श्री विष्णु अष्टोत्तर शतनामावली

śrī viṣṇu aṣṭottara śatanāmāvalī

Shri Vishnu Ashtottara Shatanamavali (108 Names)

समय
8–10 मिनट
कुल नाम
108
कठिनाई
सरल (Beginner)
शुभ दिन
गुरुवार; एकादशी
उद्देश्य:रक्षा (Protection)समृद्धि (Prosperity)मोक्ष (Liberation)
✓ संपूर्ण

श्री विष्णु अष्टोत्तर शतनामावली भगवान विष्णु के 108 नामों की सूची है, जो विष्णु से आरंभ होकर प्रह्लादपरिपालक पर समाप्त होती है। हर नाम "ॐ … नमः" रूप में पढ़ा जाता है, इसलिए यह अर्चना तथा माला-जप दोनों के लिए उपयुक्त है। पाठ में 8–10 मिनट लगते हैं।

परिचय

भगवान विष्णु त्रिदेवों में सृष्टि के पालनकर्ता हैं — धर्म की रक्षा हेतु अवतार लेने वाले जगदीश।

स्रोत: पारंपरिक अष्टोत्तर शतनामावली — विष्णु से आरंभ, प्रह्लादपरिपालक पर समाप्त

एक नज़र में

मंत्र / पाठश्री विष्णु अष्टोत्तर शतनामावली
IASTśrī viṣṇu aṣṭottara śatanāmāvalī
देवताश्री विष्णु
मूल स्रोतपारंपरिक अष्टोत्तर शतनामावली — विष्णु से आरंभ, प्रह्लादपरिपालक पर समाप्त
शुभ दिनगुरुवार; एकादशी
पाठ समय8–10 मिनट
कठिनाईसरल (Beginner)

उद्भव / पृष्ठभूमि

श्री विष्णु अष्टोत्तर शतनामावली भगवान विष्णु के 108 नामों की सूची है। नामावली-रूप में हर नाम "ॐ … नमः" के साथ पढ़ा जाता है, इसलिए यह अर्चना — प्रत्येक नाम पर एक तुलसी-दल अर्पित करना — तथा माला-जप, दोनों के लिए उपयुक्त है।

सबसे पहले एक बात जो प्रायः कोई नहीं बताता: "विष्णु के 108 नाम" शीर्षक से कई अलग सूचियाँ प्रचलित हैं, और उनके नाम आपस में मिलते नहीं। एक पद्मपुराण वर्णित है, एक "नमाम्यहं हृषीकेशम्" से आरंभ होती है, एक बिलकुल भिन्न स्तोत्र "विष्णुर्जिष्णुर्वषट्कारो देवदेवो वृषाकपिः" से आरंभ होता है, और विष्णु के 100 नामों की भी एक अलग सूची है। यहाँ वह ली गई है जो सर्वाधिक प्रचलित है।

इस सूची की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह अवतार-सूची है, गुण-सूची नहीं। नाम 45 से 60 तक लगभग बिना रुके अवतार आते हैं — मत्स्य, कूर्म, क्रोड (वराह), नृकेसरी (नरसिंह), वामन, भार्गव (परशुराम), राम, बलि (बलराम), कल्कि, हयानन (हयग्रीव), शिशुमार, कपिल, ध्रुव, दत्तात्रेय। यानी केवल दश अवतार नहीं; हयग्रीव, शिशुमार, कपिल, ध्रुव, दत्तात्रेय, हंस, मोहिनी, ऋषभ — भागवत की चौबीस-अवतार परंपरा के नाम भी इसमें हैं। नाम 100 पर बुद्धावतार भी है।

चार नाम एक और परंपरा से आते हैं, और वे साथ-साथ नहीं रखे गए हैं — वासुदेव (8), सङ्कर्षण (74), प्रद्युम्न (67) तथा अनिरुद्ध (78)। ये पांचरात्र आगम के चतुर्व्यूह हैं। सूची उन्हें बिखेरकर रखती है, जिससे पाठक को यह पता ही नहीं चलता कि वह एक पूरा दार्शनिक ढाँचा पढ़ रहा है।

एक नाम सामान्यतः चौंकाता है — नाम 88 शङ्करप्रिय, अर्थात शंकर को प्रिय। एक वैष्णव सूची में शिव का उल्लेख उसी हरि-हर अभेद परंपरा का संकेत है जो शिव-नामावली में "विष्णुवल्लभ" के रूप में मिलती है; दोनों सूचियाँ एक-दूसरे की ओर हाथ बढ़ाती हैं।

