्या का अर्थ-स्वरूपा
- 381.ॐ नादरुपायै नमःनाद-रूपा
- 382.ॐ हविष्मत्यै नमःहवि से युक्त
- 383.ॐ आथर्वणिः श्रुतयै नमःअथर्ववेद की श्रुति-स्वरूपा
- 384.ॐ शून्यायै नमःशून्य-स्वरूपा
- 385.ॐ कल्पनावर्जितायै नमःकल्पना से रहित
- 386.ॐ सत्यै नमःसती; सत्-स्वरूपा
- 387.ॐ सत्ताजातये नमःसत्ता से उत्पन्न
- 388.ॐ प्रमायै नमःप्रमा; यथार्थ ज्ञान-स्वरूपा
- 389.ॐ अमेयायै नमःअमेय; जिनका माप न हो सके
- 390.ॐ अप्रमितये नमःप्रमाण से परे
- 391.ॐ प्राणदायै नमःप्राण देने वाली
- 392.ॐ गतये नमःगति-स्वरूपा
- 393.ॐ अवर्णायै नमःवर्ण-रहित
- 394.ॐ पञ्चवर्णायै नमःपाँच वर्णों वाली
- 395.ॐ सर्वदायै नमःसब कुछ देने वाली
- 396.ॐ भुवनेश्वर्यै नमःभुवनों की ईश्वरी
- 397.ॐ त्रैलोक्यमोहिन्यै नमःतीनों लोकों को मोहित करने वाली
- 398.ॐ विद्यायै नमःविद्या-स्वरूपा
- 399.ॐ सर्वभर्त्र्यै नमःसबका भरण करने वाली
- 400.ॐ क्षरायै नमःक्षर; नाशवान् रूप में भी व्याप्त
मंडल, चक्र व वेद-विद्या (नाम 401–500)
- 401.ॐ अक्षरायै नमःअक्षर; अविनाशी
- 402.ॐ हिरण्यवर्णायै नमःस्वर्ण के समान वर्ण वाली
- 403.ॐ हरिण्यै नमःहरिणी
- 404.ॐ सर्वोपद्रवनाशिन्यै नमःसमस्त उपद्रवों का नाश करने वाली
- 405.ॐ कैवल्यपदवीरेखायै नमःकैवल्य-पद तक ले जाने वाली रेखा
- 406.ॐ सूर्यमण्डलसंस्थितायै नमःसूर्य-मंडल में स्थित
- 407.ॐ सोममण्डलमध्यस्थायै नमःचंद्र-मंडल के मध्य में स्थित
- 408.ॐ वह्निमण्डलसंस्थितायै नमःअग्नि-मंडल में स्थित
- 409.ॐ वायुमण्डलमध्यस्थायै नमःवायु-मंडल के मध्य में स्थित
- 410.ॐ व्योममण्डलसंस्थितायै नमःआकाश-मंडल में स्थित
- 411.ॐ चक्रिकायै नमःचक्रिका
- 412.ॐ चक्रमध्यस्थायै नमःचक्र के मध्य में स्थित
- 413.ॐ चक्रमार्गप्रवर्तिन्यै नमःचक्र-मार्ग पर प्रवृत्त कराने वाली
- 414.ॐ कोकिलाकुलचक्रेशायै नमःकोकिल-समूह के चक्र की ईश्वरी
- 415.ॐ पक्षतये नमःपक्षति; पक्ष का आरंभ-स्वरूपा
- 416.ॐ पङ्क्तिपावनायै नमःपंक्ति को पावन करने वाली
- 417.ॐ सर्वसिद्धान्तमार्गस्थायै नमःसमस्त सिद्धांत-मार्गों में स्थित
- 418.ॐ षड्वर्णावरवर्जितायै नमःछह वर्णों के आवरण से रहित
- 419.ॐ शतरुद्रहरायै नमःसौ रुद्रों को भी हरने वाली
- 420.ॐ हन्त्र्यै नमःहन्त्री; संहार करने वाली
- 421.ॐ सर्वसंहारकारिण्यै नमःसमस्त का संहार करने वाली
- 422.ॐ पुरुषायै नमःपुरुष-स्वरूपा
- 423.ॐ पौरुष्यै नमःपौरुष-स्वरूपा
- 424.ॐ तुष्टये नमःतुष्टि-स्वरूपा
- 425.ॐ सर्वतन्त्रप्रसूतिकायै नमःसमस्त तंत्रों की प्रसूति अर्थात उद्गम
- 426.ॐ अर्धनारीश्वर्यै नमःअर्धनारीश्वरी
- 427.ॐ देव्यै नमःदेवी
- 428.ॐ सर्वविद्याप्रदायिन्यै नमःसमस्त विद्याएँ प्रदान करने वाली
- 429.ॐ भार्गव्यै नमःभार्गवी
- 430.ॐ याजुषीविद्यायै नमःयजुर्वेद की विद्या-स्वरूपा
- 431.ॐ सर्वोपनिषदास्थितायै नमःसमस्त उपनिषदों में स्थित
- 432.ॐ व्योमकेशायै नमःआकाश ही जिनके केश हैं
- 433.ॐ अखिलप्राणायै नमःसमस्त प्राणों की स्वरूपा
- 434.ॐ पञ्चकोशविलक्षणायै नमःपाँचों कोशों से विलक्षण
- 435.ॐ पञ्चकोशात्मिकायै नमःपंचकोश-स्वरूपा
- 436.ॐ प्रतीचे नमःप्रतीची; अंतर्मुखी
- 437.ॐ पञ्चब्रह्मात्मिकायै नमःपंच-ब्रह्म स्वरूपा
- 438.ॐ शिवायै नमःशिवा
- 439.ॐ जगज्जराजनित्र्यै नमःजगत् की जरा को जन्म देने वाली
- 440.ॐ पञ्चकर्मप्रसूतिकायै नमःपाँच कर्मों की प्रसूति
- 441.ॐ वाग्देव्यै नमःवाग्देवी
- 442.ॐ आभरणाकारायै नमःआभरण के आकार वाली
- 443.ॐ सर्वकाम्यस्थितास्थितये नमःसमस्त कामनाओं में स्थित तथा अस्थित
- 444.ॐ अष्टादशचतुःषष्टिपीठिकाविद्यायुतायै नमःअठारह व चौंसठ पीठिकाओं की विद्या से युक्त
- 445.ॐ कालिकाकर्षणश्यामायै नमःकालिका का आकर्षण करने वाली श्यामा
- 446.ॐ यक्षिण्यै नमःयक्षिणी
- 447.ॐ किन्नरेश्वर्यै नमःकिन्नरों की ईश्वरी
- 448.ॐ केतक्यै नमःकेतकी पुष्प-स्वरूपा
- 449.ॐ मल्लिकायै नमःमल्लिका पुष्प-स्वरूपा
- 450.ॐ अशोकायै नमःअशोका
- 451.ॐ वाराह्यै नमःवाराही
- 452.ॐ धरण्यै नमःधरणी
- 453.ॐ ध्रुवायै नमःध्रुवा; अचल
- 454.ॐ नारसिंह्यै नमःनारसिंही
- 455.ॐ महोग्रास्यायै नमःमहा उग्र मुख वाली
- 456.ॐ भक्तानामार्तिनाशिन्यै नमःभक्तों की पीड़ा नष्ट करने वाली
- 457.ॐ अन्तर्बलायै नमःभीतर बल देने वाली
- 458.ॐ स्थिरायै नमःस्थिरा
- 459.ॐ लक्ष्म्यै नमःलक्ष्मी
- 460.ॐ जरामरणनाशिन्यै नमःजरा व मृत्यु का नाश करने वाली
- 461.ॐ श्रीरञ्जितायै नमःश्री से सुशोभित
- 462.ॐ महाकायायै नमःमहाकाया
- 463.ॐ सोमसूर्याग्निलोचनायै नमःसोम, सूर्य व अग्नि जिनके नेत्र हैं
- 464.ॐ अदितये नमःअदिति
- 465.ॐ देवमात्रे नमःदेवों की माता
- 466.ॐ अष्टपुत्रायै नमःआठ पुत्रों वाली
- 467.ॐ अष्टयोगिन्यै नमःआठ योगिनियों की स्वरूपा
- 468.ॐ अष्टप्रकृतये नमःआठ प्रकृतियों की स्वरूपा
- 469.ॐ अष्टाष्टविभ्राजद्विकृताकृतये नमःचौंसठ रूपों में देदीप्यमान, कृत तथा अकृत स्वरूपा
- 470.ॐ दुर्भिक्षध्वंसिन्यै नमःदुर्भिक्ष का ध्वंस करने वाली
- 471.ॐ सीतायै नमःसीता
