हलासन का नाम कैसे पड़ा?
संस्कृत में हल का अर्थ खेत जोतने का हल है। Sivananda लिखते हैं कि यह आसन ठीक हल जैसा दिखता है।
हलासन क्या है?
Sivananda के वर्णन के अनुसार इसमें कंबल पर पीठ के बल लेटकर, हाथ बगल में ज़मीन पर रखकर, दोनों पैर साथ रखते हुए बहुत धीरे ऊपर उठाए जाते हैं, और फिर सिर के ऊपर से पीछे ले जाकर पंजे ज़मीन से लगाए जाते हैं। घुटने सीधे रहते हैं और ठोड़ी छाती से लगी रहती है। वे केवल नाक से धीरे साँस लेने को कहते हैं।
आयुष की पुस्तिका इसका केवल आधा रूप, अर्ध हलासन, अपने प्रोटोकॉल में रखती है, पूरा हलासन नहीं।
आयुष प्रोटोकॉल का अर्ध हलासन
आधुनिक अभ्यास
आयुष के Common Yoga Protocol में पूरा हलासन नहीं, उसका आधा रूप, अर्ध हलासन, है। अर्ध का अर्थ आधा और हल का अर्थ हल है; अंतिम स्थिति में शरीर भारतीय हल के आधे आकार जैसा दिखता है, इसलिए यह नाम।
पुस्तिका के वर्णन में पीठ के बल लेटकर, हाथ शरीर के बगल में और हथेलियाँ ज़मीन पर रखकर, साँस भरते हुए दोनों पैर बिना घुटने मोड़े साथ-साथ धीरे उठाकर ज़मीन से 90 अंश पर लाए जाते हैं; कूल्हों से कंधों तक शरीर सीधा रहता है। 10–30 सेकंड सहज रहकर, साँस छोड़ते हुए, सिर उठाए बिना पैर धीरे नीचे लाए जाते हैं, और शवासन में विश्राम।
पुस्तिका के अनुसार यह आसन कब्ज़ में राहत देता है, और उच्च रक्तचाप वालों के लिए लाभकारी है, पर देखरेख में ही किया जाना चाहिए।
पुस्तिका की सावधानी: कमर के निचले हिस्से (लम्बोसैक्रल) में दर्द हो तो दोनों पैर साथ न उठाएँ; पेट की चोट, हर्निया आदि में यह अभ्यास न करें।
हलासन में क्या सावधानी रखें?
यह आसन प्रशिक्षक से ही सीखिए
NCCIH नए अभ्यासियों को शीर्षासन, सर्वांगासन और पद्मासन जैसे कठिन अभ्यासों से बचने को कहता है, और योग्य प्रशिक्षक की देखरेख में सीखने को। बिना देखरेख सीखने में जोखिम बढ़ता है।
आयुष की पुस्तिका इस आसन के निषेध नहीं देती, इसलिए इस पृष्ठ पर घर पर करने की चरण-दर-चरण विधि नहीं है। गर्दन, रीढ़, आँख, रक्तचाप या हृदय की कोई भी समस्या हो, तो पहले चिकित्सक से पूछिए।
- इस आसन में गर्दन और रीढ़ आगे की ओर पूरी मुड़ती है। गर्दन या कमर की कोई भी समस्या हो तो इसे न कीजिए।
क्या हलासन पुराने ग्रंथों में है?
हठयोग प्रदीपिका, घेरंड संहिता और शिव संहिता की आसन-सूचियों में हलासन का नाम नहीं मिला। आयुष की पुस्तिका अपने अर्ध हलासन के लिए योगरहस्य (II-17) का संदर्भ देती है; वह ग्रंथ हमने स्वयं नहीं पढ़ा।
आगे पढ़ें
- सर्वांगासन — Sarvangasana (Shoulder Stand): कंधों के बल, केवल प्रशिक्षक की देखरेख में
- पश्चिमोत्तानासन — Paschimottanasana: बैठकर आगे झुकना, पैरों के अँगूठे पकड़कर
- पवनमुक्तासन — Pavanamuktasana (Wind Releasing Posture): घुटने छाती से लगाकर
- योगासन — आसनों की विधि, सावधानियाँ, और पुराने ग्रंथों में उनका स्थान

