उत्कटासन

Utkatasana: पंजों पर बैठना, जैसा घेरंड संहिता और Sivananda बताते हैं

संक्षेप में

घेरंड संहिता के अनुसार उत्कटासन में पंजों पर बैठा जाता है: एड़ियाँ ऊपर और नितंब एड़ियों पर। Sivananda भी लगभग यही रूप बताते हैं। आज "उत्कटासन" नाम से जो कुर्सी जैसी मुद्रा (Chair Pose) सिखाई जाती है, वह इससे अलग है।

पुराने हठ-ग्रंथों में मिलता है

उत्कटासन: पंजों पर बैठे साधक, एड़ियाँ उठी हुईं, नितंब एड़ियों से लगे, हाथ कूल्हों पर, पीठ सीधी

एक नज़र में

संस्कृत नाम
उत्कटासन
प्रकार
पंजों पर बैठना, संतुलन
ग्रंथ में
घेरंड संहिता 2.27
ध्यान दें
आज का "Chair Pose" इससे अलग है

उत्कटासन का नाम कैसे पड़ा?

घेरंड संहिता के अनुवादक Vasu इसे "hazardous posture" कहते हैं, यानी कठिन संतुलन वाला आसन। पूरे शरीर का भार केवल पंजों पर रहता है।

उत्कटासन करने की विधि

आधुनिक अभ्यास

विधि Sivananda की "Yoga Asanas" के अनुसार है, जो घेरंड संहिता के वर्णन से मिलती है।

  1. पैर पास-पास रखकर खड़े होइए, हाथ कूल्हों पर।
  2. धीरे-धीरे शरीर को नीचे लाइए।
  3. पंजों पर बैठिए, एड़ियाँ उठी रहें और नितंब एड़ियों से लगें। पूरे शरीर का भार पंजों पर रहता है।
  4. संतुलन बनाए रखते हुए रुकिए, फिर धीरे से खड़े हो जाइए।

उत्कटासन का उद्देश्य

Sivananda के अनुसार यह आसन ज़्यादा ताक़त नहीं, संतुलन माँगता है। वे यह भी लिखते हैं कि बस्ती क्रिया इसी आसन में की जाती है।

उत्कटासन में क्या सावधानी रखें?

पहले यह पढ़िए

घुटने, टखने या पंजों में दर्द, या चक्कर की समस्या हो तो यह आसन न कीजिए या पहले चिकित्सक से पूछिए। Sivananda भी मानते हैं कि नीचे आते समय संतुलन बिगड़ सकता है।

शुरुआती लोग उत्कटासन कैसे करें?

आधुनिक अभ्यास

Sivananda शुरुआत के लिए सहारा लेने को कहते हैं: नीचे आते समय दरवाज़े की दोनों चौखटें या कुर्सी के हत्थे पकड़िए। वे यह भी सुझाते हैं कि पहले कुर्सी पर बैठकर शरीर को दो-तीन इंच ऊपर उठाकर संतुलन का अभ्यास करें।

क्या उत्कटासन पुराने ग्रंथों में है?

ग्रंथ में

हाँ। घेरंड संहिता के अनुसार पैर की उँगलियाँ ज़मीन से लगें, एड़ियाँ हवा में उठी रहें, और गुदा एड़ियों पर टिकी हो: यह उत्कटासन है। यही पंजों पर बैठने वाला रूप इस पृष्ठ पर है। आज का "Chair Pose", जिसमें घुटने मोड़कर कुर्सी की तरह झुका जाता है, इन ग्रंथों का रूप नहीं है।

घेरंड संहिता में उत्कटासन का एक और उपयोग भी है: जल बस्ती, यानी नाभि तक पानी में बड़ी आँत की शुद्धि, इसी आसन में बैठकर की जाती है।

आगे पढ़ें

  • ताड़ासन — Tadasana (Palm Tree Posture): खड़े होने के आसनों की नींव
  • गरुड़ासन — Garudasana (Eagle Posture): पैरों और हाथों को लपेटकर संतुलन
  • वृक्षासन — Vrikshasana (Tree Posture): एक पैर पर संतुलन
  • बस्ती — बड़ी आँत की शुद्धि: जल बस्ती और स्थल बस्ती, ग्रंथों के अनुसार

उत्कटासन — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न