- 472.ॐ सत्यायै नमःसत्या
- 473.ॐ रुक्मिण्यै नमःरुक्मिणी
- 474.ॐ ख्यातिजायै नमःख्याति से उत्पन्न
- 475.ॐ भार्गव्यै नमःभार्गवी
- 476.ॐ देवयोनये नमःदेव-योनि स्वरूपा
- 477.ॐ तपस्विन्यै नमःतपस्विनी
- 478.ॐ शाकम्भर्यै नमःशाकम्भरी
- 479.ॐ महाशोणायै नमःमहाशोणा; अत्यंत रक्त वर्ण वाली
- 480.ॐ गरुडोपरिसंस्थितायै नमःगरुड़ पर विराजने वाली
- 481.ॐ सिंहगायै नमःसिंह पर गति करने वाली
- 482.ॐ व्याघ्रगायै नमःव्याघ्र पर गति करने वाली
- 483.ॐ वायुगायै नमःवायु पर गति करने वाली
- 484.ॐ महाद्रिगायै नमःमहापर्वत पर गति करने वाली
- 485.ॐ अकारादिक्षकारान्तायै नमः"अ" से "क्ष" तक समस्त वर्ण-स्वरूपा
- 486.ॐ सर्वविद्याधिदेवतायै नमःसमस्त विद्याओं की अधिदेवता
- 487.ॐ मन्त्रव्याख्याननिपुणायै नमःमंत्रों की व्याख्या में निपुण
- 488.ॐ ज्योतिशास्त्रैकलोचनायै नमःज्योतिष-शास्त्र ही जिनका एकमात्र नेत्र है
- 489.ॐ इडापिङ्गलिकामध्यसुषुम्नायै नमःइडा व पिंगला के मध्य सुषुम्ना-स्वरूपा
- 490.ॐ ग्रन्थिभेदिन्यै नमःग्रंथियों का भेदन करने वाली
- 491.ॐ कालचक्राश्रयोपेतायै नमःकाल-चक्र के आश्रय से युक्त
- 492.ॐ कालचक्रस्वरूपिण्यै नमःकाल-चक्र स्वरूपा
- 493.ॐ वैशारद्यै नमःवैशारदी; निपुणा
- 494.ॐ मतिश्रेष्ठायै नमःबुद्धि में श्रेष्ठ
- 495.ॐ वरिष्ठायै नमःवरिष्ठा
- 496.ॐ सर्वदीपिकायै नमःसबको प्रकाशित करने वाली
- 497.ॐ वैनायक्यै नमःवैनायकी
- 498.ॐ वरारोहायै नमःसुंदर स्वरूप वाली
- 499.ॐ श्रोणिवेलायै नमःश्रोणि की वेला-स्वरूपा
- 500.ॐ बहिर्वलये नमःबाहरी वलय-स्वरूपा
छंद, वाणी व शास्त्र-स्वरूप (नाम 501–600)
- 501.ॐ जम्भिन्यै नमःजम्भिनी; ग्रसने वाली
- 502.ॐ जृम्भिण्यै नमःजृम्भिणी; विस्तार करने वाली
- 503.ॐ जम्भकारिण्यै नमःजम्भ का नाश करने वाली
- 504.ॐ गणकारिकायै नमःगणों की रचना करने वाली
- 505.ॐ शरण्यै नमःशरण देने वाली
- 506.ॐ चक्रिकायै नमःचक्रिका
- 507.ॐ अनन्तायै नमःअनन्ता
- 508.ॐ सर्वव्याधिचिकित्सक्यै नमःसमस्त व्याधियों की चिकित्सा करने वाली
- 509.ॐ देवक्यै नमःदेवकी
- 510.ॐ देवसङ्काशायै नमःदेवों के समान तेजस्विनी
- 511.ॐ वारिधये नमःवारिधि; समुद्र-स्वरूपा
- 512.ॐ करुणाकरायै नमःकरुणा की खान
- 513.ॐ शर्वर्यै नमःशर्वरी; रात्रि-स्वरूपा
- 514.ॐ सर्वसम्पन्नायै नमःसमस्त संपदाओं से युक्त
- 515.ॐ सर्वपापप्रभञ्जन्यै नमःसमस्त पापों का प्रभंजन करने वाली
- 516.ॐ एकमात्रायै नमःएक मात्रा-स्वरूपा
- 517.ॐ द्विमात्रायै नमःदो मात्रा-स्वरूपा
- 518.ॐ त्रिमात्रायै नमःतीन मात्रा-स्वरूपा
- 519.ॐ अपरायै नमःअपरा
- 520.ॐ अर्धमात्रायै नमःअर्ध-मात्रा स्वरूपा
- 521.ॐ परायै नमःपरा
- 522.ॐ सूक्ष्मायै नमःसूक्ष्म
- 523.ॐ सूक्ष्मार्थार्थपरायै नमःसूक्ष्म अर्थ के भी परम अर्थ-स्वरूपा
- 524.ॐ एकवीरायै नमःएकवीरा
- 525.ॐ विशेषाख्यायै नमःविशेष नाम वाली
- 526.ॐ षष्ठीदेव्यै नमःषष्ठी देवी
- 527.ॐ मनस्विन्यै नमःमनस्विनी
- 528.ॐ नैष्कर्म्यायै नमःनैष्कर्म्य-स्वरूपा
- 529.ॐ निष्कलालोकायै नमःनिष्कल लोक-स्वरूपा
- 530.ॐ ज्ञानकर्माधिकायै नमःज्ञान व कर्म से भी अधिक
- 531.ॐ गुणायै नमःगुण-स्वरूपा
- 532.ॐ सबन्ध्वानन्दसन्दोहायै नमःबंधुओं सहित आनंद का समूह
- 533.ॐ व्योमाकारायै नमःआकाश के समान आकार वाली
- 534.ॐ अनिरूपितायै नमःजिनका निरूपण नहीं हो सकता
- 535.ॐ गद्यपद्यात्मिकायै नमःगद्य व पद्य दोनों की स्वरूपा
- 536.ॐ वाण्यै नमःवाणी-स्वरूपा
- 537.ॐ सर्वालङ्कारसम्युतायै नमःसमस्त अलंकारों से युक्त
- 538.ॐ साधुबन्धपदन्यासायै नमःसुंदर बंध व पद-न्यास वाली
- 539.ॐ सर्वौकसे नमःसबका निवास-स्थान
- 540.ॐ घटिकावलये नमःघटिकाओं का वलय-स्वरूपा
- 541.ॐ षट्कर्मिण्यै नमःषट्कर्म करने वाली
- 542.ॐ कर्कशाकारायै नमःकर्कश आकार वाली
- 543.ॐ सर्वकर्मविवर्जितायै नमःसमस्त कर्मों से रहित
- 544.ॐ आदित्यवर्णायै नमःसूर्य के समान वर्ण वाली
- 545.ॐ अपर्णायै नमःअपर्णा
- 546.ॐ कामिन्यै नमःकामिनी
- 547.ॐ वररूपिण्यै नमःश्रेष्ठ रूप वाली
- 548.ॐ ब्रह्माण्यै नमःब्रह्माणी
- 549.ॐ ब्रह्मसन्तानायै नमःब्रह्म की संतान-स्वरूपा
- 550.ॐ वेदवागीश्वर्यै नमःवेद-वाणी की ईश्वरी
- 551.ॐ शिवायै नमःशिवा
- 552.ॐ पुराणन्यायमीमांसाधर्मशास्त्रागमश्रुतायै नमःपुराण, न्याय, मीमांसा, धर्मशास्त्र, आगम व श्रुति — सबमें सुनी जाने वाली
- 553.ॐ सद्योवेदवत्यै नमःतत्काल वेदवती-स्वरूपा
- 554.ॐ सर्वायै नमःसर्व-स्वरूपा
- 555.ॐ हंस्यै नमःहंसी
- 556.ॐ विद्याधिदेवतायै नमःविद्या की अधिदेवता
- 557.ॐ विश्वेश्वर्यै नमःविश्व की ईश्वरी
- 558.ॐ जगद्धात्र्यै नमःजगत् को धारण करने वाली
- 559.ॐ विश्वनिर्माणकारिण्यै नमःविश्व का निर्माण करने वाली
- 560.ॐ वैदिक्यै नमःवैदिकी
- 561.ॐ वेदरूपायै नमःवेद-रूपा
- 562.ॐ कालिकायै नमःकालिका
- 563.ॐ कालरूपिण्यै नमःकाल-रूपिणी
- 564.ॐ नारायण्यै नमःनारायणी
- 565.ॐ महादेव्यै नमःमहादेवी
- 566.ॐ सर्वतत्त्वप्रवर्तिन्यै नमःसमस्त तत्त्वों को प्रवृत्त करने वाली
