FAQ
हित हरिवंश — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
हित हरिवंश सोलहवीं सदी के ब्रज के भक्त-कवि थे, जिन्होंने वृंदावन में राधावल्लभ संप्रदाय की स्थापना की। उनकी भक्ति में राधा को सबसे ऊपर रखा गया है।
Growse के अनुसार विक्रम संवत् 1559 (लगभग 1502 ई.) में, मथुरा के पास बाद गाँव में। उनके पिता व्यास देवबन (सहारनपुर) के गौड़ ब्राह्मण थे और माता का नाम तारा था।
इसमें राधा के चरणों को सबसे ऊपर माना जाता है। प्रियादास के शब्दों में: "राधा ही प्रधान मानै, पाछे कृष्ण ध्याइयै", पहले राधा, फिर कृष्ण का ध्यान।
नाभादास के छप्पय 90 के अनुसार हरिवंश की भजन-रीति एक बार में कोई नहीं समझ सकता: राधा के चरण उनके लिए प्रधान थे, और वे विधि-निषेध के नहीं, अनन्य प्रेम के व्रतधारी थे।
Growse के अनुसार हिंदी में "चौरासी पद" और संस्कृत में 170 श्लोकों की "राधा-सुधा-निधि"।
