उपजाति, कुल-पुरोहित और कुलदेवता
Gazetteer हर वाणिया उपजाति के साथ उसका नाम-स्रोत, कुल-पुरोहित (family-priests) और कुलदेवता (family-deity) लिखता है। नीचे वे उपजातियाँ हैं जिनके कुलदेवता दर्ज हैं:
| उपजाति | नाम / मूल (अभिलेख) | कुल-पुरोहित | कुलदेवी / कुलदेवता | संप्रदाय | पृष्ठ |
|---|---|---|---|---|---|
| कपोल | मूल जूनागढ़ (गिरनार) | कंडोलिया ब्राह्मण | सामुद्री माता — मुख्य स्थान सुंदरी (ध्रांगध्रा) | वल्लभाचार्य वैष्णव | 71 |
| खडायता | खडात (प्रांतिज के पास) | खडायता ब्राह्मण | खडात-महुडी (विजापुर के पास) के कोट्यर्केश्वर | वल्लभाचार्य वैष्णव | 72 |
| लाड | लाट-देश (दक्षिण गुजरात का पुराना नाम) | खेडावाल ब्राह्मण | आशनाई (पेटलाद के पास) की आशापुरी | वल्लभाचार्य वैष्णव | 72 |
| मोढ़ | मोढेरा | मोढ़ ब्राह्मण | कुलदेवता का स्थान मोढेरा | वल्लभाचार्य वैष्णव | 72 |
| नांदोरा | नांदोद (राजपीपला) | नांदोरा ब्राह्मण | नांदोद के नंदिकेश्वर महादेव | वल्लभाचार्य वैष्णव | 72–73 |
| नागर | वडनगर | नागर ब्राह्मण | वडनगर के हाटकेश्वर | वल्लभाचार्य वैष्णव; बाम नागर अधिकतर शैव | 73 |
| नीमा | लगभग 200 वर्ष पहले मारवाड़ से | उदम्बरा ब्राह्मण | ईडर के पास शामळाजी | वीसा: वैष्णव और जैन; दसा: वल्लभाचार्य | 73 |
| पोरवाड | श्रीमाल का उपनगर पोरवाड | श्रीमाली ब्राह्मण | श्रीमाल की श्री या महालक्ष्मी | अंशतः वैष्णव, अंशतः जैन | 73 |
| श्रीमाली | श्रीमाल (अब भीनमाल, मारवाड़) | श्रीमाली ब्राह्मण | कुलदेवी: श्रीमाल की वाघेश्वरी | वीसा श्रीमाली केवल जैन | 73 |
| सोरठिया | सोरठ (काठियावाड़ का दक्षिणी तट) | कंडोलिया ब्राह्मण | सामुद्री — मुख्य स्थान सुंदरी (ध्रांगध्रा) | वल्लभाचार्य वैष्णव | 74 |
| ओसवाल | सब श्रावक (जैन) | अधिकतर औदीच्य ब्राह्मण | सभी ओसवालों की कुलदेवी: मारवाड़ की ओसिया | जैन | 97 |
| श्रीमाली श्रावक | जैन श्रीमाली | श्रीमाली ब्राह्मण | दसा और लाडवा: महालक्ष्मी; वीसा: महालक्ष्मी और सचाई (Sachai) | जैन | 98 |
जिनके केवल कुल-पुरोहित दर्ज हैं
इन उपजातियों के लिए Gazetteer कुल-पुरोहित तो लिखता है, पर कुलदेवता नहीं। इसलिए यहाँ कोई कुलदेवता नहीं दिया गया:
| उपजाति | नाम / मूल (अभिलेख) | कुल-पुरोहित | पृष्ठ |
|---|---|---|---|
| अग्रवाल | उज्जैन से लगभग चालीस मील उत्तर-पूर्व का अगर नगर; राजपूताना से आए; जनेऊ पहनते हैं | अग्रवाल ब्राह्मण | 70 |
| चित्रोडा | राजपूताना का चित्रोड | चित्रोडा ब्राह्मण | 70 |
| देसावाल | डीसा; विवाह में आठ फेरे | देसावाल ब्राह्मण | 70–71 |
| दीडू | लगभग 300 वर्ष पहले मारवाड़ से सूरत आए | श्रीमाली ब्राह्मण | 71 |
| गुज्जर | — | श्रीमाली ब्राह्मण | 71 |
| हरसोला | हरसोल (अहमदाबाद से लगभग तीस मील उत्तर-पश्चिम) | हरसोला ब्राह्मण | 71 |
| झारोला (झालोरा) | मारवाड़ का झालोर | झालोरा ब्राह्मण | 71 |
| मेवाडा | मेवाड़ से आए | मेवाडा ब्राह्मण | 72 |
| नरसिंहपुरा | पालनपुर का नरसिंहपुर | गुजरात के विभिन्न ब्राह्मण | 73 |
| रायकवाल | धंधुका के पास रायका | रायकवाल ब्राह्मण | 73 |
| उम्मड | लगभग दो सौ वर्ष पहले मारवाड़ से | औदीच्य और अन्य गुजराती ब्राह्मण | 74 |
| वायडा | पाटण के पास वायड | वायडा ब्राह्मण | 74 |
वीसा, दसा और पांचा
- अधिकतर वाणिया जातियाँ वीसा ("बीस") और दसा ("दस") में बँटी हैं। Gazetteer का अनुमान है कि वीसा संख्या में अधिक थे, इसलिए यह नाम पड़ा; कुछ में "पांचा" नाम का और छोटा भाग भी है (p. 70)।
- मुख्य उपजातियाँ और उनके वीसा-दसा भाग प्रायः साथ भोजन करते हैं, पर आपस में विवाह नहीं करते; कई जगह यह रोक स्थानीय भागों तक जाती है — जैसे अहमदाबाद और सूरत के घोघवा मोढ़ आपस में विवाह नहीं करते (p. 70)।
- 1901 में गुजरात के वाणियों में 38.9% मेश्री (वैष्णव) और 61.1% श्रावक (जैन) थे; अग्रवाल और बाम नागर वाणियों को छोड़कर कोई वाणिया जनेऊ नहीं पहनता था (p. 70)।
- सभी मेश्री (गैर-जैन) वाणिया वल्लभाचार्य के पुष्टिमार्ग के अनुयायी दर्ज हैं (p. xxxvi)।
घर में कुलदेवी — "गोत्रज"
Gazetteer वाणियों के गर्भ-संस्कार में लिखता है कि पाँचवें महीने के गोद-भराई (lap-filling) संस्कार में गर्भवती स्त्री घर के देवता या "गोत्रज" के सामने आकर प्रणाम करती है, फिर उसकी गोद भरी जाती है (p. 93)। गुजरात में कुलदेवी के लिए यही "गोत्रज" शब्द चलता है — पर यह हर घर की अपनी कुलदेवी है, किसी गोत्र की तय सूची नहीं।
लाड वाणियों के बारे में एक और तथ्य: उनके पुराने उपनाम खाटा, खीचड़िया, पटारी और रोकड़िया थे, और पुराने नाम "दास" की जगह "राय" और "पाल" पर ख़त्म होते थे — जैसे कलानराय और धनपाल (p. 72)।
यह 1901 के Gujarat Gazetteer का ऐतिहासिक अभिलेख है — उस समय और क्षेत्र की स्थिति, आज की नहीं। हर परिवार की परंपरा इससे अलग हो सकती है।
