महापुराण और उपपुराण: अंतर क्या है, और उपपुराण कौन-से हैं

अठारह महापुराणों के अलावा जो पुराण गिनाए जाते हैं, वे कहाँ से आए: मत्स्य के चार "उपभेद", कूर्म और गरुड़ के कथन, उपपुराणों की अलग-अलग सूचियाँ और "भागवत या भार्गव" की बहस

संक्षेप में

महापुराण वे अठारह पुराण हैं जिन्हें परंपरा व्यास से जोड़ती है, जैसे विष्णु, भागवत और मत्स्य। उपपुराण उनके अलावा गिनाए जाने वाले पुराण हैं, जैसे नरसिंह, नंदी, साम्ब, कालिका और शिवधर्म। मत्स्य पुराण के अनुसार ये महापुराणों से ही "निकले" हैं, और कूर्म पुराण के अनुसार इन्हें व्यास के शिष्यों ने कहा।

एक नज़र में

महापुराण
अठारह, परंपरा से व्यास के कहे (कूर्म 1.11.279)
उपपुराण
उनके अलावा के पुराण; कूर्म के अनुसार व्यास के शिष्यों के कहे
मत्स्य के उपभेद
नारसिंह (18,000 श्लोक), नंदी, साम्ब, आदित्य (53.60–63)
भागवत
अठारह पुराणों को "छोटे और बड़े" कहता है (12.7.22)
सूचियाँ
गरुड़ 1.223, देवी-भागवत और रेवा-माहात्म्य: नाम अलग-अलग
Wilson
उपपुराण विस्तार या विषय में कई पुराणों से बहुत अलग नहीं

महापुराण और उपपुराण में अंतर

पुराण-परंपरा स्वयं यह भेद करती है। कूर्म पुराण कहता है कि अठारह पुराण ब्रह्मा की आज्ञा से व्यास ने कहे, और उनमें धर्म प्रतिष्ठित है, जबकि दूसरे उपपुराण उनके शिष्यों ने कहे। गरुड़ पुराण भी अठारह पुराणों की सूची देकर कहता है कि "दूसरे उपपुराण मुनियों ने कहे हैं", और फिर उनके नाम गिनाता है। मत्स्य पुराण का कथन सबसे स्पष्ट है: इन अठारह के अलावा जो कोई पुराण अलग से बताया जाता है, उसे इन्हीं से निकला हुआ समझना चाहिए।

भागवत पुराण का दृष्टिकोण थोड़ा अलग है। वह पुराण के दस लक्षण बताकर कहता है कि कुछ लोग "बड़े और छोटे" के भेद से पाँच प्रकार का पुराण बताते हैं, और फिर कहता है कि पुराने ज्ञानी अठारह पुराणों को "छोटे और बड़े" दोनों कहते हैं, और उनकी सूची देता है। यानी भागवत के अनुसार अठारह पुराणों के भीतर भी छोटे-बड़े का भेद है, केवल महापुराण और उपपुराण का नहीं।

Wilson ने 1840 में लिखा कि जो थोड़े-से उपपुराण उपलब्ध हैं, वे विस्तार या विषय में उन कुछ ग्रंथों से बहुत अलग नहीं जिन्हें "पुराण" कहा जाता है। यानी महापुराण और उपपुराण का अंतर ग्रंथ की प्रकृति से कम, परंपरा की मान्यता से अधिक है।

मत्स्य पुराण के चार "उपभेद"

मत्स्य पुराण अठारह पुराणों की सूची और उनकी श्लोक-संख्या देने के बाद कहता है कि व्यास ने लोक-हित के लिए जो पुराण संक्षेप में कहा, वह यहाँ चार लाख श्लोकों का है, जबकि देवताओं में आज भी उसका विस्तार सौ करोड़ का है। फिर वह "उपभेद" बताता है जो लोक में प्रचलित हैं: पहला नारसिंह, जिसमें नरसिंह का वर्णन है, जिसका उल्लेख पद्म पुराण में है, और जो अठारह हज़ार श्लोकों का है; दूसरा नंदी पुराण, जिसमें कार्तिकेय नंदा का माहात्म्य बताते हैं; तीसरा साम्ब, जिसकी कथा साम्ब को आगे रखकर कही जाती है; और चौथा आदित्य पुराण।

Wilson ने लिखा कि ईस्ट इंडिया कंपनी के पुस्तकालय की मत्स्य पुराण की तीन प्रतियों में नरसिंह और नंदी के साथ साम्ब और आदित्य दोनों हैं, जबकि एक प्रति साम्ब को छोड़ देती है, और ऑक्सफ़र्ड की प्रति आदित्य को। यानी उपपुराणों की गिनती पुराण की प्रतियों में भी एक जैसी नहीं।

अष्टादशभ्यस्तु पृथक् पुराणं यत्प्रदिश्यते । विजानीध्वं द्विजश्रेष्ठास्तदेतेभ्यो विनिर्गतम् ॥

हे श्रेष्ठ ब्राह्मणो, इन अठारह के अलावा जो पुराण अलग से बताया जाता है, उसे इन्हीं से निकला हुआ जानो।

