मकरासन का नाम कैसे पड़ा?
संस्कृत में मकर का अर्थ मगरमच्छ है। इस आसन में शरीर पानी किनारे आराम करते मगरमच्छ जैसा दिखता है।
मकरासन करने की विधि
आधुनिक अभ्यास
विधि आयुष के Common Yoga Protocol के अनुसार है।
- पेट के बल लेटिए, पैर काफ़ी फैले हुए, और पंजे बाहर की ओर।
- दोनों हाथ मोड़कर दाहिनी हथेली बाईं हथेली पर रखिए।
- सिर दाईं या बाईं ओर मोड़कर हाथों पर रखिए।
- आँखें बंद रखिए और पूरे शरीर को ढीला छोड़िए।
मकरासन में साँस कैसे लें?
आधुनिक अभ्यास
साँस सहज और नाक से चलती रहे। यह विश्राम का आसन है, इसमें साँस पर कोई ज़ोर नहीं।
मकरासन के लाभ
आधुनिक अभ्यास
आयुष की पुस्तिका के अनुसार मकरासन पूरे शरीर को विश्राम देता है, पीठ की समस्याओं से उबरने में मदद करता है, और तनाव व चिंता से निपटने के लिए सुझाया जाता है।
पुस्तिका कहती है कि पेट के बल किए जाने वाले सभी आसनों के बीच विश्राम के लिए मकरासन किया जाता है।
मकरासन में क्या सावधानी रखें?
किन्हें यह नहीं करना चाहिए
गर्भावस्था और फ्रोज़न शोल्डर में यह आसन न कीजिए।
क्या मकरासन पुराने ग्रंथों में है?
ग्रंथ में
घेरंड संहिता में मकरासन है, पर रूप थोड़ा अलग है। वहाँ पेट के बल, छाती ज़मीन से लगाकर, पैर फैलाकर, दोनों बाहों से सिर पकड़ने को कहा गया है।
आयुष की पुस्तिका अपने मकरासन के लिए जयपुर केंद्रीय संग्रहालय का संदर्भ देती है, और लिखती है कि उसमें हाथों की स्थिति कुछ अलग है।
घेरंड संहिता अपने मकरासन को शरीर की ऊष्मा बढ़ाने वाला कहती है।

