ताड़ासन का नाम कैसे पड़ा?
संस्कृत में "ताड" का अर्थ ताड़ का पेड़ है, और आयुष मंत्रालय की पुस्तिका इसका अर्थ पर्वत भी देती है। दोनों का भाव एक है: सीधा, ऊँचा और अडिग। इस आसन की पहली सीख भी यही है। शरीर को हिलाना नहीं, टिकाना है।
ताड़ासन करने की विधि
आधुनिक अभ्यास
यह विधि आयुष मंत्रालय के Common Yoga Protocol के अनुसार है। शुरुआत में दोनों पैरों के बीच लगभग दो इंच की दूरी रखकर सीधे खड़े हो जाइए।
- साँस भरते हुए दोनों हाथ सामने कंधों की ऊँचाई तक उठाइए।
- हाथों की उँगलियाँ आपस में फँसाइए और कलाइयों को बाहर की ओर घुमाइए।
- साँस भरते हुए हाथों को सिर के ऊपर ले जाइए।
- हाथ उठाते समय एड़ियाँ ज़मीन से उठाइए और पंजों पर संतुलन बनाइए।
- इस स्थिति में 10 से 30 सेकंड रुकिए।
- एड़ियाँ नीचे लाइए। साँस छोड़ते हुए उँगलियों को अलग कीजिए और हाथ नीचे लाकर खड़े होने की स्थिति में लौट आइए।
ताड़ासन में साँस कैसे लें?
आधुनिक अभ्यास
हाथ ऊपर ले जाते समय साँस भरिए और हाथ नीचे लाते समय छोड़िए। साँस नाक से लीजिए, और जब तक विशेष रूप से न कहा जाए, उसे रोकिए नहीं।
ताड़ासन के लाभ
आधुनिक अभ्यास
आयुष मंत्रालय की पुस्तिका के अनुसार ताड़ासन शरीर में स्थिरता लाता है, रीढ़ की नसों की जकड़न दूर करने में मदद करता है, और शरीर की गलत मुद्रा (posture) को सुधारता है।
पुस्तिका इसे सभी खड़े आसनों का आधार कहती है, जो स्थिरता और दृढ़ता सिखाता है।
ताड़ासन में क्या सावधानी रखें?
किन्हें एड़ी नहीं उठानी चाहिए
गठिया, वैरिकोज़ वेन्स या चक्कर आने की समस्या हो तो एड़ियाँ न उठाएँ।
शुरुआती लोग ताड़ासन कैसे करें?
आधुनिक अभ्यास
अगर संतुलन नहीं बन रहा या ऊपर बताई कोई समस्या है, तो एड़ियाँ ज़मीन पर ही रखिए और केवल हाथ ऊपर ले जाइए। पुस्तिका इन स्थितियों में एड़ी न उठाने को कहती है, और अभ्यास को अपनी क्षमता के अनुसार करने को। धीरे-धीरे ही आगे बढ़िए।
क्या ताड़ासन पुराने ग्रंथों में है?
यह प्रश्न इसलिए ज़रूरी है कि हर आसन को "हज़ारों साल पुराना" कह देना आसान है, पर सच जानना ज़्यादा काम का है। हमने हठयोग प्रदीपिका और घेरंड संहिता की आसन-सूचियाँ और शिव संहिता का आसन-भाग पढ़ा। इन तीनों में ताड़ासन का नाम नहीं मिला।
इसका अर्थ यह नहीं कि यह आसन किसी भी पुराने ग्रंथ में नहीं है। आयुष मंत्रालय की पुस्तिका इसे "तालासन" नाम से भी जोड़ती है और योगरहस्य, किरण टीका, श्री योग कौस्तुभ और सचित्र चौरासी आसन जैसे संदर्भ देती है। ये ग्रंथ हमने स्वयं नहीं पढ़े, इसलिए उनके काल या पाठ के बारे में हम कुछ नहीं कह रहे।
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- वृक्षासन — Vrikshasana (Tree Posture): एक पैर पर संतुलन
- त्रिकोणासन — Trikonasana (Triangle Posture): शरीर से बनता त्रिकोण
- उत्कटासन — Utkatasana: पंजों पर बैठना, जैसा घेरंड संहिता और Sivananda बताते हैं
- योगासन — आसनों की विधि, सावधानियाँ, और पुराने ग्रंथों में उनका स्थान

