वृक्षासन

Vrikshasana (Tree Posture): एक पैर पर संतुलन

संक्षेप में

वृक्षासन में एक पैर पर खड़े होकर, दूसरे पैर का तलवा भीतरी जाँघ पर रखा जाता है और हाथ सिर के ऊपर जोड़े जाते हैं। शरीर पेड़ जैसा दिखता है, इसलिए यह नाम है। यह उन गिने-चुने खड़े आसनों में है जिनका वर्णन घेरंड संहिता में भी मिलता है।

पुराने हठ-ग्रंथों में मिलता है

वृक्षासन: एक पैर पर खड़े साधक, दूसरे पैर का तलवा भीतरी जाँघ पर, हाथ सिर के ऊपर नमस्कार मुद्रा में

एक नज़र में

संस्कृत नाम
वृक्षासन
अंग्रेज़ी नाम
Tree Posture
प्रकार
खड़े होकर, संतुलन
समय
10 से 30 सेकंड, दोनों ओर (CYP)
ग्रंथ में
घेरंड संहिता 2.36

वृक्षासन का नाम कैसे पड़ा?

संस्कृत में वृक्ष का अर्थ पेड़ है। इस आसन की अंतिम स्थिति पेड़ जैसी दिखती है: एक पैर ज़मीन में जड़ की तरह, और हाथ ऊपर शाखाओं की तरह।

वृक्षासन करने की विधि

आधुनिक अभ्यास

विधि आयुष के Common Yoga Protocol के अनुसार है। दोनों पैरों के बीच लगभग दो इंच की दूरी रखकर सीधे खड़े होइए, और सामने किसी एक बिंदु पर दृष्टि टिकाइए।

  1. साँस छोड़ते हुए दाहिना पैर मोड़िए और उसका तलवा बाईं जाँघ के भीतरी भाग पर रखिए, एड़ी ऊपर की ओर रहे।
  2. साँस भरते हुए हाथ ऊपर ले जाइए और हथेलियाँ जोड़कर नमस्कार मुद्रा बनाइए।
  3. सामान्य साँस के साथ 10 से 30 सेकंड रुकिए।
  4. साँस छोड़ते हुए हाथ नीचे लाइए, दाहिना पैर छोड़कर प्रारंभिक स्थिति में आइए।
  5. यही बाएँ पैर से दोहराइए।

वृक्षासन में साँस कैसे लें?

आधुनिक अभ्यास

पैर मोड़ते समय साँस छोड़िए, हाथ उठाते समय भरिए, अंतिम स्थिति में सामान्य साँस लीजिए, और हाथ नीचे लाते समय छोड़िए।

वृक्षासन के लाभ

आधुनिक अभ्यास

आयुष की पुस्तिका के अनुसार वृक्षासन तंत्रिका और मांसपेशियों का तालमेल, संतुलन, सहनशक्ति, सजगता और एकाग्रता सुधारता है।

वृक्षासन में क्या सावधानी रखें?

किन्हें यह नहीं करना चाहिए

गठिया या चक्कर की समस्या हो तो यह आसन न कीजिए।

शुरुआती लोग वृक्षासन कैसे करें?

आधुनिक अभ्यास

संतुलन न बने तो दीवार के पास खड़े होकर अभ्यास कीजिए, और उतनी ही देर रुकिए जितना सहज हो। यह सुझाव पुस्तिका के "क्षमता के अनुसार" वाले निर्देश से निकली हमारी व्याख्या है।

वृक्षासन की आम ग़लतियाँ

आधुनिक अभ्यास

  • दृष्टि भटकाना: सामने किसी एक बिंदु पर दृष्टि टिकाने से संतुलन बनता है।

क्या वृक्षासन पुराने ग्रंथों में है?

ग्रंथ में

हाँ। घेरंड संहिता में वृक्षासन का वर्णन है: बाएँ पैर पर सीधे खड़े होकर, दाहिना पैर मोड़कर उसका तलवा बाईं जाँघ की जड़ पर रखना, और पृथ्वी पर पेड़ की तरह खड़े रहना। यह आज के रूप से काफ़ी मिलता है। आयुष की पुस्तिका भी इसके संदर्भ में घेरंड संहिता 2.36 देती है।

घेरंड संहिता ने यह आसन अपने 32 आसनों में पच्चीसवाँ रखा है, और इसे "पेड़ की तरह भूमि पर खड़ा होना" कहा है।

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वृक्षासन — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न