- 567.ॐ हिरण्यवर्णरूपायै नमःस्वर्ण के समान वर्ण-रूप वाली
- 568.ॐ हिरण्यपदसम्भवायै नमःस्वर्णमय पद से उत्पन्न
- 569.ॐ कैवल्यपदव्यै नमःकैवल्य की पदवी-स्वरूपा
- 570.ॐ पुण्यायै नमःपुण्या
- 571.ॐ कैवल्यज्ञानलक्षितायै नमःकैवल्य-ज्ञान से लक्षित होने वाली
- 572.ॐ ब्रह्मसम्पत्तिरूपायै नमःब्रह्म-संपत्ति स्वरूपा
- 573.ॐ ब्रह्मसम्पत्तिकारिण्यै नमःब्रह्म-संपत्ति देने वाली
- 574.ॐ वारुण्यै नमःवारुणी
- 575.ॐ वारुणाराध्यायै नमःवरुण द्वारा आराधित
- 576.ॐ सर्वकर्मप्रवर्तिन्यै नमःसमस्त कर्मों को प्रवृत्त करने वाली
- 577.ॐ एकाक्षरपरायै नमःएकाक्षर में परायण
- 578.ॐ अयुक्तायै नमःअयुक्ता; संयोग-रहित
- 579.ॐ सर्वदारिद्र्यभञ्जिन्यै नमःसमस्त दरिद्रता का भंजन करने वाली
- 580.ॐ पाशाङ्कुशान्वितायै नमःपाश व अंकुश से युक्त
- 581.ॐ दिव्यायै नमःदिव्य
- 582.ॐ वीणाव्याख्याक्षसूत्रभृते नमःवीणा, व्याख्या-मुद्रा व अक्षमाला धारण करने वाली
- 583.ॐ एकमूर्त्यै नमःएक मूर्ति वाली
- 584.ॐ त्रयीमूर्त्यै नमःतीनों वेदों की मूर्ति
- 585.ॐ मधुकैटभभञ्जन्यै नमःमधु व कैटभ का भंजन करने वाली
- 586.ॐ साङ्ख्यायै नमःसांख्य-स्वरूपा
- 587.ॐ साङ्ख्यवत्यै नमःसांख्य से युक्त
- 588.ॐ ज्वालायै नमःज्वाला-स्वरूपा
- 589.ॐ ज्वलन्त्यै नमःज्वलंत, प्रज्वलित
- 590.ॐ कामरूपिण्यै नमःइच्छानुसार रूप धारण करने वाली
- 591.ॐ जाग्रन्त्यै नमःजाग्रत् अवस्था स्वरूपा
- 592.ॐ सर्वसम्पत्तये नमःसमस्त संपत्ति-स्वरूपा
- 593.ॐ सुषुप्तायै नमःसुषुप्ति अवस्था स्वरूपा
- 594.ॐ स्वेष्टदायिन्यै नमःअपने भक्तों का अभीष्ट देने वाली
- 595.ॐ कपालिन्यै नमःकपालिनी
- 596.ॐ महादंष्ट्रायै नमःमहान दाढ़ों वाली
- 597.ॐ भ्रुकुटीकुटिलाननायै नमःभ्रुकुटी से कुटिल मुख वाली
- 598.ॐ सर्वावासायै नमःसबमें निवास करने वाली
- 599.ॐ सुवासायै नमःसुंदर निवास वाली
- 600.ॐ बृहत्यै नमःबृहती छंद-स्वरूपा
व्याकरण, तंत्र व मातृका-स्वरूप (नाम 601–700)
- 601.ॐ अष्टये नमःअष्टि छंद-स्वरूपा
- 602.ॐ शक्वर्यै नमःशक्वरी छंद-स्वरूपा
- 603.ॐ छन्दोगणप्रतिष्ठायै नमःछंदों के समूह की प्रतिष्ठा
- 604.ॐ कल्माष्यै नमःकल्माषी; चितकबरे वर्ण वाली
- 605.ॐ करुणात्मिकायै नमःकरुणामयी
- 606.ॐ चक्षुष्मत्यै नमःनेत्रों वाली; दृष्टि-संपन्ना
- 607.ॐ महाघोषायै नमःमहान घोष वाली
- 608.ॐ खड्गचर्मधरायै नमःखड्ग व चर्म धारण करने वाली
- 609.ॐ अशनये नमःअशनि; वज्र-स्वरूपा
- 610.ॐ शिल्पवैचित्र्यविद्योतायै नमःशिल्प की विचित्रता व विद्या से देदीप्यमान
- 611.ॐ सर्वतोभद्रवासिन्यै नमःसर्वतोभद्र मंडल में निवास करने वाली
- 612.ॐ अचिन्त्यलक्षणाकारायै नमःअचिंत्य लक्षण व आकार वाली
- 613.ॐ सूत्रभाष्यनिबन्धनायै नमःसूत्र, भाष्य व निबंध स्वरूपा
- 614.ॐ सर्ववेदार्थसम्पत्तये नमःसमस्त वेदों के अर्थ की संपत्ति
- 615.ॐ सर्वशास्त्रार्थमातृकायै नमःसमस्त शास्त्रों के अर्थ की मातृका
- 616.ॐ अकारादिक्षकारान्तसर्ववर्णकृतस्थलायै नमः"अ" से "क्ष" तक समस्त वर्णों से रचित स्थल-स्वरूपा
- 617.ॐ सर्वलक्ष्म्यै नमःसर्वलक्ष्मी
- 618.ॐ सदानन्दायै नमःसदा आनंद-स्वरूपा
- 619.ॐ सारविद्यायै नमःसार-विद्या स्वरूपा
- 620.ॐ सदाशिवायै नमःसदाशिवा
- 621.ॐ सर्वज्ञायै नमःसर्वज्ञा
- 622.ॐ सर्वशक्त्यै नमःसर्वशक्ति-स्वरूपा
- 623.ॐ खेचरीरूपगायै नमःखेचरी-रूप में गति करने वाली
- 624.ॐ उच्छ्रितायै नमःउच्छ्रिता; उन्नत
- 625.ॐ अणिमादिगुणोपेतायै नमःअणिमा आदि सिद्धियों से युक्त
- 626.ॐ पराकाष्ठायै नमःपराकाष्ठा-स्वरूपा
- 627.ॐ परागतये नमःपरम गति
- 628.ॐ हंसयुक्तविमानस्थायै नमःहंसों से जुते विमान पर स्थित
- 629.ॐ हंसारूढायै नमःहंस पर आरूढ़
- 630.ॐ शशिप्रभायै नमःचंद्रमा के समान प्रभा वाली
- 631.ॐ भवान्यै नमःभवानी
- 632.ॐ वासनाशक्त्यै नमःवासना-शक्ति स्वरूपा
- 633.ॐ आकृतिस्थाखिलायै नमःआकृति में स्थित समस्त की स्वरूपा
- 634.ॐ अखिलायै नमःअखिल; सम्पूर्ण
- 635.ॐ तन्त्रहेतवे नमःतंत्रों की हेतु
- 636.ॐ विचित्राङ्ग्यै नमःविचित्र अंगों वाली
- 637.ॐ व्योमगङ्गाविनोदिन्यै नमःआकाश-गंगा में विनोद करने वाली
- 638.ॐ वर्षायै नमःवर्षा-स्वरूपा
- 639.ॐ वार्षिकायै नमःवार्षिकी
- 640.ॐ ऋग्यजुस्सामरूपिण्यै नमःऋक्, यजुः व साम — तीनों की रूपिणी
- 641.ॐ महानद्यै नमःमहानदी-स्वरूपा
- 642.ॐ नदीपुण्यायै नमःनदियों की पुण्य-स्वरूपा
- 643.ॐ अगण्यपुण्यगुणक्रियायै नमःअगणित पुण्य, गुण व क्रिया वाली
- 644.ॐ समाधिगतलभ्यार्थायै नमःसमाधि में ही प्राप्त होने योग्य अर्थ-स्वरूपा
- 645.ॐ श्रोतव्यायै नमःश्रवण करने योग्य
- 646.ॐ स्वप्रियायै नमःअपने भक्तों को प्रिय
- 647.ॐ घृणायै नमःघृणा अर्थात करुणा-स्वरूपा
- 648.ॐ नामाक्षरपरायै नमःनाम व अक्षर में परायण
- 649.ॐ उपसर्गनखाञ्चितायै नमःउपसर्ग ही जिनके नख हैं
- 650.ॐ निपातोरुद्वयीजङ्घायै नमःनिपात ही जिनकी दोनों जंघाएँ हैं
- 651.ॐ मातृकायै नमःमातृका-स्वरूपा
- 652.ॐ मन्त्ररूपिण्यै नमःमंत्र-रूपिणी
