सेतु बंधासन का नाम कैसे पड़ा?
सेतुबंध का अर्थ पुल बनाना है। इस आसन में शरीर पुल की तरह टिका रहता है। आयुष की पुस्तिका इसे चतुष्पादासन भी कहती है।
सेतु बंधासन करने की विधि
आधुनिक अभ्यास
विधि आयुष के Common Yoga Protocol के अनुसार है। शवासन में पीठ के बल लेटिए।
- दोनों पैर घुटनों से मोड़कर एड़ियाँ नितंबों के पास लाइए।
- दोनों टखने कसकर पकड़िए, और घुटने व पंजे एक सीधी रेखा में रखिए।
- साँस भरते हुए धीरे-धीरे नितंब और धड़ को जितना हो सके ऊपर उठाइए।
- सामान्य साँस के साथ 10 से 30 सेकंड रुकिए।
- साँस छोड़ते हुए धीरे-धीरे लौटिए और शवासन में विश्राम कीजिए।
सेतु बंधासन में साँस कैसे लें?
आधुनिक अभ्यास
ऊपर उठते समय साँस भरिए, अंतिम स्थिति में सामान्य साँस लीजिए, और नीचे आते समय छोड़िए।
सेतु बंधासन के लाभ
आधुनिक अभ्यास
आयुष की पुस्तिका के अनुसार सेतु बंधासन अवसाद और चिंता से राहत देता है और कमर के निचले हिस्से की मांसपेशियों को मज़बूत करता है; यह पेट के अंगों को खींचता है, पाचन सुधारता है और कब्ज़ में राहत देता है।
सेतु बंधासन में क्या सावधानी रखें?
किन्हें यह नहीं करना चाहिए
अल्सर या हर्निया में यह आसन न कीजिए।
शुरुआती लोग सेतु बंधासन कैसे करें?
आधुनिक अभ्यास
ज़रूरत हो तो अंतिम स्थिति में कमर को हाथों से सहारा दिया जा सकता है।
सेतु बंधासन की आम ग़लतियाँ
आधुनिक अभ्यास
- गर्दन पर भार डालना: अंतिम स्थिति में कंधे, गर्दन और सिर ज़मीन से लगे रहें।
क्या सेतु बंधासन पुराने ग्रंथों में है?
हमने हठयोग प्रदीपिका और घेरंड संहिता की आसन-सूचियाँ और शिव संहिता का आसन-भाग पढ़ा। इन तीनों में सेतु बंधासन का नाम नहीं मिला।
इसका अर्थ यह नहीं कि यह आसन किसी भी पुराने ग्रंथ में नहीं है। आयुष मंत्रालय की पुस्तिका इसके लिए नाथमुनि के योगरहस्य जैसे संदर्भ देती है। ये ग्रंथ हमने स्वयं नहीं पढ़े, इसलिए उनके काल या पाठ के बारे में हम कुछ नहीं कह रहे।
आगे पढ़ें
- शवासन — Shavasana (Corpse Posture): पूरा विश्राम
- पवनमुक्तासन — Pavanamuktasana (Wind Releasing Posture): घुटने छाती से लगाकर
- सर्वांगासन — Sarvangasana (Shoulder Stand): कंधों के बल, केवल प्रशिक्षक की देखरेख में
- योगासन — आसनों की विधि, सावधानियाँ, और पुराने ग्रंथों में उनका स्थान