— मत्स्य पुराण, अध्याय 1–176 (Calcutta: Caukhamba Vidyabhavan 1954) — GRETIL e-text, पृष्ठ 53.64

उपपुराणों की अलग-अलग सूचियाँ

उपपुराणों की कोई एक सर्वमान्य सूची नहीं है। गरुड़ पुराण (1.223) ये नाम देता है: सनत्कुमार का कहा हुआ पहला, फिर नारसिंह, कुमार का कहा हुआ स्कांद, नंदीश्वर का कहा हुआ शिवधर्म, दुर्वासा का कहा हुआ आश्चर्य, नारद का कहा हुआ, कापिल, वामन, औशनस, ब्रह्मांड, वारुण, कालिका, माहेश्वर, साम्ब, पराशर का कहा हुआ, मारीच और भार्गव। ध्यान देने की बात है कि इस सूची में "वामन", "स्कांद" और "ब्रह्मांड" जैसे नाम भी उपपुराण के रूप में हैं, जो महापुराणों के भी नाम हैं।

Wilson ने दो और सूचियाँ दीं। देवी-भागवत की सूची: सनत्कुमार, नारसिंह, नारदीय, शिव, दौर्वासस, कापिल, मानव, औशनस, वारुण, कालिका, साम्ब, नंदी, सौर, पाराशर, आदित्य, माहेश्वर, भागवत और वासिष्ठ। और रेवा खंड की सूची, जो कुछ अलग है: सनत्कुमार, नारसिंह, नंदा, शिवधर्म, दौर्वासस, नारद का कहा भविष्य, कापिल, मानव, औशनस, ब्रह्मांड, वारुण, कालिका, माहेश्वर, साम्ब, सौर, पाराशर, भागवत और कौर्म। Wilson के अनुसार ये सूचियाँ बहुत भरोसेमंद नहीं, क्योंकि इनके पीछे देवी-भागवत को "असली" भागवत सिद्ध करने का उद्देश्य दिखता है।

तीन सूचियों में कुछ उपपुराण (✓ = नाम है)
उपपुराणगरुड़ 1.223देवी-भागवत (Wilson)रेवा खंड (Wilson)स्रोत
सनत्कुमार✓✓✓गरुड़ पुराण (मूल संस्कृत), 1.223.17; विष्णु पुराण, अंश 1 (Wilson अनु.), Preface, p. lxxxvii
नारसिंह✓✓✓गरुड़ पुराण (मूल संस्कृत), 1.223.17; विष्णु पुराण, अंश 1 (Wilson अनु.), Preface, p. lxxxvii
शिवधर्म / शिव✓ (शिवधर्म)✓ (शिव)✓ (शिवधर्म)गरुड़ पुराण (मूल संस्कृत), 1.223.18; विष्णु पुराण, अंश 1 (Wilson अनु.), Preface, p. lxxxvii
दौर्वासस✓ (आश्चर्य)✓✓गरुड़ पुराण (मूल संस्कृत), 1.223.19; विष्णु पुराण, अंश 1 (Wilson अनु.), Preface, p. lxxxvii
कापिल✓✓✓गरुड़ पुराण (मूल संस्कृत), 1.223.19; विष्णु पुराण, अंश 1 (Wilson अनु.), Preface, p. lxxxvii
कालिका✓✓✓गरुड़ पुराण (मूल संस्कृत), 1.223.20; विष्णु पुराण, अंश 1 (Wilson अनु.), Preface, p. lxxxvii
साम्ब✓✓✓गरुड़ पुराण (मूल संस्कृत), 1.223.20; विष्णु पुराण, अंश 1 (Wilson अनु.), Preface, p. lxxxvii
भार्गव / भागवत✓ (भार्गव)✓ (भागवत)✓ (भागवत)गरुड़ पुराण (मूल संस्कृत), 1.223.20; विष्णु पुराण, अंश 1 (Wilson अनु.), Preface, pp. lxxxvii–lxxxviii

"भागवत" या "भार्गव": एक पुरानी बहस

उपपुराणों की सूची में "भागवत" नाम का होना एक बड़ी बहस का विषय रहा है। देवी-भागवत और रेवा खंड की सूचियों में भागवत उपपुराण के रूप में है, जिससे यह तर्क दिया गया कि "भागवत" नाम के दो ग्रंथ हैं: महापुराण देवी-भागवत है और श्रीमद्भागवत उपपुराण। Wilson का मत था कि किसी भी प्रामाणिक सूची में भागवत उपपुराणों में नहीं आता; वह वहाँ इसी दावे को सिद्ध करने के लिए रखा गया है, और सही पाठ "भार्गव" (भृगु का पुराण) होना चाहिए। गरुड़ पुराण की सूची में सचमुच "भार्गव" ही है।

Wilson ने यह भी लिखा कि देवी-भागवत, जितना वह उपलब्ध है, स्पष्ट रूप से शाक्त ग्रंथ है, और उनके अनुसार वह उपपुराण भी नहीं। यह बहस मूलतः संप्रदायों के बीच की है। हमारी सूची में भागवत पुराण (श्रीमद्भागवत) अठारह में है, क्योंकि विष्णु पुराण और भागवत की अपनी सूचियाँ यही नाम देती हैं; देवी-भागवत वाली बात सूचियों वाले लेख में भी है।