- 653.ॐ आसीनायै नमःआसीन; बैठी हुई
- 654.ॐ शयानायै नमःशयन करने वाली
- 655.ॐ तिष्ठन्त्यै नमःखड़ी रहने वाली
- 656.ॐ धावनाधिकायै नमःदौड़ने में भी अधिक
- 657.ॐ लक्ष्यलक्षणयोगाढ्यायै नमःलक्ष्य व लक्षण के योग से समृद्ध
- 658.ॐ ताद्रूप्यगणनाकृतयै नमःतद्रूपता की गणना करने वाली
- 659.ॐ एकरूपायै नमःएक रूप वाली
- 660.ॐ नैकरूपायै नमःअनेक रूपों वाली
- 661.ॐ तस्यै नमःतत्-स्वरूपा
- 662.ॐ इन्दुरूपायै नमःचंद्र-रूपा
- 663.ॐ तदाकृतये नमःउसी आकृति वाली
- 664.ॐ समासतद्धिताकारायै नमःसमास व तद्धित के आकार वाली
- 665.ॐ विभक्तिवचनात्मिकायै नमःविभक्ति व वचन की स्वरूपा
- 666.ॐ स्वाहाकारायै नमःस्वाहाकार-स्वरूपा
- 667.ॐ स्वधाकारायै नमःस्वधाकार-स्वरूपा
- 668.ॐ श्रीपत्यर्धाङ्गनन्दिन्यै नमःश्रीपति के अर्धांग को आनंदित करने वाली
- 669.ॐ गम्भीरायै नमःगंभीर
- 670.ॐ गहनायै नमःगहन
- 671.ॐ गुह्यायै नमःगुह्य; गोपनीय
- 672.ॐ योनिलिङ्गार्धधारिण्यै नमःयोनि व लिंग के अर्ध भाग को धारण करने वाली
- 673.ॐ शेषवासुकिसंसेव्यायै नमःशेष व वासुकि द्वारा सेवित
- 674.ॐ चपलायै नमःचपला; चंचल
- 675.ॐ वरवर्णिन्यै नमःश्रेष्ठ वर्ण वाली
- 676.ॐ कारुण्याकारसम्पत्तये नमःकरुणा के आकार वाली संपत्ति
- 677.ॐ कीलकृते नमःकीलक की रचना करने वाली
- 678.ॐ मन्त्रकीलिकायै नमःमंत्र की कीलिका-स्वरूपा
- 679.ॐ शक्तिबीजात्मिकायै नमःशक्ति-बीज स्वरूपा
- 680.ॐ सर्वमन्त्रेष्टायै नमःसमस्त मंत्रों को इष्ट
- 681.ॐ अक्षयकामनायै नमःअक्षय कामना-स्वरूपा
- 682.ॐ आग्नेय्यै नमःआग्नेयी
- 683.ॐ पार्थिवायै नमःपार्थिवी
- 684.ॐ आप्यायै नमःआप्या; जल-संबंधी
- 685.ॐ वायव्यायै नमःवायव्या
- 686.ॐ व्योमकेतनायै नमःआकाश ही जिनकी ध्वजा है
- 687.ॐ सत्यज्ञानात्मिकानन्दायै नमःसत्य, ज्ञान व आनंद स्वरूपा
- 688.ॐ ब्राह्म्यै नमःब्राह्मी
- 689.ॐ ब्रह्मणे नमःब्रह्म-स्वरूपा
- 690.ॐ सनातन्यै नमःसनातनी
- 691.ॐ अविद्यावासनायै नमःअविद्या की वासना-स्वरूपा
- 692.ॐ मायाप्रकृतये नमःमाया व प्रकृति स्वरूपा
- 693.ॐ सर्वमोहिन्यै नमःसबको मोहित करने वाली
- 694.ॐ शक्तये नमःशक्ति-स्वरूपा
- 695.ॐ धारणशक्तये नमःधारण करने की शक्ति
- 696.ॐ चिदचिच्छक्तियोगिन्यै नमःचित् व अचित् दोनों शक्तियों से युक्त
- 697.ॐ वक्त्रारुणायै नमःअरुण मुख वाली
- 698.ॐ महामायायै नमःमहामाया
- 699.ॐ मरीचये नमःमरीचि; किरण-स्वरूपा
- 700.ॐ मदमर्दिन्यै नमःमद का मर्दन करने वाली
ज्योतिष, पंचभूत व महा-नाम (नाम 701–800)
- 701.ॐ विराजे नमःविराट्-स्वरूपा
- 702.ॐ स्वाहायै नमःस्वाहा-स्वरूपा
- 703.ॐ स्वधायै नमःस्वधा-स्वरूपा
- 704.ॐ शुद्धायै नमःशुद्धा
- 705.ॐ निरुपास्तये नमःजिनकी उपासना निरुपाधिक है
- 706.ॐ सुभक्तिगायै नमःउत्तम भक्ति से प्राप्त होने वाली
- 707.ॐ निरूपिताद्वयीविद्यायै नमःनिरूपित अद्वैत विद्या-स्वरूपा
- 708.ॐ नित्यानित्यस्वरूपिण्यै नमःनित्य तथा अनित्य दोनों की स्वरूपा
- 709.ॐ वैराजमार्गसञ्चारायै नमःविराट्-मार्ग पर संचार करने वाली
- 710.ॐ सर्वसत्पथदर्शिन्यै नमःसमस्त सन्मार्ग दिखाने वाली
- 711.ॐ जालन्धर्यै नमःजालंधरी
- 712.ॐ मृडान्यै नमःमृडानी
- 713.ॐ भवान्यै नमःभवानी
- 714.ॐ भवभञ्जन्यै नमःभव-बंधन का भंजन करने वाली
- 715.ॐ त्रैकालिकज्ञानतन्तवे नमःतीनों कालों के ज्ञान का तंतु
- 716.ॐ त्रिकालज्ञानदायिन्यै नमःत्रिकाल-ज्ञान देने वाली
- 717.ॐ नादातीतायै नमःनाद से भी परे
- 718.ॐ स्मृतये नमःस्मृति-स्वरूपा
- 719.ॐ प्रज्ञायै नमःप्रज्ञा-स्वरूपा
- 720.ॐ धात्रीरूपायै नमःधात्री-रूपा
- 721.ॐ त्रिपुष्करायै नमःत्रिपुष्कर-स्वरूपा
- 722.ॐ पराजितायै नमःपराजिता
- 723.ॐ विधानज्ञायै नमःविधान को जानने वाली
- 724.ॐ विशेषितगुणात्मिकायै नमःविशेषित गुणों की स्वरूपा
- 725.ॐ हिरण्यकेशिन्यै नमःस्वर्णिम केश वाली
- 726.ॐ हेमब्रह्मसूत्रविचक्षणायै नमःस्वर्णमय ब्रह्मसूत्र में विचक्षण
- 727.ॐ असङ्ख्येयपरार्धान्तस्वरव्यञ्जनवैखर्यै नमःअसंख्य परार्ध तक फैले स्वर-व्यंजनों की वैखरी वाणी
- 728.ॐ मधुजिह्वायै नमःमधुर जिह्वा वाली
- 729.ॐ मधुमत्यै नमःमधुमती
- 730.ॐ मधुमासोदयायै नमःमधुमास अर्थात वसंत का उदय करने वाली
- 731.ॐ मधवे नमःमधु-स्वरूपा
- 732.ॐ माधव्यै नमःमाधवी
- 733.ॐ महाभागायै नमःमहाभागा
- 734.ॐ मेघगम्भीरनिस्वनायै नमःमेघ के समान गंभीर स्वर वाली
- 735.ॐ ब्रह्मविष्णुमहेशादिज्ञातव्यार्थविशेषगायै नमःब्रह्मा, विष्णु व महेश आदि द्वारा जानने योग्य विशेष अर्थ-स्वरूपा
- 736.ॐ नाभौवह्निशिखाकारायै नमःनाभि में अग्नि-शिखा के आकार वाली
- 737.ॐ ललाटेचन्द्रसन्निभायै नमःललाट में चंद्रमा के समान
- 738.ॐ भ्रूमध्येभास्कराकारायै नमःभ्रूमध्य में सूर्य के समान
- 739.ॐ हृदिसर्वताराकृतये नमःहृदय में समस्त ताराओं की आकृति वाली
- 740.ॐ कृत्तिकादिभरण्यन्त नक्षत्रेष्ट्यर्चितोदयायै नमःकृत्तिका से भरणी तक समस्त नक्षत्र-इष्टियों से अर्चित होकर उदित होने वाली
- 741.ॐ ग्रहविद्यात्मिकायै नमःग्रह-विद्या स्वरूपा
