कान्यकुब्ज (कनौजिया) ब्राह्मण — गोत्र और उपाधियाँ, जिझौतिया और सनाढ्य सहित

Sherring (1872) में कनौजिया ब्राह्मणों के "खटकुल" — गौतम, शांडिल, भारद्वाज, उपमान, कश्यप, काश्तिप, गर्ग — और हर गोत्र की उपाधियाँ: अवस्थी, मिश्र, दीक्षित, शुक्ल, त्रिवेदी, पांडे, पाठक, दुबे, तिवारी, बाजपेयी, चौबे। जिझौतिया और सनाढ्य ब्राह्मणों की गोत्र-उपाधि तालिका भी।

संक्षेप में

Sherring (1872) के अनुसार कनौजिया ब्राह्मणों के "खटकुल" यानी छह गोत्र हैं, जो व्यवहार में सात गिने जाते हैं: गौतम, शांडिल, भारद्वाज, उपमान, कश्यप, काश्तिप और गर्ग। हर गोत्र में उपाधियों वाले कुल हैं — जैसे गौतम में अवस्थी, शांडिल में मिश्र और दीक्षित, भारद्वाज में शुक्ल, त्रिवेदी और पांडे। एक ही उपाधि कई गोत्रों में भी मिलती है।

कनौजिया ब्राह्मणों के गोत्र और उपाधियाँ

Sherring लिखते हैं कि हर गोत्र अपने-आप में एक वर्ग है, जिसमें एक या अधिक कुल हैं, और उन कुलों की पहचान "मिश्र", "शुक्ल" जैसी सम्मान-सूचक उपाधियों से होती है (p. 24)। हर उपाधि के नीचे वे कुल-शाखाओं के नाम भी देते हैं:

गोत्रउपाधिदर्ज कुल-शाखाएँपृष्ठ
गौतमअवस्थी824
शांडिलमिश्र824
शांडिलदीक्षित625
भारद्वाजशुक्ल1325
भारद्वाजत्रिवेदी425
भारद्वाजपांडे625
उपमान (Upmân)पाठक426
उपमान (Upmân)दुबे926
कश्यप (Kâsyap)त्रिवेदी126
कश्यप (Kâsyap)तिवारी1126
काश्तिप (Kâshtip)बाजपेयी526
गर्गचौबे126

जिझौतिया ब्राह्मण (p. 56)

Sherring जिझौतिया ब्राह्मणों को कनौजिया परिवार की एक शाखा गिनते हैं, और उनके "कुछ प्रमुख" गोत्र और उपाधियाँ देते हैं। वे यह भी लिखते हैं कि पटेरिया, पस्तोरा, गंगेले, अजेरिया और नायक उपाधियाँ उनकी जानकारी में दूसरे ब्राह्मणों में नहीं मिलतीं।

गोत्रउपाधिकुल
उपमन्युपाठकRora
उपमन्युबाजपेयीBinware
कश्यपपटेरियाSaypur
कश्यपपस्तोराBangawa
गौतमचौबेRupnouwal
गौतमगंगेलेMaray
शांडिलमिश्रHamirpur
शांडिलअजेरियाKotke
मौनस (Mounas)मिश्रKariya
भारद्वाजतिवारीAijike
भारद्वाजदुबेUthashane
वत्सतिवारीPathraili
एकावसिष्ठ (Ekâvashisth)नायकPipri

सनाढ्य ब्राह्मण (pp. 58–60)

  • परंपरा: श्रीराम ने मथुरा प्रांत के 750 गाँव 750 ब्राह्मणों को दिए, और हर एक ने अपने गाँव का नाम अपने कुल का नाम बनाया — जैसे धूल गाँव से धूरिया, पचोर से पचोरिया (p. 58)।
  • इन 750 मूल कुलों में से 51 अधिक प्रतिष्ठित माने जाते हैं (p. 60)।
  • मैनपुरी क्षेत्र में शांडिल, गौतम, वसिष्ठ और भारद्वाज गोत्र सबसे अधिक मिलते हैं (p. 58)।
  • Sherring के अनुसार कई सनाढ्य स्वयं को कनौजिया नहीं, गौड़ ब्राह्मणों में गिनते हैं (p. 58)।
गोत्रउपाधियाँ (p. 60)
वसिष्ठव्यास, गोस्वामी, मिश्र, पराशर, कटारी, देवलिया, दुबे, खेमरिया, उपाध्याय
भारद्वाजवैद्य, चौबे, दीक्षित, त्रिपाठी, चतुर्धर
काश्यप (Kâsyap)मिश्र
सावर्णि (Sâwarni)तिवारी
उपमन्युदुबे
गौतमउपाध्याय
शांडिलपांडे

इन तालिकाओं को कैसे पढ़ें

  • उपाधि गोत्र नहीं है। कनौजिया तालिका में ही त्रिवेदी भारद्वाज और कश्यप — दोनों गोत्रों में है; दुबे कनौजियों में उपमान, जिझौतियों में भारद्वाज और सनाढ्यों में वसिष्ठ और उपमन्यु में दर्ज है।
  • ग्रंथ "कश्यप" (Kâsyap) और "काश्तिप" (Kâshtip) को अलग-अलग गोत्र गिनाता है, बिना कारण बताए; हमने दोनों नाम जैसे छपे हैं वैसे ही दिए हैं।
  • सनाढ्य तालिका के अंत में सात उपाधियाँ (पाठक, स्वामी, समाधिया आदि) बिना गोत्र के छपी हैं — उन्हें हमने किसी गोत्र से नहीं जोड़ा।
  • यह 1872 का ऐतिहासिक अभिलेख है — लेखक ने बनारस में मिली जानकारी दर्ज की, और स्वयं कहते हैं कि सूचियाँ पूरी नहीं। उपाधि (title) गोत्र नहीं: एक उपाधि कई गोत्रों में मिलती है। अपना गोत्र परिवार और कुल-पुरोहित से पक्का करें।

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स्रोत

कान्यकुब्ज ब्राह्मण — गोत्र और उपाधियाँ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न