और अंतिम नाम ध्यान देने योग्य है। 107 नामों में सृष्टि, अवतार, आयुध, व्यूह — सब कह चुकने के बाद 108वाँ नाम कोई बड़ा तत्त्व नहीं, एक भक्त का नाम है: प्रह्लादपरिपालक, अर्थात प्रह्लाद का पालन करने वाले। सूची ब्रह्म से आरंभ होकर भक्त-रक्षा पर आकर ठहरती है।

नाम सूची (Name List)

लिपि:

मूल स्वरूप व वैकुण्ठ (नाम 1–27)

  1. 1.
    ॐ विष्णवे नमःसर्वत्र व्याप्त
  2. 2.
    ॐ लक्ष्मीपतये नमःमाँ लक्ष्मी के पति
  3. 3.
    ॐ कृष्णाय नमःकृष्ण-स्वरूप
  4. 4.
    ॐ वैकुण्ठाय नमःवैकुण्ठ के अधिपति
  5. 5.
    ॐ गरुडध्वजाय नमःजिनकी ध्वजा पर गरुड़ का चिह्न है
  6. 6.
    ॐ परब्रह्मणे नमःपरब्रह्म-स्वरूप
  7. 7.
    ॐ जगन्नाथाय नमःजगत् के नाथ
  8. 8.
    ॐ वासुदेवाय नमःवसुदेव-पुत्र; सर्वत्र वास करने वाले
  9. 9.
    ॐ त्रिविक्रमाय नमःतीन पगों से त्रिलोक नाप लेने वाले
  10. 10.
    ॐ दैत्यान्तकाय नमःदैत्यों का अंत करने वाले
  11. 11.
    ॐ मधुरिपवे नमःमधु दैत्य के शत्रु
  12. 12.
    ॐ तार्क्ष्यवाहनाय नमःतार्क्ष्य अर्थात गरुड़ जिनका वाहन है
  13. 13.
    ॐ सनातनाय नमःसनातन, नित्य
  14. 14.
    ॐ नारायणाय नमःजल में निवास करने वाले; सबके आश्रय
  15. 15.
    ॐ पद्मनाभाय नमःजिनकी नाभि से कमल उत्पन्न हुआ
  16. 16.
    ॐ हृषीकेशाय नमःहृषीकेश; इंद्रियों के स्वामी
  17. 17.
    ॐ सुधाप्रदाय नमःअमृत प्रदान करने वाले
  18. 18.
    ॐ माधवाय नमःमाधव; लक्ष्मी के पति
  19. 19.
    ॐ पुण्डरीकाक्षाय नमःकमल-सदृश नेत्रों वाले
  20. 20.
    ॐ स्थितिकर्त्रे नमःजगत् की स्थिति अर्थात पालन करने वाले
  21. 21.
    ॐ परात्पराय नमःपर से भी पर
  22. 22.
    ॐ वनमालिने नमःवनमाला धारण करने वाले
  23. 23.
    ॐ यज्ञरूपाय नमःयज्ञ-स्वरूप
  24. 24.
    ॐ चक्रपाणये नमःजिनके हाथ में सुदर्शन चक्र है
  25. 25.
    ॐ गदाधराय नमःगदा धारण करने वाले
  26. 26.
    ॐ उपेन्द्राय नमःउपेन्द्र; इंद्र के अनुज वामन-रूप
  27. 27.
    ॐ केशवाय नमःसुंदर केशों वाले; केशी-दैत्य के संहारक

आयुध, लीला व समुद्र-मंथन (नाम 28–54)