- 742.ॐ ज्योतिषे नमःज्योति-स्वरूपा
- 743.ॐ ज्योतिर्विदे नमःज्योतिष जानने वाली
- 744.ॐ मतिजीविकायै नमःबुद्धि ही जिनकी जीविका है
- 745.ॐ ब्रह्माण्डगर्भिण्यै नमःब्रह्माण्ड को गर्भ में धारण करने वाली
- 746.ॐ बालायै नमःबाला
- 747.ॐ सप्तावरणदेवतायै नमःसात आवरणों की देवता
- 748.ॐ वैराजोत्तमसाम्राज्यायै नमःविराट् के उत्तम साम्राज्य-स्वरूपा
- 749.ॐ कुमारकुशलोदयायै नमःकुमार के कुशल का उदय करने वाली
- 750.ॐ बगलायै नमःबगला
- 751.ॐ भ्रमराम्बायै नमःभ्रमराम्बा
- 752.ॐ शिवदूत्यै नमःशिवदूती
- 753.ॐ शिवात्मिकायै नमःशिव-स्वरूपा
- 754.ॐ मेरुविन्ध्यातिसंस्थानायै नमःमेरु व विंध्य पर स्थित
- 755.ॐ काश्मीरपुरवासिन्यै नमःकाश्मीर-पुर में निवास करने वाली
- 756.ॐ योगनिद्रायै नमःयोगनिद्रा-स्वरूपा
- 757.ॐ महानिद्रायै नमःमहानिद्रा-स्वरूपा
- 758.ॐ विनिद्रायै नमःनिद्रा-रहित
- 759.ॐ राक्षसाश्रितायै नमःराक्षसों द्वारा भी आश्रित
- 760.ॐ सुवर्णदायै नमःस्वर्ण देने वाली
- 761.ॐ महागङ्गायै नमःमहागंगा-स्वरूपा
- 762.ॐ पञ्चाख्यायै नमःपाँच नामों वाली
- 763.ॐ पञ्चसंहतये नमःपाँच संहति-स्वरूपा
- 764.ॐ सुप्रजातायै नमःउत्तम संतान वाली
- 765.ॐ सुवीरायै नमःउत्तम वीरता वाली
- 766.ॐ सुपोषायै नमःउत्तम पोषण करने वाली
- 767.ॐ सुपतये नमःउत्तम स्वामी वाली
- 768.ॐ शिवायै नमःशिवा
- 769.ॐ सुगृहायै नमःउत्तम गृह वाली
- 770.ॐ रक्तबीजान्तायै नमःरक्तबीज का अंत करने वाली
- 771.ॐ हतकन्दर्पजीविकायै नमःकामदेव की जीविका का नाश करने वाली
- 772.ॐ समुद्रव्योममध्यस्थायै नमःसमुद्र व आकाश के मध्य स्थित
- 773.ॐ समबिन्दुसमाश्रयायै नमःसम बिंदु का आश्रय लेने वाली
- 774.ॐ सौभाग्यरसजीवातवे नमःसौभाग्य-रस की जीवनी-शक्ति
- 775.ॐ सारासारविवेकदृशे नमःसार व असार का विवेक करने वाली दृष्टि
- 776.ॐ त्रिवल्यादिसुपुष्टाङ्गायै नमःत्रिवली आदि से सुपुष्ट अंगों वाली
- 777.ॐ भारत्यै नमःभारती
- 778.ॐ भरताश्रितायै नमःभरत-वंश द्वारा आश्रित
- 779.ॐ नादब्रह्ममयीविद्यायै नमःनाद-ब्रह्ममयी विद्या
- 780.ॐ ज्ञानब्रह्ममयीपरायै नमःज्ञान-ब्रह्ममयी परा
- 781.ॐ ब्रह्मनाड्यै नमःब्रह्म-नाड़ी स्वरूपा
- 782.ॐ निरुक्तये नमःनिरुक्त-स्वरूपा
- 783.ॐ ब्रह्मकैवल्यसाधनायै नमःब्रह्म-कैवल्य का साधन
- 784.ॐ कालिकेयमहोदारवीर्यविक्रमरूपिण्यै नमःकालिकेय दैत्यों के प्रति महान उदार वीर्य व विक्रम वाली
- 785.ॐ बडबाग्निशिखावक्त्रायै नमःबड़वानल की शिखा-रूप मुख वाली
- 786.ॐ महाकबलतर्पणायै नमःमहान ग्रास से तृप्त होने वाली
- 787.ॐ महाभूतायै नमःमहाभूत-स्वरूपा
- 788.ॐ महादर्पायै नमःमहान दर्प वाली
- 789.ॐ महासारायै नमःमहान सार-स्वरूपा
- 790.ॐ महाक्रतवे नमःमहाक्रतु-स्वरूपा
- 791.ॐ पञ्चभूतमहाग्रासायै नमःपंचभूतों को ग्रास बनाने वाली
- 792.ॐ पञ्चभूताधिदेवतायै नमःपंचभूतों की अधिदेवता
- 793.ॐ सर्वप्रमाणायै नमःसमस्त प्रमाण-स्वरूपा
- 794.ॐ सम्पत्तये नमःसंपत्ति-स्वरूपा
- 795.ॐ सर्वरोगप्रतिक्रियायै नमःसमस्त रोगों की प्रतिक्रिया अर्थात उपचार
- 796.ॐ ब्रह्माण्डान्तर्बहिर्व्याप्तायै नमःब्रह्माण्ड के भीतर व बाहर व्याप्त
- 797.ॐ विष्णुवक्षोविभूषिण्यै नमःविष्णु के वक्ष की विभूषा
- 798.ॐ शाङ्कर्यै नमःशांकरी
- 799.ॐ विधिवक्त्रस्थायै नमःब्रह्मा के मुख में स्थित
- 800.ॐ प्रवरायै नमःप्रवरा; श्रेष्ठ
मंगल, रक्षा व दोष-निवारण (नाम 801–900)
- 801.ॐ वरहेतुक्यै नमःवर देने की हेतु
- 802.ॐ हेममालायै नमःस्वर्ण-माला वाली
- 803.ॐ शिखामालायै नमःशिखा-माला वाली
- 804.ॐ त्रिशिखायै नमःतीन शिखाओं वाली
- 805.ॐ पञ्चलोचनायै नमःपाँच नेत्रों वाली
- 806.ॐ सर्वागमसदाचारमर्यादायै नमःसमस्त आगमों व सदाचार की मर्यादा
- 807.ॐ यातुभञ्जन्यै नमःयातुधानों अर्थात राक्षसों का भंजन करने वाली
- 808.ॐ पुण्यश्लोकप्रबन्धाढ्यायै नमःपुण्यश्लोक प्रबंधों से समृद्ध
- 809.ॐ सर्वान्तर्यामिरूपिण्यै नमःसबके अंतर्यामी-रूपा
- 810.ॐ सामगानसमाराध्यायै नमःसामगान से आराधित होने वाली
- 811.ॐ श्रोत्रकर्णरसायनायै नमःश्रोत्र व कर्ण के लिए रसायन-स्वरूपा
- 812.ॐ जीवलोकैकजीवातवे नमःजीव-लोक की एकमात्र जीवनी-शक्ति
- 813.ॐ भद्रोदारविलोकनायै नमःभद्र व उदार दृष्टि वाली
- 814.ॐ तडित्कोटिलसत्कान्त्यै नमःकरोड़ों बिजलियों के समान कांति वाली
- 815.ॐ तरुण्यै नमःतरुणी
- 816.ॐ हरिसुन्दर्यै नमःहरि की सुंदरी
- 817.ॐ मीननेत्रायै नमःमीन के समान नेत्रों वाली
- 818.ॐ इन्द्राक्ष्यै नमःइंद्राक्षी
- 819.ॐ विशालाक्ष्यै नमःविशाल नेत्रों वाली
- 820.ॐ सुमङ्गलायै नमःसुमंगला
- 821.ॐ सर्वमङ्गलसम्पन्नायै नमःसमस्त मंगलों से संपन्न
- 822.ॐ साक्षान्मङ्गलदेवतायै नमःसाक्षात् मंगल की देवता
- 823.ॐ देहहृद्दीपिकायै नमःदेह व हृदय को प्रकाशित करने वाली
- 824.ॐ दीप्तये नमःदीप्ति-स्वरूपा
- 825.ॐ जिह्मपापप्रणाशिन्यै नमःकुटिल पाप का नाश करने वाली
- 826.ॐ अर्धचन्द्रोल्लसद्दंष्ट्रायै नमःअर्धचंद्र के समान चमकती दाढ़ों वाली
