दंडासन का नाम कैसे पड़ा?
दंड का अर्थ डंडा या लाठी है। इस आसन में पैर लाठी की तरह सीधे फैले रहते हैं। घेरंड संहिता भी पश्चिमोत्तानासन में पैरों को "लाठी की तरह सीधा" फैलाने की यही उपमा देती है।
दंडासन करने की विधि
आधुनिक अभ्यास
विधि आयुष के Common Yoga Protocol के अनुसार है, जहाँ यह भद्रासन और वज्रासन के वर्णन में शुरुआती स्थिति के रूप में आती है।
- ज़मीन पर सीधे बैठिए और दोनों पैर सामने सीधे फैलाइए, पैर आपस में मिले हुए।
- हाथ कूल्हों के बगल में रखिए, हथेलियाँ ज़मीन पर और उँगलियाँ आगे की ओर।
- पीठ सीधी रखिए। यही दंडासन है; इसी से आगे वज्रासन, शशांकासन या वक्रासन जैसे आसनों में जाया जाता है।
दंडासन के लाभ
आधुनिक अभ्यास
आयुष की पुस्तिका में दंडासन का मुख्य स्थान बैठे आसनों की शुरुआती स्थिति का है। पुस्तिका इसके अलग से लाभ नहीं गिनाती।
दंडासन में क्या सावधानी रखें?
किन्हें यह नहीं करना चाहिए
कमर या रीढ़ में दर्द हो और सीधे बैठना कठिन लगे, तो पीठ को दीवार का सहारा दीजिए और पहले चिकित्सक या योग विशेषज्ञ से पूछिए।
दंडासन की आम ग़लतियाँ
आधुनिक अभ्यास
- झुककर बैठना: पीठ सीधी रहनी चाहिए; पुस्तिका सीधे बैठने को कहती है।
क्या दंडासन पुराने ग्रंथों में है?
हठयोग प्रदीपिका, घेरंड संहिता और शिव संहिता की आसन-सूचियों में दंडासन का नाम नहीं मिला। आयुष की पुस्तिका इसके लिए अलग से कोई ग्रंथ-संदर्भ नहीं देती; वह इसे दूसरे आसनों की स्थिति के रूप में उपयोग करती है।
आगे पढ़ें
- वज्रासन — Vajrasana (Thunderbolt Posture): एड़ियों के बीच बैठने वाला ध्यान का आसन
- पश्चिमोत्तानासन — Paschimottanasana: बैठकर आगे झुकना, पैरों के अँगूठे पकड़कर
- गोमुखासन — Gomukhasana (Cow-Face Posture): गाय के मुख जैसी आकृति
- योगासन — आसनों की विधि, सावधानियाँ, और पुराने ग्रंथों में उनका स्थान