  1. 28.
    ॐ हंसाय नमःहंस-अवतार स्वरूप
  2. 29.
    ॐ समुद्रमथनाय नमःसमुद्र-मंथन करने वाले
  3. 30.
    ॐ हरये नमःहरि; पापों का हरण करने वाले
  4. 31.
    ॐ गोविन्दाय नमःगौओं तथा पृथ्वी के पालक
  5. 32.
    ॐ ब्रह्मजनकाय नमःब्रह्मा के जनक
  6. 33.
    ॐ कैटभासुरमर्दनाय नमःकैटभ दैत्य का मर्दन करने वाले
  7. 34.
    ॐ श्रीधराय नमःश्री अर्थात लक्ष्मी को वक्ष पर धारण करने वाले
  8. 35.
    ॐ कामजनकाय नमःकामदेव के जनक
  9. 36.
    ॐ शेषशायिने नमःशेषनाग पर शयन करने वाले
  10. 37.
    ॐ चतुर्भुजाय नमःचार भुजाओं वाले
  11. 38.
    ॐ पाञ्चजन्यधराय नमःपांचजन्य शंख धारण करने वाले
  12. 39.
    ॐ श्रीमते नमःश्री से युक्त
  13. 40.
    ॐ शार्ङ्गपाणये नमःशार्ङ्ग धनुष धारण करने वाले
  14. 41.
    ॐ जनार्दनाय नमःजनों के कष्ट दूर करने वाले
  15. 42.
    ॐ पीतांबरधराय नमःपीत वस्त्र धारण करने वाले
  16. 43.
    ॐ देवाय नमःदेव-स्वरूप
  17. 44.
    ॐ सूर्यचन्द्रविलोचनाय नमःसूर्य व चंद्र जिनके नेत्र हैं
  18. 45.
    ॐ मत्स्यरूपाय नमःमत्स्य-अवतार स्वरूप
  19. 46.
    ॐ कूर्मतनवे नमःकूर्म-रूप धारण करने वाले
  20. 47.
    ॐ क्रोडरूपाय नमःक्रोड अर्थात वराह-रूप वाले
  21. 48.
    ॐ नृकेसरिणे नमःनृकेसरी; नरसिंह-रूप वाले
  22. 49.
    ॐ वामनाय नमःवामन-अवतार स्वरूप
  23. 50.
    ॐ भार्गवाय नमःभृगुवंशी परशुराम-स्वरूप
  24. 51.
    ॐ रामाय नमःश्रीराम-स्वरूप
  25. 52.
    ॐ बलिने नमःबलराम-स्वरूप; बलवान
  26. 53.
    ॐ कल्किने नमःकल्कि-अवतार स्वरूप
  27. 54.
    ॐ हयाननाय नमःहयग्रीव-रूप; अश्व-मुख वाले

दशावतार तथा व्यूह-स्वरूप (नाम 55–81)

  1. 55.
    ॐ विश्वंभराय नमःविश्व का भरण-पोषण करने वाले
  2. 56.
    ॐ शिशुमाराय नमःशिशुमार अर्थात ज्योतिष-चक्र स्वरूप
  3. 57.
    ॐ श्रीकराय नमःश्री प्रदान करने वाले
  4. 58.
    ॐ कपिलाय नमःकपिल मुनि-स्वरूप
  5. 59.
    ॐ ध्रुवाय नमःध्रुव-स्वरूप; अचल
  6. 60.
    ॐ दत्तात्रेयाय नमःदत्तात्रेय-स्वरूप
  7. 61.
    ॐ अच्युताय नमःअच्युत; जो कभी अपने स्वरूप से च्युत नहीं होते
  8. 62.
    ॐ अनन्ताय नमःजिनका कोई अंत नहीं
  9. 63.
    ॐ मुकुन्दाय नमःमुक्ति देने वाले
  10. 64.
    ॐ दधिवामनाय नमःदधि-वामन स्वरूप
  11. 65.
    ॐ धन्वन्तरये नमःधन्वन्तरि-स्वरूप; आयुर्वेद के देव
  12. 66.
    ॐ श्रीनिवासाय नमःजिनमें श्री का नित्य निवास है
  13. 67.
    ॐ प्रद्युम्नाय नमःप्रद्युम्न-व्यूह स्वरूप
  14. 68.
    ॐ पुरुषोत्तमाय नमःपुरुषों में उत्तम
  15. 69.
    ॐ श्रीवत्सकौस्तुभधराय नमःश्रीवत्स चिह्न तथा कौस्तुभ मणि धारण करने वाले
  16. 70.
    ॐ मुरारातये नमःमुर दैत्य के शत्रु
  17. 71.
    ॐ अधोक्षजाय नमःअधोक्षज; इंद्रियों की पहुँच से परे
  18. 72.
    ॐ ऋषभाय नमःतीन धामों वाले
  19. 73.
    ॐ मोहिनीरूपधारिणे नमःमोहिनी रूप धारण करने वाले
  20. 74.
    ॐ सङ्कर्षणाय नमःसंकर्षण-व्यूह स्वरूप
  21. 75.
    ॐ प्रभवे नमःसमर्थ प्रभु
  22. 76.
    ॐ क्षीराब्धिशायिने नमःक्षीरसागर में शयन करने वाले
  23. 77.
    ॐ भूतात्मने नमःसमस्त भूतों की आत्मा
  24. 78.
    ॐ अनिरुद्धाय नमःअनिरुद्ध; जिन्हें कोई रोक न सके
  25. 79.
    ॐ भक्तवत्सलाय नमःभक्तों पर वात्सल्य रखने वाले
  26. 80.
    ॐ नराय नमःनर-स्वरूप (नर-नारायण युगल में)
  27. 81.
    ॐ गजेन्द्रवरदाय नमःगजेन्द्र को वर देने वाले