- 827.ॐ यज्ञवाटीविलासिन्यै नमःयज्ञ-वाटिका में विलास करने वाली
- 828.ॐ महादुर्गायै नमःमहादुर्गा
- 829.ॐ महोत्साहायै नमःमहान उत्साह वाली
- 830.ॐ महादेवबलोदयायै नमःमहादेव के बल का उदय
- 831.ॐ डाकिनीड्यायै नमःडाकिनियों द्वारा स्तुत
- 832.ॐ शाकिनीड्यायै नमःशाकिनियों द्वारा स्तुत
- 833.ॐ साकिनीड्यायै नमःसाकिनियों द्वारा स्तुत
- 834.ॐ समस्तजुषे नमःसमस्त का सेवन करने वाली
- 835.ॐ निरङ्कुशायै नमःनिरंकुश
- 836.ॐ नाकिवन्द्यायै नमःदेवों द्वारा वंदित
- 837.ॐ षडाधाराधिदेवतायै नमःछह आधार-चक्रों की अधिदेवता
- 838.ॐ भुवनज्ञाननिःश्रेणये नमःभुवन-ज्ञान की सीढ़ी
- 839.ॐ भुवनाकारवल्लर्यै नमःभुवन के आकार वाली लता
- 840.ॐ शाश्वत्यै नमःशाश्वती
- 841.ॐ शाश्वताकारायै नमःशाश्वत आकार वाली
- 842.ॐ लोकानुग्रहकारिण्यै नमःलोकों पर अनुग्रह करने वाली
- 843.ॐ सारस्यै नमःसारसी; सरोवर-संबंधी
- 844.ॐ मानस्यै नमःमानसी
- 845.ॐ हंस्यै नमःहंसी
- 846.ॐ हंसलोकप्रदायिन्यै नमःहंस-लोक प्रदान करने वाली
- 847.ॐ चिन्मुद्रालङ्कृतकरायै नमःचिन्मुद्रा से अलंकृत हाथ वाली
- 848.ॐ कोटिसूर्यसमप्रभायै नमःकरोड़ों सूर्यों के समान प्रभा वाली
- 849.ॐ सुखप्राणिशिरोरेखायै नमःसुखी प्राणियों के मस्तक की रेखा-स्वरूपा
- 850.ॐ सददृष्टप्रदायिन्यै नमःसदा दृष्ट फल देने वाली
- 851.ॐ सर्वसाङ्कर्यदोषघ्न्यै नमःसमस्त सांकर्य-दोष का नाश करने वाली
- 852.ॐ ग्रहोपद्रवनाशिन्यै नमःग्रहों के उपद्रव का नाश करने वाली
- 853.ॐ क्षुद्रजन्तुभयघ्न्यै नमःक्षुद्र जंतुओं का भय हरने वाली
- 854.ॐ विषरोगादिभञ्जन्यै नमःविष व रोग आदि का भंजन करने वाली
- 855.ॐ सदाशान्तायै नमःसदा शांत
- 856.ॐ सदाशुद्धायै नमःसदा शुद्ध
- 857.ॐ गृहच्छिद्रनिवारिण्यै नमःगृह-दोष का निवारण करने वाली
- 858.ॐ कलिदोषप्रशमन्यै नमःकलियुग के दोषों का शमन करने वाली
- 859.ॐ कोलाहलपुरस्थितायै नमःकोलाहलपुर में स्थित
- 860.ॐ गौर्यै नमःगौरी
- 861.ॐ लाक्षणिक्यै नमःलाक्षणिकी; लक्षण से जानी जाने वाली
- 862.ॐ मुख्यायै नमःमुख्या
- 863.ॐ जघन्याकृतिवर्जितायै नमःनिम्न आकृति से रहित
- 864.ॐ मायायै नमःमाया-स्वरूपा
- 865.ॐ विद्यायै नमःविद्या-स्वरूपा
- 866.ॐ मूलभूतायै नमःमूलभूता
- 867.ॐ वासव्यै नमःवासवी
- 868.ॐ विष्णुचेतनायै नमःविष्णु की चेतना-स्वरूपा
- 869.ॐ वादिन्यै नमःवादिनी
- 870.ॐ वसुरूपायै नमःवसु-रूपा
- 871.ॐ वसुरत्नपरिच्छदायै नमःवसु व रत्नों का परिधान करने वाली
- 872.ॐ छान्दस्यै नमःछांदसी; छंद-संबंधी
- 873.ॐ चन्द्रहृदयायै नमःचंद्र ही जिनका हृदय है
- 874.ॐ मन्त्रस्वच्छन्दभैरव्यै नमःमंत्र-रूप स्वच्छंद भैरवी
- 875.ॐ वनमालायै नमःवनमाला-स्वरूपा
- 876.ॐ वैजयन्त्यै नमःवैजयंती-स्वरूपा
- 877.ॐ पञ्चदिव्यायुधात्मिकायै नमःपाँच दिव्य आयुधों की स्वरूपा
- 878.ॐ पीताम्बरमय्यै नमःपीतांबरमयी
- 879.ॐ चञ्चत्कौस्तुभायै नमःचमकते कौस्तुभ वाली
- 880.ॐ हरिकामिन्यै नमःहरि की कामिनी
- 881.ॐ नित्यायै नमःनित्या
- 882.ॐ तथ्यायै नमःतथ्य-स्वरूपा
- 883.ॐ रमायै नमःरमा
- 884.ॐ रामायै नमःरामा
- 885.ॐ रमण्यै नमःरमणी
- 886.ॐ मृत्युभञ्जन्यै नमःमृत्यु का भंजन करने वाली
- 887.ॐ ज्येष्ठायै नमःज्येष्ठा नक्षत्र-स्वरूपा
- 888.ॐ काष्ठायै नमःकाष्ठा; काल-मात्रा स्वरूपा
- 889.ॐ धनिष्ठान्तायै नमःधनिष्ठा तक व्याप्त
- 890.ॐ शराङ्ग्यै नमःशर के समान अंगों वाली
- 891.ॐ निर्गुणप्रियायै नमःनिर्गुण जिन्हें प्रिय है
- 892.ॐ मैत्रेयायै नमःमैत्रेयी
- 893.ॐ मित्रविन्दायै नमःमित्रविंदा
- 894.ॐ शेष्यशेषकलाशयायै नमःशेष व अशेष कलाओं की आश्रय
- 895.ॐ वाराणसीवासलभ्यायै नमःवाराणसी में निवास से प्राप्त होने वाली
- 896.ॐ आर्यावर्तजनस्तुतायै नमःआर्यावर्त के जनों द्वारा स्तुत
- 897.ॐ जगदुत्पत्तिसंस्थानसंहारत्रयकारणायै नमःजगत् की उत्पत्ति, स्थिति व संहार — तीनों की कारण
- 898.ॐ तुभ्यं नमः"तुभ्यम्" अर्थात तुम्हें, यह समर्पण-पद स्वरूपा
- 899.ॐ अम्बायै नमःअम्बा; माता
- 900.ॐ विष्णुसर्वस्वायै नमःविष्णु का सर्वस्व
अठारह भुजाओं के आयुध तथा अंतिम समर्पण (नाम 901–1003)
- 901.ॐ महेश्वर्यै नमःमहेश्वरी
- 902.ॐ सर्वलोकानां जनन्यै नमःसमस्त लोकों की जननी
- 903.ॐ पुण्यमूर्तये नमःपुण्य की मूर्ति
- 904.ॐ सिद्धलक्ष्म्यै नमःसिद्धलक्ष्मी
- 905.ॐ महाकाल्यै नमःमहाकाली
- 906.ॐ महालक्ष्म्यै नमःमहालक्ष्मी
- 907.ॐ सद्योजातादिपञ्चाग्निरूपायै नमःसद्योजात आदि पंचाग्नि-रूपा
- 908.ॐ पञ्चकपञ्चकायै नमःपाँच-पाँच के समूह स्वरूपा
- 909.ॐ यन्त्रलक्ष्म्यै नमःयंत्र-लक्ष्मी
- 910.ॐ भवत्यै नमःभवती; विद्यमान
- 911.ॐ आदये नमःआदि
- 912.ॐ आद्याद्यायै नमःआद्याओं में भी आद्या
- 913.ॐ सृष्ट्यादिकारणाकारविततये नमःसृष्टि आदि के कारण-आकार का विस्तार
- 914.ॐ दोषवर्जितायै नमःदोष से रहित
- 915.ॐ जगल्लक्ष्म्यै नमःजगत् की लक्ष्मी
- 916.ॐ जगन्मात्रे नमःजगत् की माता
- 917.ॐ विष्णुपत्न्यै नमःविष्णु की पत्नी
