कनौजिया ब्राह्मणों के गोत्र और उपाधियाँ
Sherring लिखते हैं कि हर गोत्र अपने-आप में एक वर्ग है, जिसमें एक या अधिक कुल हैं, और उन कुलों की पहचान "मिश्र", "शुक्ल" जैसी सम्मान-सूचक उपाधियों से होती है (p. 24)। हर उपाधि के नीचे वे कुल-शाखाओं के नाम भी देते हैं:
| गोत्र | उपाधि | दर्ज कुल-शाखाएँ | पृष्ठ |
|---|---|---|---|
| गौतम | अवस्थी | 8 | 24 |
| शांडिल | मिश्र | 8 | 24 |
| शांडिल | दीक्षित | 6 | 25 |
| भारद्वाज | शुक्ल | 13 | 25 |
| भारद्वाज | त्रिवेदी | 4 | 25 |
| भारद्वाज | पांडे | 6 | 25 |
| उपमान (Upmân) | पाठक | 4 | 26 |
| उपमान (Upmân) | दुबे | 9 | 26 |
| कश्यप (Kâsyap) | त्रिवेदी | 1 | 26 |
| कश्यप (Kâsyap) | तिवारी | 11 | 26 |
| काश्तिप (Kâshtip) | बाजपेयी | 5 | 26 |
| गर्ग | चौबे | 1 | 26 |
जिझौतिया ब्राह्मण (p. 56)
Sherring जिझौतिया ब्राह्मणों को कनौजिया परिवार की एक शाखा गिनते हैं, और उनके "कुछ प्रमुख" गोत्र और उपाधियाँ देते हैं। वे यह भी लिखते हैं कि पटेरिया, पस्तोरा, गंगेले, अजेरिया और नायक उपाधियाँ उनकी जानकारी में दूसरे ब्राह्मणों में नहीं मिलतीं।
| गोत्र | उपाधि | कुल |
|---|---|---|
| उपमन्यु | पाठक | Rora |
| उपमन्यु | बाजपेयी | Binware |
| कश्यप | पटेरिया | Saypur |
| कश्यप | पस्तोरा | Bangawa |
| गौतम | चौबे | Rupnouwal |
| गौतम | गंगेले | Maray |
| शांडिल | मिश्र | Hamirpur |
| शांडिल | अजेरिया | Kotke |
| मौनस (Mounas) | मिश्र | Kariya |
| भारद्वाज | तिवारी | Aijike |
| भारद्वाज | दुबे | Uthashane |
| वत्स | तिवारी | Pathraili |
| एकावसिष्ठ (Ekâvashisth) | नायक | Pipri |
सनाढ्य ब्राह्मण (pp. 58–60)
- परंपरा: श्रीराम ने मथुरा प्रांत के 750 गाँव 750 ब्राह्मणों को दिए, और हर एक ने अपने गाँव का नाम अपने कुल का नाम बनाया — जैसे धूल गाँव से धूरिया, पचोर से पचोरिया (p. 58)।
- इन 750 मूल कुलों में से 51 अधिक प्रतिष्ठित माने जाते हैं (p. 60)।
- मैनपुरी क्षेत्र में शांडिल, गौतम, वसिष्ठ और भारद्वाज गोत्र सबसे अधिक मिलते हैं (p. 58)।
- Sherring के अनुसार कई सनाढ्य स्वयं को कनौजिया नहीं, गौड़ ब्राह्मणों में गिनते हैं (p. 58)।
| गोत्र | उपाधियाँ (p. 60) |
|---|---|
| वसिष्ठ | व्यास, गोस्वामी, मिश्र, पराशर, कटारी, देवलिया, दुबे, खेमरिया, उपाध्याय |
| भारद्वाज | वैद्य, चौबे, दीक्षित, त्रिपाठी, चतुर्धर |
| काश्यप (Kâsyap) | मिश्र |
| सावर्णि (Sâwarni) | तिवारी |
| उपमन्यु | दुबे |
| गौतम | उपाध्याय |
| शांडिल | पांडे |
इन तालिकाओं को कैसे पढ़ें
- उपाधि गोत्र नहीं है। कनौजिया तालिका में ही त्रिवेदी भारद्वाज और कश्यप — दोनों गोत्रों में है; दुबे कनौजियों में उपमान, जिझौतियों में भारद्वाज और सनाढ्यों में वसिष्ठ और उपमन्यु में दर्ज है।
- ग्रंथ "कश्यप" (Kâsyap) और "काश्तिप" (Kâshtip) को अलग-अलग गोत्र गिनाता है, बिना कारण बताए; हमने दोनों नाम जैसे छपे हैं वैसे ही दिए हैं।
- सनाढ्य तालिका के अंत में सात उपाधियाँ (पाठक, स्वामी, समाधिया आदि) बिना गोत्र के छपी हैं — उन्हें हमने किसी गोत्र से नहीं जोड़ा।
- यह 1872 का ऐतिहासिक अभिलेख है — लेखक ने बनारस में मिली जानकारी दर्ज की, और स्वयं कहते हैं कि सूचियाँ पूरी नहीं। उपाधि (title) गोत्र नहीं: एक उपाधि कई गोत्रों में मिलती है। अपना गोत्र परिवार और कुल-पुरोहित से पक्का करें।
FAQ
कान्यकुब्ज ब्राह्मण — गोत्र और उपाधियाँ — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
Sherring (1872) के अनुसार कहे जाते हैं छह ("खटकुल"), पर व्यवहार में सात: गौतम, शांडिल, भारद्वाज, उपमान, कश्यप, काश्तिप और गर्ग (p. 24)।
Sherring की कनौजिया तालिका में शुक्ल उपाधि भारद्वाज गोत्र के कुलों की है (p. 25)। पर उपाधि गोत्र नहीं — दूसरे समाजों के शुक्ल परिवारों का गोत्र अलग हो सकता है।
अलग-अलग: कनौजिया में शांडिल (p. 24); जिझौतिया में शांडिल और मौनस (p. 56); सनाढ्य में वसिष्ठ और काश्यप (p. 60); सरवरिया में वत्स, कश्यप और कौशिक (p. 31)।
कनौजिया तालिका में काश्तिप (Kâshtip) गोत्र (p. 26), और जिझौतिया तालिका में उपमन्यु गोत्र (p. 56)।
कनौजिया तालिका में अवस्थी गौतम गोत्र के (p. 24) और दीक्षित शांडिल गोत्र के (p. 25); सनाढ्य तालिका में दीक्षित भारद्वाज गोत्र में है (p. 60)।
कनौजिया में तिवारी कश्यप गोत्र के (p. 26), और त्रिवेदी भारद्वाज और कश्यप दोनों में (pp. 25–26)। जिझौतिया में तिवारी भारद्वाज और वत्स में, सनाढ्य में सावर्णि में।
नहीं। एक ही उपाधि कई गोत्रों में दर्ज है, और सूचियाँ अधूरी हैं। अपना गोत्र परिवार और कुल-पुरोहित से पक्का करें।
