लय योग क्या है?
ग्रंथ में
लय का अर्थ है घुल जाना, जैसे नमक पानी में। योगतत्त्व उपनिषद् कहता है कि लय योग चित्त का लय है, और इसके करोड़ों प्रकार कहे गए हैं। चलते, ठहरते, सोते और खाते समय निष्कल का ध्यान करते रहना ही लय योग है।
लययोगश्चित्तलयः कोटिशः परिकीर्तितः।लय योग चित्त का लय है, और इसके करोड़ों प्रकार कहे गए हैं।
हठयोग प्रदीपिका में लय
ग्रंथ में
प्रदीपिका एक क्रम बताती है: इंद्रियों का स्वामी मन है, मन का स्वामी प्राण है, प्राण का स्वामी लय है, और वह लय नाद पर निर्भर है।
लोग "लय, लय" कहते हैं, पर उसका अर्थ क्या है? प्रदीपिका का उत्तर है कि वासनाएँ फिर से न उठें, और इंद्रियों के विषयों का भूल जाना ही लय है।
प्रदीपिका यह भी कहती है कि आदिनाथ ने समाधि के करोड़ों उपाय बताए हैं, और उनमें अनाहत नाद का श्रवण उसके मत में मुख्य है। प्रदीपिका राज योग के पर्यायों में भी लय को गिनती है।
लय योग में सावधानी
प्रदीपिका नाद के अभ्यास को मुद्रा और आसन के साथ बताती है, और इसके अभ्यास गुरु से सीखने की परंपरा है। इस पृष्ठ का वर्णन जानकारी के लिए है, अभ्यास की विधि नहीं।
लय योग किसके लिए, और कैसे?
ग्रंथ में
शिव संहिता के अनुसार लय योग मध्य साधकों के लिए है: उदार मन वाले, दयालु, धर्म चाहने वाले, मीठा बोलने वाले, और किसी काम में अति न करने वाले। ग्रंथ कहता है कि गुरु इन्हें लय योग की दीक्षा दे।
योगतत्त्व उपनिषद् के अनुसार लय योग चित्त का लय है, जो करोड़ों प्रकार का बताया गया है; चलते, खड़े, सोते और खाते हुए निष्कल ईश्वर का ध्यान करना ही लय योग है।
हठयोग प्रदीपिका लय के उपायों में अनाहत नाद के श्रवण को सबसे श्रेष्ठ कहती है, और नाद की चार अवस्थाओं, आरंभ, घट, परिचय और निष्पत्ति, का वर्णन करती है। ग्रंथ कहता है कि मन और नाद का मिलन राज योग कहलाता है।
आगे पढ़ें
- राज योग — मन की वह अवस्था, जिसे हठयोग अपना लक्ष्य कहता है
- हठ योग — शरीर और प्राण से मन तक पहुँचने वाला मार्ग
- ध्यान और साधना — ध्यान क्या है, उसका महत्व, और साधना के अलग-अलग रास्ते
- योग उपनिषद् — योग पर केंद्रित उपनिषदों का संग्रह, और योगतत्त्व उपनिषद् की शिक्षा
- योग के प्रकार — ग्रंथ योग को कैसे बाँटते हैं, और इस कोश के दस मार्ग