कौन-से उपपुराण मिलते हैं

Wilson के समय बहुत कम उपपुराण मिलते थे। उनके पास शिव उपपुराण (जिसे वे वायु पुराण से अलग मानते थे), कालिका पुराण और शायद नारदीय का एक रूप था। उनके अनुसार शिव उपपुराण लगभग छह हज़ार श्लोकों का है, दो भागों में, जिसे सनत्कुमार नैमिषारण्य में व्यास और ऋषियों को सुनाते हैं: ऋषि उनसे लिंग और देवाधिदेव शिव की पूजा के नियम, उनके रूप, उनके पवित्र स्थान और उनकी स्तुतियाँ पूछते हैं, और उत्तर में विष्णु और ब्रह्मा का जन्म, सृष्टि, लिंग से सब चीज़ों की उत्पत्ति और लिंग-पूजा के नियम आते हैं।

Wilson के अनुसार शिव उपपुराण के दूसरे भाग में लगभग पूरी तरह शैव कथाएँ हैं: त्रिपुरासुर की हार, दक्ष का यज्ञ, शिव के पुत्र कार्तिकेय और गणेश और उनके गण नंदी और भृंगी का जन्म, काशी और दूसरे तीर्थों का वर्णन, और शिवरात्रि जैसे उत्सवों के नियम; उनके शब्दों में यह "एक शैव पुस्तिका है, पुराण नहीं"। कालिका पुराण, उनके अनुसार, लगभग नौ हज़ार श्लोकों और अट्ठानवे अध्यायों का है, और पूरी शृंखला में यही अकेला ग्रंथ है जो शिव की पत्नी की, गिरिजा, देवी, भद्रकाली, काली और महामाया जैसे रूपों में, उपासना को समर्पित है। इसमें शिव-पार्वती विवाह, दक्ष का यज्ञ और सती की मृत्यु, शिव का सती के शरीर को लेकर संसार में घूमना और जहाँ-जहाँ अंग गिरे वहाँ "पीठ-स्थानों" की उत्पत्ति, और कामरूप (असम) में कामाख्या के आसपास की नदियों और पर्वतों का लंबा वर्णन है।

Wilson ने यह भी लिखा कि उपपुराणों की सूचियाँ कुछ ऐसे नाम गिनाती हैं जिनका अस्तित्व ही संदिग्ध है, और कुछ ऐसे ग्रंथ छोड़ देती हैं जो "उपपुराण" नाम से मिलते हैं: Colonel Mackenzie के संग्रह में भार्गव का एक अंश और एक "मुद्गल पुराण" था, जो शायद Vans Kennedy का बताया "गणेश उपपुराण" ही है, और Wilson के पास भी एक गणेश पुराण की प्रति थी।

गरुड़ पुराण के ब्रह्म खंड में एक और सूची है, जो "छोटे" अठारह उपपुराण बताती है और उनमें विष्णुधर्मोत्तर, नारसिंह, वायु-प्रोक्त, हंस पुराण जैसे कुछ को "सात्त्विक" कहती है, और भविष्योत्तर, बृहन्नारद और लघुनारद जैसे नाम भी गिनाती है। यह वही खंड है जो पुराणों को तीन गुणों में बाँटता है, इसलिए उसकी यह सूची भी एक सांप्रदायिक दृष्टि से है।

आगे पढ़ें

  • पुराण ज्ञानकोश — 18 महापुराणों के नाम, क्रम, वक्ता और श्लोक-संख्या; पंचलक्षण और दशलक्षण; महापुराण और उपपुराण
  • अठारह महापुराणों की सूचियाँ — विष्णु, भागवत, मत्स्य, कूर्म, अग्नि, वराह और गरुड़ पुराण अठारह पुराणों के नाम और श्लोक-संख्या कैसे देते हैं, कहाँ वे मेल खाते हैं और कहाँ नहीं
  • पुराण के पंच लक्षण — पुराण की सबसे पुरानी परिभाषा, भागवत के दस लक्षण, और यह सवाल कि आज के पुराण इस परिभाषा पर कितने खरे उतरते हैं
  • मत्स्य पुराण — मत्स्य-रूप भगवान ने प्रलय के जल में नाव पर बैठे राजा मनु को सुनाया: सृष्टि, पितर, वंश, व्रत, तीर्थ, गोत्र, सावित्री, राजधर्म, मूर्ति-मंदिर और सोलह महादान
  • गरुड़ पुराण — विष्णु और गरुड़ का संवाद: पूजा और व्रत से रत्न-परीक्षा और आयुर्वेद तक, फिर प्रेतकल्प में मृत्यु, कर्म-फल, श्राद्ध और मोक्ष का उपदेश
  • देवी — देवी-भागवत और शाक्त परंपरा

स्रोत एवं संदर्भ

महापुराण और उपपुराण — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न