गोमुखासन

Gomukhasana (Cow-Face Posture): गाय के मुख जैसी आकृति

संक्षेप में

गोमुखासन में बैठकर एक घुटना दूसरे घुटने के ऊपर रखा जाता है, और दोनों हाथ पीठ के पीछे ले जाकर उँगलियाँ आपस में फँसाई जाती हैं। ऊपर से यह आकृति गाय के मुख जैसी दिखती है। हठयोग प्रदीपिका और घेरंड संहिता, दोनों में इसका उल्लेख है।

पुराने हठ-ग्रंथों में मिलता है

गोमुखासन: बैठे हुए साधक, एक घुटना दूसरे घुटने के ऊपर, पीठ के पीछे दोनों हाथों की उँगलियाँ आपस में फँसी हुई

एक नज़र में

संस्कृत नाम
गोमुखासन
अंग्रेज़ी नाम
Cow-Face Posture
प्रकार
बैठकर
ग्रंथ में
हठयोग प्रदीपिका अध्याय 1; घेरंड संहिता 2.16

गोमुखासन का नाम कैसे पड़ा?

गोमुख का अर्थ गाय का मुख है। Sivananda लिखते हैं कि यह आसन गाय के मुख जैसा दिखता है, इसलिए यह नाम पड़ा।

गोमुखासन करने की विधि

आधुनिक अभ्यास

विधि Sivananda की "Yoga Asanas" के अनुसार है।

  1. बाएँ पैर की एड़ी गुदा के बाएँ भाग के नीचे रखिए।
  2. दाहिना पैर ऐसे लाइए कि दाहिना घुटना बाएँ घुटने के ऊपर रहे, और दाहिना तलवा बाईं जाँघ के बगल से सटा रहे।
  3. सीधे बैठिए।
  4. बायाँ हाथ पीठ के पीछे नीचे से ले जाकर तर्जनी ऊपर कीजिए; दाहिना हाथ ऊपर से पीछे लाकर उसकी तर्जनी नीचे कीजिए, और दोनों तर्जनियाँ आपस में फँसा लीजिए।
  5. यही दूसरी ओर से दोहराइए।

गोमुखासन में साँस कैसे लें?

आधुनिक अभ्यास

Sivananda इस आसन में धीरे साँस लेने को कहते हैं।

गोमुखासन का उद्देश्य

हठयोग प्रदीपिका और घेरंड संहिता इसे आसनों की सूची में रखती हैं। ग्रंथ इसके विशेष उद्देश्य का विस्तार नहीं देते।

गोमुखासन में क्या सावधानी रखें?

पहले यह पढ़िए

कंधे, घुटने या कूल्हे में दर्द हो तो हाथ या पैर ज़बरदस्ती मत खींचिए, और पहले चिकित्सक या योग विशेषज्ञ से पूछिए।

शुरुआती लोग गोमुखासन कैसे करें?

आधुनिक अभ्यास

Sivananda मानते हैं कि पीठ के पीछे उँगलियाँ फँसाना शुरू में कठिन होता है, और कहते हैं कि छूट जाए तो फिर कोशिश कीजिए। एड़ी को नितंब तक लाना भी धीरे-धीरे के अभ्यास से होता है।

क्या गोमुखासन पुराने ग्रंथों में है?

ग्रंथ में

हाँ। हठयोग प्रदीपिका के पहले अध्याय में गोमुखासन है। घेरंड संहिता में भी है, जहाँ दोनों पैर ज़मीन पर रखकर एड़ियाँ उलटकर नितंबों के नीचे रखी जाती हैं, शरीर स्थिर और मुख ऊपर रहता है; इसमें हाथों की स्थिति का वर्णन नहीं है।

हठयोग प्रदीपिका के अनुसार दाहिना टखना (बाएँ नितंब के) बाईं ओर और बायाँ टखना दाहिनी ओर रखने से गोमुखासन बनता है, जो गाय के मुख जैसा दिखता है। घेरंड संहिता के वर्णन में दोनों पैर ज़मीन पर, एड़ियाँ उलटे क्रम में नितंबों के नीचे, शरीर स्थिर, मुख ऊपर उठा और बैठना सम रहता है।

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गोमुखासन — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न