शवासन का नाम कैसे पड़ा?
शव का अर्थ मृत शरीर है। इस आसन की अंतिम स्थिति शव जैसी होती है: बिना हिले, पूरी तरह ढीली। घेरंड संहिता इसे मृतासन कहती है।
शवासन करने की विधि
आधुनिक अभ्यास
विधि आयुष के Common Yoga Protocol के अनुसार है।
- पीठ के बल लेटिए, हाथ और पैर आराम से थोड़े फैले हुए।
- हथेलियाँ ऊपर की ओर रखिए और आँखें बंद कीजिए।
- पूरे शरीर को सजगता से ढीला छोड़िए।
- स्वाभाविक साँस के प्रति सजग रहिए, और उसे धीमा और हल्का होने दीजिए।
- तब तक इसी स्थिति में रहिए जब तक ताज़गी और विश्राम महसूस न हो।
शवासन में साँस कैसे लें?
आधुनिक अभ्यास
साँस को बदलने की कोशिश मत कीजिए; केवल उसके प्रति सजग रहिए और उसे अपने आप धीमा और हल्का होने दीजिए।
शवासन के लाभ
आधुनिक अभ्यास
हठयोग प्रदीपिका कहती है कि शवासन थकान दूर करता है और मन को विश्राम देता है; घेरंड संहिता के अनुसार यह थकान मिटाता है और मन की बेचैनी शांत करता है।
आयुष की पुस्तिका के अनुसार शवासन हर तरह के तनाव से राहत देता है, शरीर और मन दोनों को विश्राम देता है, और पूरे मनो-शारीरिक तंत्र को शिथिल करता है। तनाव और उसके परिणामों के प्रबंधन में इसे बहुत लाभकारी पाया गया है।
पुस्तिका लिखती है कि बाहर की दुनिया की ओर लगातार खिंचने वाला मन शवासन में पलटकर भीतर की ओर मुड़ता है और धीरे-धीरे लीन होता है; मन शांत होने पर अभ्यासी बाहर के वातावरण से विचलित नहीं होता।
शवासन में क्या सावधानी रखें?
किन्हें यह नहीं करना चाहिए
पुस्तिका शवासन के लिए कोई विशेष निषेध नहीं देती। फिर भी पीठ के बल लेटने में कष्ट हो, या गर्भावस्था हो, तो चिकित्सक या योग विशेषज्ञ से पूछकर अपनी सुविधा की स्थिति चुनिए।
शवासन की आम ग़लतियाँ
आधुनिक अभ्यास
- सो जाना: शवासन में शरीर ढीला होता है, पर मन सजग रहता है; शरीर को "सजगता से" ढीला छोड़ने को कहा गया है।
क्या शवासन पुराने ग्रंथों में है?
ग्रंथ में
हाँ। हठयोग प्रदीपिका कहती है कि भूमि पर शव की तरह लेटना शवासन है। घेरंड संहिता में यही आसन मृतासन के नाम से है। आयुष की पुस्तिका भी इसके लिए दोनों ग्रंथों के संदर्भ देती है।
घेरंड संहिता इसी आसन को मृतासन कहती है, और इसे थकान मिटाने और मन की बेचैनी शांत करने वाला बताती है।
आगे पढ़ें
- मकरासन — Makarasana (Crocodile Posture): पेट के बल विश्राम का आसन
- पवनमुक्तासन — Pavanamuktasana (Wind Releasing Posture): घुटने छाती से लगाकर
- ध्यान कैसे करें? — शुरुआत करने वालों के लिए, गीता और आयुष प्रोटोकॉल के आधार पर
- योगासन — आसनों की विधि, सावधानियाँ, और पुराने ग्रंथों में उनका स्थान

