वज्रासन

Vajrasana (Thunderbolt Posture): एड़ियों के बीच बैठने वाला ध्यान का आसन

संक्षेप में

वज्रासन में पैरों को मोड़कर एड़ियों के बीच बैठा जाता है, हाथ घुटनों पर और पीठ सीधी रहती है। आयुष मंत्रालय इसे ध्यान के आसनों में गिनता है। घेरंड संहिता में भी इसका वर्णन है, और हठयोग प्रदीपिका इसे सिद्धासन का एक दूसरा नाम भी बताती है।

पुराने हठ-ग्रंथों में मिलता है

वज्रासन: घुटने मोड़कर एड़ियों के बीच बैठे साधक, हाथ घुटनों पर, पीठ सीधी

एक नज़र में

संस्कृत नाम
वज्रासन
अंग्रेज़ी नाम
Thunderbolt Posture
प्रकार
बैठकर, ध्यान का आसन
प्रारंभिक स्थिति
दंडासन (CYP)
ग्रंथ में
घेरंड संहिता 2.12

वज्रासन का नाम कैसे पड़ा?

वज्र का अर्थ वज्र या बिजली है। आयुष की पुस्तिका इसे Thunderbolt Posture कहती है और इसे ध्यान के आसनों में रखती है; ध्यान के लिए करते समय अंतिम स्थिति में आँखें बंद की जाती हैं।

वज्रासन करने की विधि

आधुनिक अभ्यास

विधि आयुष के Common Yoga Protocol के अनुसार है। पैर सामने फैलाकर, साथ रखकर बैठिए; हाथ शरीर के बगल में, हथेलियाँ ज़मीन पर और उँगलियाँ आगे की ओर।

  1. दाहिना पैर घुटने से मोड़कर उसका पंजा दाहिने नितंब के नीचे रखिए।
  2. इसी तरह बायाँ पैर मोड़कर उसका पंजा बाएँ नितंब के नीचे रखिए।
  3. एड़ियाँ ऐसे रखिए कि दोनों अँगूठे आपस में मिलें, और नितंब एड़ियों के बीच की जगह में रहें।
  4. हाथ घुटनों पर रखिए, रीढ़ सीधी रखिए, सामने देखिए या आँखें बंद कीजिए।
  5. लौटते समय थोड़ा दाहिनी ओर झुककर बायाँ पैर निकालकर फैलाइए, फिर दाहिना, और विश्राम कीजिए।

वज्रासन के लाभ

आधुनिक अभ्यास

आयुष की पुस्तिका वज्रासन को ध्यान के आसनों में गिनती है, और कहती है कि ध्यान के लिए करते समय अंतिम स्थिति में आँखें बंद कर लेनी चाहिए।

पुस्तिका के अनुसार यह आसन पाचन के लिए अच्छा है, और जाँघ व पिंडली की मांसपेशियों को मज़बूत करता है।

वज्रासन में क्या सावधानी रखें?

किन्हें यह नहीं करना चाहिए

घुटने के दर्द या टखने की चोट में यह आसन न कीजिए।

बवासीर के रोगी यह आसन न करें।

वज्रासन की आम ग़लतियाँ

आधुनिक अभ्यास

  • झुककर बैठना: पूरे समय रीढ़ सीधी रहनी चाहिए।

क्या वज्रासन पुराने ग्रंथों में है?

ग्रंथ में

हाँ। घेरंड संहिता कहती है कि जाँघों को वज्र की तरह कसकर, पैरों को गुदा के दोनों ओर रखना वज्रासन है। आयुष की पुस्तिका भी वज्रासन के संदर्भ में घेरंड संहिता II-12 देती है।

हठयोग प्रदीपिका में "वज्रासन" नाम सिद्धासन के दूसरे नाम के रूप में आता है। यानी एक ही नाम अलग ग्रंथों में अलग आसनों के लिए भी प्रयुक्त हुआ है।

घेरंड संहिता के अनुसार वज्रासन योगी को सिद्धियाँ (असाधारण शक्तियाँ) देता है।

घेरंड संहिता में एक और मिलता-जुलता आसन है, गुप्तासन: दोनों पैरों को घुटनों के नीचे छिपाकर, गुदा को पैरों पर टिकाना।

आगे पढ़ें

  • सिद्धासन — Siddhasana (Perfect Posture): सिद्धों का आसन
  • पद्मासन — Padmasana (Lotus Posture): ध्यान और जप का प्रमुख आसन
  • सुखासन — Sukhasana (Easy Posture): जप और ध्यान के लिए सहज बैठना
  • ध्यान कैसे करें? — शुरुआत करने वालों के लिए, गीता और आयुष प्रोटोकॉल के आधार पर

वज्रासन — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न