16 गोत्र (p. 30)
ग्रंथ की टिप्पणी: कुछ लोग काश्यप (Kâsyap) को कश्यप (Kasyap) से अलग गोत्र मानते हैं — "काश्यप कश्यप के पुत्र थे" (p. 30)। Sherring यह भी लिखते हैं कि दूसरी श्रेणी के तेरह गोत्रों की सूची कुछ-कुछ बदलती रहती है, पर अधिकतर नाम हर सूची में मिलते हैं।
| श्रेणी | गोत्र |
|---|---|
| पहली (कुलीन) | गर्ग, गौतम, शांडिल |
| दूसरी | भारद्वाज, वसिष्ठ, वत्स, कश्यप (Kasyap), काश्यप (Kâsyap), कौशिक, चान्द्रायण (Chandrâyan), सावर्ण्य (Sâvaranya), पराशर, पुलस्त्य (Pulasta), भृगु (Vrigu), अत्रि, अंगिरा |
गोत्र, उपाधि और कुल (pp. 30–31)
Sherring हर गोत्र के सब कुल नहीं देते — "कुछ गोत्रों के एक या अधिक" कुल ही देते हैं। कुल के नाम ग्रंथ की वर्तनी में हैं:
| गोत्र | उपाधि | कुल |
|---|---|---|
| गर्ग | पांडे | Itiya |
| गौतम | दुबे | Kanchaniya |
| शांडिल | पांडे | Triphala |
| शांडिल | तिवारी | Pindi |
| भारद्वाज | दुबे | Brihadgram |
| वत्स | मिश्र | Paiyasi |
| वत्स | दुबे | Samadari |
| कश्यप (Kasyap) | मिश्र | Rarhi |
| काश्यप (Kâsyap) | पांडे | Mala |
| कौशिक | मिश्र | Dharmpura |
| चान्द्रायण | पांडे | Chapala |
| सावर्ण्य | पांडे | Itari, Jurwa |
| पराशर | पांडे | Lohandi, Bampura, Biroura, Silasam Dhamouli |
जिन कुलों का गोत्र ग्रंथ में नहीं
Sherring इसके बाद और कुलों की एक लंबी सूची देते हैं — पांडे, शुक्ल, चौबे, तिवारी आदि उपाधियों के साथ — पर लिखते हैं कि उनके गोत्र उन्हें ज्ञात नहीं (pp. 31–32)। इसलिए हमने इन्हें किसी गोत्र से नहीं जोड़ा।
नाम के बारे में: Sherring के अनुसार "सरवरिया" शब्द "सरजूपारिया" (सरयू-पार वाले) का बिगड़ा रूप है (p. 29)।
यह 1872 का ऐतिहासिक अभिलेख है — लेखक ने बनारस में मिली जानकारी दर्ज की, और स्वयं कहते हैं कि सूचियाँ पूरी नहीं। उपाधि (title) गोत्र नहीं: एक उपाधि कई गोत्रों में मिलती है। अपना गोत्र परिवार और कुल-पुरोहित से पक्का करें।