व्यापकता व भक्त-रक्षा पर समापन (नाम 82–108)

  1. 82.
    ॐ त्रिधाम्ने नमःतीन धामों में स्थित
  2. 83.
    ॐ भूतभावनाय नमःसमस्त भूतों की उत्पत्ति करने वाले
  3. 84.
    ॐ श्वेतद्वीपषुवास्तव्याय नमःश्वेतद्वीप में निवास करने वाले
  4. 85.
    ॐ सूर्यमण्डलमध्यगाय नमःसूर्य-मंडल के मध्य में स्थित
  5. 86.
    ॐ सनकादिमुनिध्येयाय नमःसनक आदि मुनियों द्वारा ध्यान किए जाने वाले
  6. 87.
    ॐ भगवते नमःषड्ऐश्वर्य-संपन्न भगवान्
  7. 88.
    ॐ शङ्करप्रियाय नमःशंकर को प्रिय
  8. 89.
    ॐ नीलकान्ताय नमःनील कांति वाले
  9. 90.
    ॐ धराकान्ताय नमःधरा अर्थात पृथ्वी के पति
  10. 91.
    ॐ वेदात्मने नमःवेद-स्वरूप
  11. 92.
    ॐ बादरायणाय नमःबादरायण अर्थात वेदव्यास-स्वरूप
  12. 93.
    ॐ भागीरथीजन्मभूमिपादपद्माय नमःजिनके चरण-कमल से भागीरथी गंगा की उत्पत्ति हुई
  13. 94.
    ॐ सतां प्रभवे नमःसत्पुरुषों के प्रभु
  14. 95.
    ॐ स्वभुवे नमःस्वयंभू; स्वयं से उत्पन्न
  15. 96.
    ॐ विभवे नमःविभु; सर्वव्यापी
  16. 97.
    ॐ घनश्यामाय नमःमेघ के समान श्यामवर्ण
  17. 98.
    ॐ जगत्कारणाय नमःजगत् के कारण
  18. 99.
    ॐ अव्ययाय नमःअव्यय; जिनका कभी क्षय नहीं होता
  19. 100.
    ॐ बुद्धावताराय नमःबुद्ध-अवतार स्वरूप
  20. 101.
    ॐ शान्तात्मने नमःशांत अंतःकरण वाले
  21. 102.
    ॐ लीलामानुषविग्रहाय नमःलीला हेतु मनुष्य-रूप धारण करने वाले
  22. 103.
    ॐ दामोदराय नमःजिनके उदर पर रस्सी का बंधन पड़ा
  23. 104.
    ॐ विराड्रूपाय नमःविराट रूप धारण करने वाले
  24. 105.
    ॐ भूतभव्यभवत्प्रभवे नमःभूत, वर्तमान व भविष्य — तीनों के प्रभु
  25. 106.
    ॐ आदिदेवाय नमःआदिदेव
  26. 107.
    ॐ देवदेवाय नमःदेवों के भी देव
  27. 108.
    ॐ प्रह्लादपरिपालकाय नमःप्रह्लाद का परिपालन करने वाले

अर्थ (हिन्दी)

    लाभ

    • परंपरा में गुरुवार तथा एकादशी को विष्णु-पूजन के साथ इन 108 नामों की अर्चना की जाती है — प्रत्येक नाम पर एक तुलसी-दल अर्पित करने का विधान है।
    • सूची में लगभग सोलह अवतार-नाम क्रमशः आते हैं, इसलिए पाठ के साथ विष्णु के अवतार-चरित का स्मरण भी हो जाता है।
    • नाम 108 "प्रह्लादपरिपालक" के भाव से यह नामावली भक्त-रक्षा तथा भय-निवारण के संकल्प से भी पढ़ी जाती है।
    • विष्णु सहस्रनाम की तुलना में यह बहुत छोटी है (8–10 मिनट), अतः नित्य पूजन व सत्यनारायण जैसे व्रतों में सुविधाजनक रहती है।