- 918.ॐ नवकोटिमहाशक्तिसमुपास्यपदाम्बुजायै नमःनौ करोड़ महाशक्तियों द्वारा उपासित चरण-कमलों वाली
- 919.ॐ कनत्सौवर्णरत्नाढ्यसर्वाभरणभूषितायै नमःचमकते स्वर्ण व रत्नों से जड़े समस्त आभूषणों से भूषित
- 920.ॐ अनन्तानित्यमहिष्यै नमःअनन्त की नित्य महिषी
- 921.ॐ प्रपञ्चेश्वरनायक्यै नमःप्रपंच के ईश्वर की नायिका
- 922.ॐ अत्युच्छ्रितपदान्तस्थायै नमःअत्यंत उन्नत पद के अंत में स्थित
- 923.ॐ परमव्योमनायक्यै नमःपरमव्योम की नायिका
- 924.ॐ नाकपृष्ठगताराध्यायै नमःस्वर्ग-लोक में जाकर आराधित होने वाली
- 925.ॐ विष्णुलोकविलासिन्यै नमःविष्णुलोक में विलास करने वाली
- 926.ॐ वैकुण्ठराजमहिष्यै नमःवैकुण्ठ-राज की महिषी
- 927.ॐ श्रीरङ्गनगराश्रितायै नमःश्रीरंग-नगर में आश्रित
- 928.ॐ रङ्गनायक्यै नमःरंगनायकी
- 929.ॐ भूपुत्र्यै नमःभूमि की पुत्री
- 930.ॐ कृष्णायै नमःकृष्णा
- 931.ॐ वरदवल्लभायै नमःवरदाता की वल्लभा
- 932.ॐ कोटिब्रह्मादिसंसेव्यायै नमःकरोड़ों ब्रह्माओं द्वारा सेवित
- 933.ॐ कोटिरुद्रादिकीर्तितायै नमःकरोड़ों रुद्रों द्वारा कीर्तित
- 934.ॐ मातुलुङ्गमयं खेटं बिभ्रत्यै नमःमातुलुंग (बिजौरा) रूपी खेटक धारण करने वाली
- 935.ॐ सौवर्णचषकं बिभ्रत्यै नमःस्वर्ण का चषक धारण करने वाली
- 936.ॐ पद्मद्वयं दधानायै नमःदो कमल धारण करने वाली
- 937.ॐ पूर्णकुम्भं बिभ्रत्यै नमःपूर्ण कुंभ धारण करने वाली
- 938.ॐ कीरं दधानायै नमःशुक धारण करने वाली
- 939.ॐ वरदाभये दधानायै नमःवरद व अभय मुद्रा धारण करने वाली
- 940.ॐ पाशं बिभ्रत्यै नमःपाश धारण करने वाली
- 941.ॐ अङ्कुशं बिभ्रत्यै नमःअंकुश धारण करने वाली
- 942.ॐ शङ्खं वहन्त्यै नमःशंख धारण करने वाली
- 943.ॐ चक्रं वहन्त्यै नमःचक्र धारण करने वाली
- 944.ॐ शूलं वहन्त्यै नमःशूल धारण करने वाली
- 945.ॐ कृपाणिकां वहन्त्यै नमःकृपाणिका धारण करने वाली
- 946.ॐ धनुर्बाणौ बिभ्रत्यै नमःधनुष व बाण धारण करने वाली
- 947.ॐ अक्षमालां दधानायै नमःअक्षमाला धारण करने वाली
- 948.ॐ चिन्मुद्रां बिभ्रत्यै नमःचिन्मुद्रा धारण करने वाली
- 949.ॐ अष्टादशभुजायै नमःअठारह भुजाओं वाली
- 950.ॐ लक्ष्म्यै नमःलक्ष्मी
- 951.ॐ महाष्टादशपीठगायै नमःअठारह महापीठों में विराजने वाली
- 952.ॐ भूमिनीलादिसंसेव्यायै नमःभूदेवी व नीलादेवी द्वारा सेवित
- 953.ॐ स्वामिचित्तानुवर्तिन्यै नमःस्वामी के चित्त का अनुसरण करने वाली
- 954.ॐ पद्मायै नमःपद्मा
- 955.ॐ पद्मालयायै नमःपद्मालया
- 956.ॐ पद्मिन्यै नमःपद्मिनी
- 957.ॐ पूर्णकुम्भाभिषेचितायै नमःपूर्ण कुंभों से अभिषिक्त
- 958.ॐ इन्दिरायै नमःइंदिरा
- 959.ॐ इन्दिराभाक्ष्यै नमःइंदिरा के समान नेत्रों वाली
- 960.ॐ क्षीरसागरकन्यकायै नमःक्षीरसागर की कन्या
- 961.ॐ भार्गव्यै नमःभार्गवी
- 962.ॐ स्वतन्त्रेच्छायै नमःस्वतंत्र इच्छा वाली
- 963.ॐ वशीकृतजगत्पतये नमःजिन्होंने जगत्पति को वश में कर लिया
- 964.ॐ मङ्गलानांमङ्गलाय नमःमंगलों की भी मंगल
- 965.ॐ देवतानान्देवतायै नमःदेवताओं की भी देवता
- 966.ॐ उत्तमानामुत्तमायै नमःउत्तमों की भी उत्तम
- 967.ॐ श्रेयसे नमःश्रेयस्-स्वरूपा
- 968.ॐ परमामृतायै नमःपरम अमृत-स्वरूपा
- 969.ॐ धनधान्याभिवृद्धये नमःधन-धान्य की अभिवृद्धि
- 970.ॐ सार्वभौमसुखोच्छ्रयायै नमःसार्वभौम सुख की उन्नति
- 971.ॐ आन्दोलिकादिसौभाग्यायै नमःपालकी आदि सौभाग्य देने वाली
- 972.ॐ मत्तेभादिमहोदयायै नमःमत्त गजों आदि का महान वैभव
- 973.ॐ पुत्रपौत्राभिवृद्धये नमःपुत्र-पौत्र की अभिवृद्धि
- 974.ॐ विद्याभोगबलादिकायै नमःविद्या, भोग व बल आदि की स्वरूपा
- 975.ॐ आयुरारोग्यसम्पत्तये नमःआयु, आरोग्य व संपत्ति स्वरूपा
- 976.ॐ अष्टैश्वर्यायै नमःअष्ट-ऐश्वर्य स्वरूपा
- 977.ॐ परमेशविभूतये नमःपरमेश्वर की विभूति
- 978.ॐ सूक्ष्मात्सूक्ष्मतरागतये नमःसूक्ष्म से भी सूक्ष्मतर गति वाली
- 979.ॐ सदयापाङ्गसन्दत्तब्रह्मेन्द्रादिपदस्थितये नमःअपनी दयामयी कटाक्ष-दृष्टि से ब्रह्मा व इंद्र आदि के पद देने वाली
- 980.ॐ अव्याहतमहाभाग्यायै नमःअबाधित महाभाग्य वाली
- 981.ॐ अक्षोभ्यविक्रमायै नमःअक्षोभ्य पराक्रम वाली
- 982.ॐ वेदानाम्समन्वयायै नमःवेदों का समन्वय-स्वरूपा
- 983.ॐ वेदानामविरोधायै नमःवेदों में अविरोध-स्वरूपा
- 984.ॐ निःश्रेयसपदप्राप्तिसाधनायै नमःनिःश्रेयस-पद की प्राप्ति का साधन
- 985.ॐ निःश्रेयसपदप्राप्तिफलायै नमःनिःश्रेयस-पद की प्राप्ति का फल
- 986.ॐ श्रीमन्त्रराजराज्ञ्यै नमःश्री-मंत्रराज की राज्ञी
- 987.ॐ श्रीविद्यायै नमःश्रीविद्या-स्वरूपा
- 988.ॐ क्षेमकारिण्यै नमःक्षेम करने वाली
- 989.ॐ श्रीं बीज जपसन्तुष्टायै नमः"श्रीं" बीज के जप से संतुष्ट होने वाली
- 990.ॐ ऐं ह्रीं श्रीं बीजपालिकायै नमः"ऐं ह्रीं श्रीं" बीजों की पालिका
- 991.ॐ प्रपत्तिमार्गसुलभायै नमःप्रपत्ति-मार्ग से सुलभ
- 992.ॐ विष्णुप्रथमकिङ्कर्यै नमःविष्णु की प्रथम किंकरी
- 993.ॐ क्लीङ्कारार्थसावित्र्यै नमः"क्लीं"-कार के अर्थ-स्वरूप सावित्री
- 994.ॐ सौमङ्गल्याधिदेवतायै नमःसौमंगल्य की अधिदेवता
