भुजंगासन

Bhujangasana (Cobra Posture): साँप के फन की तरह उठता शरीर

संक्षेप में

भुजंगासन पेट के बल लेटकर, हथेलियों के सहारे सिर और छाती को नाभि तक उठाने का आसन है, जैसे साँप फन उठाता है। आयुष मंत्रालय इसका एक सरल रूप भी देता है, जिसमें कोहनियाँ ज़मीन पर रहती हैं। घेरंड संहिता में भी इसका वर्णन है।

पुराने हठ-ग्रंथों में मिलता है

भुजंगासन: पेट के बल लेटे साधक, हथेलियाँ छाती के बगल में, सिर और छाती नाभि तक ऊपर उठे हुए

एक नज़र में

संस्कृत नाम
भुजंगासन
अंग्रेज़ी नाम
Cobra Posture
प्रकार
पेट के बल
समय
10 से 30 सेकंड (CYP)
ग्रंथ में
घेरंड संहिता 2.42–43

भुजंगासन का नाम कैसे पड़ा?

भुजंग का अर्थ साँप या नाग है। इस आसन में शरीर साँप के उठे हुए फन जैसा दिखता है।

भुजंगासन करने की विधि

आधुनिक अभ्यास

विधि आयुष के Common Yoga Protocol के अनुसार है। पेट के बल लेटिए, सिर हाथों पर रखकर शरीर ढीला छोड़िए; फिर पैर जोड़कर हाथ फैलाइए और माथा ज़मीन पर रखिए।

  1. हथेलियाँ छाती के बगल में रखिए और कोहनियाँ ऊपर उठाइए।
  2. साँस भरते हुए धीरे-धीरे सिर और छाती को नाभि तक ऊपर उठाइए।
  3. कोहनियाँ समानांतर रखिए और सामान्य साँस के साथ 10 से 30 सेकंड रुकिए।
  4. साँस छोड़ते हुए माथा ज़मीन पर रखिए, मकरासन में आकर विश्राम कीजिए।

भुजंगासन में साँस कैसे लें?

आधुनिक अभ्यास

उठते समय साँस भरिए, अंतिम स्थिति में सामान्य साँस लीजिए, और नीचे आते समय छोड़िए।

भुजंगासन के लाभ

आधुनिक अभ्यास

आयुष की पुस्तिका के अनुसार भुजंगासन तनाव दूर करता है, पेट की चर्बी घटाता है और कब्ज़ में राहत देता है; यह कमर दर्द और श्वास-नली की समस्याओं में भी राहत देता है।

पुस्तिका सलाह देती है कि पैरों को दृढ़ रखें, ताकि कमर के निचले हिस्से पर बोझ या खिंचाव न पड़े।

भुजंगासन में क्या सावधानी रखें?

किन्हें यह नहीं करना चाहिए

पेट की सर्जरी के बाद 2–3 महीने यह आसन न कीजिए।

हर्निया या अल्सर हो तो यह आसन न कीजिए।

शुरुआती लोग भुजंगासन कैसे करें?

आधुनिक अभ्यास

शुरुआत "सरल भुजंगासन" से कीजिए: हथेलियाँ और कोहनियाँ ज़मीन पर, शरीर के बगल में रखकर, साँस भरते हुए सिर और छाती को नाभि तक उठाइए, हाथों की स्थिति बदले बिना।

भुजंगासन की आम ग़लतियाँ

आधुनिक अभ्यास

  • पैरों को ढीला छोड़ना: पैर कसे रहें, ताकि कमर के निचले हिस्से पर भार या तनाव न पड़े।

क्या भुजंगासन पुराने ग्रंथों में है?

ग्रंथ में

हाँ। घेरंड संहिता के अनुसार नाभि से पैर की उँगलियों तक शरीर ज़मीन से लगा रहे, हथेलियाँ ज़मीन पर रखकर सिर (ऊपरी शरीर) साँप की तरह उठाया जाए, यह भुजंगासन है। आयुष की पुस्तिका इसके लिए घेरंड संहिता ii.42 का संदर्भ "कुछ अंतर के साथ" देती है। ग्रंथ इस आसन से कुंडलिनी के जागने की बात भी कहता है; यह ग्रंथ का कथन है, कोई सिद्ध परिणाम नहीं।

घेरंड संहिता कहती है कि भुजंगासन सदा शरीर की ऊष्मा बढ़ाता है, सब रोगों का नाश करता है, और इसके अभ्यास से सर्प-देवी, यानी कुंडलिनी शक्ति, जागती है।

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भुजंगासन — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न