त्रिकोणासन का नाम कैसे पड़ा?
त्रि का अर्थ तीन और कोण का अर्थ कोना है। इस आसन में धड़, हाथ और पैर मिलकर त्रिकोण बनाते हैं, इसलिए यह नाम है।
त्रिकोणासन करने की विधि
आधुनिक अभ्यास
विधि आयुष के Common Yoga Protocol के अनुसार है। दोनों पैरों के बीच लगभग तीन फ़ुट की दूरी रखकर खड़े होइए।
- साँस भरते हुए दोनों हाथ बगल से कंधों की ऊँचाई तक उठाइए।
- दाहिना पैर दाहिनी ओर मोड़िए।
- साँस छोड़ते हुए धीरे-धीरे दाहिनी ओर झुकिए और दाहिने हाथ की उँगलियाँ दाहिने पैर के ठीक पीछे रखिए।
- बायाँ हाथ दाहिने हाथ की सीध में ऊपर रहे, हथेली आगे की ओर। सिर घुमाकर बाएँ हाथ की बीच वाली उँगली के सिरे पर देखिए।
- सामान्य साँस के साथ 10 से 30 सेकंड रुकिए, फिर साँस भरते हुए धीरे-धीरे ऊपर आइए।
- यही बाईं ओर दोहराइए।
त्रिकोणासन में साँस कैसे लें?
आधुनिक अभ्यास
हाथ उठाते समय साँस भरिए, झुकते समय छोड़िए, अंतिम स्थिति में सामान्य साँस लीजिए, और ऊपर आते समय भरिए।
त्रिकोणासन के लाभ
आधुनिक अभ्यास
आयुष की पुस्तिका के अनुसार त्रिकोणासन रीढ़ को लचीला बनाता है, पिंडली, जाँघ और कमर की मांसपेशियों को मज़बूत करता है, और फेफड़ों की क्षमता बढ़ाता है।
त्रिकोणासन में क्या सावधानी रखें?
किन्हें यह नहीं करना चाहिए
स्लिप डिस्क, साइटिका, या पेट की सर्जरी के बाद यह आसन न कीजिए।
अपनी सीमा से आगे न जाइए और बगल का खिंचाव ज़रूरत से ज़्यादा न कीजिए। पैर तक हाथ न पहुँचे, तो घुटने तक ही पहुँचिए।
शुरुआती लोग त्रिकोणासन कैसे करें?
आधुनिक अभ्यास
अगर हाथ पैर तक नहीं पहुँचता, तो घुटने को पकड़िए। बगल की ओर खिंचाव को सीमा से आगे मत ले जाइए।
त्रिकोणासन की आम ग़लतियाँ
आधुनिक अभ्यास
- ज़्यादा झुकना: बगल का खिंचाव सीमा से आगे ले जाना पुस्तिका में मना है।
क्या त्रिकोणासन पुराने ग्रंथों में है?
हमने हठयोग प्रदीपिका और घेरंड संहिता की आसन-सूचियाँ और शिव संहिता का आसन-भाग पढ़ा। इन तीनों में त्रिकोणासन का नाम नहीं मिला।
इसका अर्थ यह नहीं कि यह आसन किसी भी पुराने ग्रंथ में नहीं है। आयुष मंत्रालय की पुस्तिका इसके लिए नाथमुनि के योगरहस्य (ii.20) जैसे संदर्भ देती है। ये ग्रंथ हमने स्वयं नहीं पढ़े, इसलिए उनके काल या पाठ के बारे में हम कुछ नहीं कह रहे।