    कब करें पाठ

    गुरुवार को विष्णु पूजन के समयएकादशी व्रत मेंसत्यनारायण पूजा तथा अन्य वैष्णव अनुष्ठानों मेंतुलसी-अर्चना के समय

    पाठ विधि

    आरंभ में "ॐ नमो नारायणाय" तीन बार कहें। नामावली-पाठ की परंपरागत विधि अर्चना है — प्रत्येक नाम "ॐ … नमः" के साथ पढ़ते हुए एक तुलसी-दल अथवा पुष्प अर्पित करते जाना। यदि यह संभव न हो तो तुलसी की माला लेकर जप भी किया जा सकता है; 108 नाम पूरे होने पर ठीक एक माला पूर्ण होती है। पाठ लगभग 8–10 मिनट में पूर्ण होता है। परंपरा में 108 नामों के बाद समापन-नमस्कार के रूप में "ॐ श्रीमहाविष्णवे नमः" कहा जाता है — वह सूची का 109वाँ नाम नहीं, अंत का प्रणाम है। इसके पश्चात विष्णु चालीसा अथवा विष्ण्वष्टकम् पढ़कर आरती करने की परंपरा है।

    प्रामाणिकता व स्रोत

    स्थिति✓ संपूर्ण
    मूल ग्रंथपारंपरिक विष्णु अष्टोत्तर शतनामावली — मूल ग्रंथ-संदर्भ अनिश्चित
    स्रोत परंपराdrikpanchang.com — भगवान विष्णु की अष्टोत्तर शतनामावली (आधार सूची; 108 नाम) · brahmabhakti.com — विष्णु अष्टोत्तर शतनामावली; क्रम सहित स्वतंत्र पुष्टि (94% अक्षरशः समान; शेष अनुस्वार/संयुक्ताक्षर के मुद्रण-भेद) · मुद्रण-दोष सुधारे गए (आधार drikpanchang): नाम 60 "दत्तत्रेयाय" → दत्तात्रेयाय। तुलना-स्रोत में नाम 85 "सूर्यमण्डलमध्यगाय" छूटा हुआ मिला। · पाठ-भेद दर्ज (चुना नहीं गया): नाम 75 — "प्रभवे" (आधार) बनाम "पृथवे" (पृथु-अवतार); निर्णायक प्रमाण न मिलने से आधार-पाठ रखा गया। · drikpanchang.com — विष्णु की अन्य तीन सूचियाँ (पद्मपुराण वर्णित; "नमाम्यहं हृषीकेशम्" वाली; 100 नामों की) तथा stotranidhi.com — श्री विष्णोरष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम् ("विष्णुर्जिष्णुर्वषट्कारो…") — भेद दर्ज करने हेतु देखी गईं। · ⚠️ मूल ग्रंथ व अध्याय-क्रमांक किसी उपलब्ध स्रोत में नहीं मिला, अतः कोई ग्रंथ-नाम नहीं दिया गया। · हिंदी अर्थ सत्यापित संस्कृत से अनूदित।
    रचयितापारंपरिक
    अंतिम अद्यतनजून 2026

    संपादकीय टिप्पणी: "विष्णु के 108 नाम" शीर्षक से कई भिन्न सूचियाँ प्रचलित हैं और उनके नाम आपस में मिलते नहीं — अकेले एक ही संग्रह पर चार अलग पृष्ठ हैं (यह वाली, पद्मपुराण वर्णित, "नमाम्यहं हृषीकेशम्" वाली, तथा 100 नामों की एक अलग सूची), और एक पूर्णतः भिन्न स्तोत्र-रूप भी है जो "विष्णुर्जिष्णुर्वषट्कारो" से आरंभ होता है। यहाँ सर्वाधिक प्रचलित सूची दी गई है। मूल ग्रंथ अनिश्चित है — किसी स्रोत ने पुराण व अध्याय-क्रमांक नहीं दिया, इसलिए यहाँ कोई ग्रंथ-नाम नहीं गढ़ा गया। साथ ही ध्यान दें कि आधार-स्रोत पर 108 नामों के बाद "ॐ श्रीमहाविष्णवे नमः" छपा है — वह समापन-नमस्कार है, सूची का 109वाँ नाम नहीं।

    देव परिचय

    श्री विष्णु

    Lord Vishnu

    भगवान विष्णु त्रिदेवों में सृष्टि के पालनकर्ता हैं — धर्म की रक्षा हेतु अवतार लेने वाले जगदीश।

    देवता वर्गपालन · रक्षा · धर्म-संस्थापना
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