- 995.ॐ श्रीषोडशाक्षरीविद्यायै नमःश्री-षोडशाक्षरी विद्या स्वरूपा
- 996.ॐ श्रीयन्त्रपुरवासिन्यै नमःश्रीयंत्र-पुर में निवास करने वाली
- 997.ॐ सर्वमङ्गलमाङ्गल्यायै नमःसमस्त मंगलों में भी मंगल
- 998.ॐ शिवायै नमःशिवा
- 999.ॐ सर्वार्थसाधिकायै नमःसमस्त अर्थों को सिद्ध करने वाली
- 1000.ॐ शरण्यायै नमःशरण देने वाली
- 1001.ॐ त्र्यम्बकायै नमःत्र्यम्बका
- 1002.ॐ गौर्यै नमःगौरी
- 1003.ॐ नारायण्यै नमःनारायणी
अर्थ (हिन्दी)
- इस श्रीलक्ष्मी-दिव्य-सहस्रनाम-स्तोत्र-महामंत्र के ऋषि आनन्द, कर्दम, चिक्लीत तथा इन्दिरासुत आदि महात्मा महर्षि हैं; छंद अनुष्टुप् है; शक्ति विष्णुमाया है; परा देवता महालक्ष्मी हैं। श्रीमहालक्ष्मी की कृपा द्वारा समस्त अभीष्ट अर्थों की सिद्धि के लिए इस जप में विनियोग किया जाता है।
- पद्मनाभ (विष्णु) की प्रिया, कमल-सदृश नेत्रों वाली, कमल में निवास करने वाली, कमल-सदृश मुख तथा हाथों वाली उन पद्मा देवी की मैं दिन-रात वंदना करता हूँ। पूर्ण चंद्र के समान मुख वाली, दिव्य रत्नाभूषणों से भूषित, वरद व अभय मुद्रा से युक्त हाथों वाली उन चंद्र-सहोदरी का ध्यान करना चाहिए। जो भगवान की इच्छा-स्वरूपा, सच्चिदानंद-रूपिणी, सर्वज्ञा, सबकी जननी तथा विष्णु के वक्षःस्थल में निवास करने वाली हैं।
- आरंभिक श्लोक: वे नित्यागता, अनन्त-नित्या, नन्दिनी तथा जनों को प्रसन्न करने वाली हैं; वे नित्य प्रकाशमान तथा स्वयं-प्रकाश स्वरूपा हैं। (इसी क्रम में आगे सहस्र नाम आते हैं।)
- अंतिम सात नाम: वे समस्त मंगलों की भी मंगल हैं, कल्याणस्वरूपा हैं, समस्त अर्थों को सिद्ध करने वाली हैं; शरण देने वाली, त्र्यम्बका, गौरी तथा नारायणी — आपको नमस्कार हो। (यही वह प्रसिद्ध श्लोक है जो दुर्गा सप्तशती में भी आता है; इस सहस्रनाम के अंतिम सात नाम इसी से बनते हैं।)
- फलश्रुति (महालक्ष्मी के वचन): जो मनुष्य मेरे इन एक हज़ार आठ नामों का प्रमादवश भी एक बार कीर्तन कर ले, उसके कुल में मैं चंद्र-तारा रहने तक सचमुच निवास करती हूँ। जो लोक में मेरे नामों की स्तुति करते हैं, उनके लिए कुछ भी दुर्लभ नहीं; मेरी कृपा से सब अपने-अपने अभीष्ट अर्थ प्राप्त करेंगे। इसलिए यह रहस्य गोपनीय है और प्रयत्नपूर्वक जपने योग्य है — अष्टमी, चतुर्दशी, नवमी, भृगुवार (शुक्रवार), पूर्णिमा, अमावस्या तथा विशेषतः पर्वकाल में; अथवा नित्य कार्यों में भी जप करने से मनुष्य समस्त कामनाएँ प्राप्त करता है।
लाभ
- स्तोत्र की भूमिका में इसे स्पष्ट रूप से "दारिद्र्यध्वंसिनी विद्या" कहा गया है — बारह योगियों के इसी प्रश्न के उत्तर में सनत्कुमार ने यह सहस्रनाम कहा था।
- फलश्रुति में महालक्ष्मी स्वयं कहती हैं कि जो प्रमादवश भी एक बार इन नामों का कीर्तन कर ले, उसके कुल में वे चंद्र-तारा रहने तक निवास करती हैं।
- फलश्रुति अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी, शुक्रवार, पूर्णिमा तथा अमावस्या — विशेष तिथियों पर जप का विधान बताती है।
- सूची में लक्ष्मी को महाकाली, दुर्गा, सरस्वती व पार्वती भी कहा गया है, इसलिए यह पाठ केवल धन-कामना का नहीं, समग्र देवी-उपासना का है।
- नाम 851–858 में सांकर्य-दोष, ग्रह-उपद्रव, विष-रोग, गृह-दोष तथा कलि-दोष — पाँच ठोस बाधाओं का शमन कहा गया है; परंपरा में यही इसके व्यावहारिक प्रयोग का आधार है।
कब करें पाठ
पाठ विधि
यह दीर्घ पाठ है — सम्पूर्ण में 35–45 मिनट लगते हैं, इसलिए बिना जल्दबाज़ी के समय निकालकर बैठें। स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और माँ लक्ष्मी के समक्ष घी का दीप जलाएँ। पहले विनियोग पढ़ें, फिर ध्यान के तीनों श्लोक; इसके बाद नामों का पाठ आरंभ करें और अंत में फलश्रुति पढ़ें। नामावली-रूप में पाठ करना हो तो प्रत्येक नाम "ॐ … नमः" के साथ पढ़ते हुए कमल-पुष्प, गुलाब अथवा अक्षत अर्पित करें — यही अर्चना-विधि है। यदि एक बैठक में सम्पूर्ण पाठ कठिन हो, तो परंपरा में इसे खंडों में विभाजित कर सप्ताह भर में पूर्ण करने की छूट है; किंतु विनियोग, ध्यान और फलश्रुति हर बैठक में पढ़े जाते हैं। फलश्रुति स्वयं शुक्रवार तथा विशेष तिथियों पर जप का विधान बताती है।
प्रामाणिकता व स्रोत
संपादकीय टिप्पणी: संख्या 1003 है, 1000 अथवा 1008 नहीं — और यह विरोधाभास नहीं है. स्तोत्र की अपनी फलश्रुति में महालक्ष्मी इसे "नाम्नां साष्टसहस्रम्" (एक हज़ार आठ नाम) कहती हैं; सहस्रनामों में समासों का विभाजन संस्करण-दर-संस्करण बदलता है, इसीलिए यही पाठ आधार-स्रोत पर 1003 और दूसरे स्रोत पर 1037 नामों में बँटा मिलता है — नाम वही हैं, विभाजन अलग। दोनों स्रोत एक ही परंपरा के हैं: दोनों "नित्यागता" से आरंभ होते हैं और "नारायणी" पर समाप्त। यह लक्ष्मी अष्टोत्तर शतनामावली से भिन्न रचना है — वह 108 नामों की अलग सूची है जो "प्रकृति" से आरंभ होती है।
देव परिचय
माँ लक्ष्मी
Goddess Lakshmi
माँ लक्ष्मी धन, समृद्धि और सौभाग्य की अधिष्ठात्री देवी हैं — भगवान विष्णु की शक्ति।
