पवनमुक्तासन

Pavanamuktasana (Wind Releasing Posture): घुटने छाती से लगाकर

संक्षेप में

पवनमुक्तासन पीठ के बल लेटकर, दोनों घुटनों को छाती से लगाकर और सिर उठाकर ठोड़ी को घुटनों तक लाने का आसन है। पवन का अर्थ वायु और मुक्त का अर्थ छोड़ना है। हर्निया, साइटिका, कमर के तेज़ दर्द, पेट की चोट और गर्भावस्था में यह आसन नहीं करना चाहिए।

हठयोग प्रदीपिका, घेरंड और शिव संहिता में नहीं मिला

पवनमुक्तासन: पीठ के बल लेटे साधक, दोनों घुटने छाती से लगे, हाथ पिंडलियों को थामे, सिर उठाकर ठोड़ी घुटनों के पास

एक नज़र में

संस्कृत नाम
पवनमुक्तासन
अंग्रेज़ी नाम
Wind Releasing Posture
प्रकार
पीठ के बल

पवनमुक्तासन का नाम कैसे पड़ा?

पवन का अर्थ वायु है और मुक्त का अर्थ छोड़ना या मुक्त करना। आयुष की पुस्तिका के अनुसार यह नाम पेट से वायु निकालने के उद्देश्य से पड़ा।

पवनमुक्तासन करने की विधि

आधुनिक अभ्यास

विधि आयुष के Common Yoga Protocol के अनुसार है। शवासन में पीठ के बल सीधे लेटिए।

  1. दोनों घुटने मोड़िए।
  2. साँस छोड़ते हुए दोनों घुटने छाती की ओर लाइए।
  3. साँस भरते हुए उँगलियाँ आपस में फँसाकर घुटनों के नीचे पिंडलियाँ पकड़िए।
  4. साँस छोड़ते हुए सिर उठाइए, जब तक ठोड़ी घुटनों को न छू ले, और ढीले रहिए।
  5. सिर वापस ज़मीन पर रखिए, साँस छोड़ते हुए पैर ज़मीन पर लाइए, और शवासन में विश्राम कीजिए।

पवनमुक्तासन में साँस कैसे लें?

आधुनिक अभ्यास

पुस्तिका साँस को पैरों की गति के साथ मिलाने को कहती है: घुटने छाती की ओर लाते और सिर उठाते समय साँस छोड़िए, हाथ फँसाते समय भरिए।

पवनमुक्तासन के लाभ

आधुनिक अभ्यास

आयुष की पुस्तिका के अनुसार पवनमुक्तासन कब्ज़ दूर करता है, पेट की वायु और फूलेपन से राहत देता है, और पाचन में मदद करता है।

पुस्तिका के अनुसार यह भीतर गहरा दबाव बनाता है, श्रोणि और कमर के क्षेत्र की मांसपेशियों, स्नायुओं और कंडराओं के जटिल जाल को खींचता है, और पीठ की मांसपेशियों व रीढ़ की नसों को सक्रिय करता है।

पुस्तिका कहती है कि घुटने को नाक या माथे से छुआते समय कमर के निचले हिस्से में खिंचाव महसूस होना चाहिए; आँखें बंद रखकर ध्यान श्रोणि और कमर पर रखिए।

पवनमुक्तासन में क्या सावधानी रखें?

किन्हें यह नहीं करना चाहिए

पेट की चोट, हर्निया, साइटिका, कमर के तेज़ दर्द और गर्भावस्था में यह आसन न कीजिए।

पवनमुक्तासन की आम ग़लतियाँ

आधुनिक अभ्यास

  • झटके से सिर उठाना: सिर धीरे उठाइए; पुस्तिका कहती है कि कमर के हिस्से में खिंचाव महसूस होना चाहिए, और आँखें बंद रखकर ध्यान कमर और श्रोणि पर रखिए।

क्या पवनमुक्तासन पुराने ग्रंथों में है?

हमने हठयोग प्रदीपिका और घेरंड संहिता की आसन-सूचियाँ और शिव संहिता का आसन-भाग पढ़ा। इन तीनों में पवनमुक्तासन का नाम नहीं मिला।

इसका अर्थ यह नहीं कि यह आसन किसी भी पुराने ग्रंथ में नहीं है। आयुष मंत्रालय की पुस्तिका इसके लिए श्री योग कौस्तुभ और सचित्र चौरासी आसन जैसे संदर्भ देती है। ये ग्रंथ हमने स्वयं नहीं पढ़े, इसलिए उनके काल या पाठ के बारे में हम कुछ नहीं कह रहे।

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  • योगासन — आसनों की विधि, सावधानियाँ, और पुराने ग्रंथों में उनका स्थान

पवनमुक्तासन — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न