सुखासन का नाम कैसे पड़ा?
सुख का अर्थ आराम है। यह वह आसन है जिसमें बिना कष्ट के देर तक बैठा जा सके।
सुखासन करने की विधि
आधुनिक अभ्यास
Sivananda के अनुसार जप और ध्यान के लिए कोई भी सहज आसन सुखासन है; मुख्य बात यह है कि सिर, गर्दन और धड़ बिना झुकाव के एक सीध में हों।
- ज़मीन पर पालथी मारकर, जैसे सहज लगे, बैठिए।
- सिर, गर्दन और धड़ को एक सीध में रखिए।
- हाथ पद्मासन की तरह घुटनों पर रखिए।
सुखासन का उद्देश्य
Sivananda लिखते हैं कि 30–40 वर्ष की आयु के बाद जप और ध्यान शुरू करने वाले अक्सर पद्मासन, सिद्धासन या स्वस्तिकासन में देर तक नहीं बैठ पाते; उनके लिए सुखासन उपयोगी है।
सुखासन में क्या सावधानी रखें?
पहले यह पढ़िए
घुटने या कमर में दर्द हो तो दीवार या गद्दी का सहारा लीजिए, और पहले चिकित्सक या योग विशेषज्ञ से पूछिए।
शुरुआती लोग सुखासन कैसे करें?
आधुनिक अभ्यास
Sivananda बुज़ुर्गों के लिए एक तरीका बताते हैं: घुटने छाती की ऊँचाई तक उठाकर, एक लंबे मुड़े कपड़े से घुटनों और पीठ को घेरकर गाँठ बाँध लें, ताकि हाथ, पैर और रीढ़ को सहारा मिले और थकान न हो।
क्या सुखासन पुराने ग्रंथों में है?
शिव संहिता स्वस्तिकासन का वर्णन करके कहती है कि इसी को सुखासन भी कहते हैं। आज "सुखासन" नाम से जो साधारण पालथी सिखाई जाती है, वह इस स्वस्तिकासन से अलग हो सकती है।
हठयोग प्रदीपिका और घेरंड संहिता की आसन-सूचियों में "सुखासन" नाम नहीं मिला; दोनों में स्वस्तिकासन है।
स्वस्तिकासन का वर्णन तीनों ग्रंथों में है। हठयोग प्रदीपिका के अनुसार दोनों तलवों को दोनों जाँघों के नीचे रखकर, शरीर सीधा रखकर शांत बैठना स्वस्तिक है। घेरंड संहिता के अनुसार पैरों और जाँघों को साथ खींचकर, तलवे उनके नीचे रखकर, शरीर को सहज और सीधा रखकर बैठना स्वस्तिकासन है।
शिव संहिता के अनुसार इस तरह बैठकर बुद्धिमान योगी प्राणायाम करे; कोई रोग उसके शरीर पर आक्रमण नहीं करता और उसे वायु-सिद्धि मिलती है। ग्रंथ इसे सुखासन भी कहता है, स्वास्थ्य देने वाला, और योगी को इसे गुप्त रखने को कहता है।
आगे पढ़ें
- पद्मासन — Padmasana (Lotus Posture): ध्यान और जप का प्रमुख आसन
- सिद्धासन — Siddhasana (Perfect Posture): सिद्धों का आसन
- वज्रासन — Vajrasana (Thunderbolt Posture): एड़ियों के बीच बैठने वाला ध्यान का आसन
- ध्यान कैसे करें? — शुरुआत करने वालों के लिए, गीता और आयुष प्रोटोकॉल के आधार पर

