FAQ
स्वामी रामानंद — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
रामानंद रामानुज की श्री-परंपरा से निकले एक वैष्णव गुरु थे, जिन्होंने सीता-राम की उपासना वाला अपना मार्ग चलाया और हर जाति के शिष्य स्वीकार किए। भक्तमाल के अनुसार कबीर, रैदास, पीपा, धन्ना और सेन उनके शिष्य थे।
भक्तमाल के अनुसार राघवानंद, जो श्री-संप्रदाय की परंपरा में देवाचार्य और हर्यानंद के बाद आए। Macauliffe भी राघवानंद को ही उनका गुरु बताते हैं।
भक्तमाल का छप्पय 36 उनके शिष्यों में अनंतानंद, कबीर, सुखा, सुरसुरा, पद्मावती, नरहरि, पीपा, भावानंद, रैदास, धना और सेन का नाम लेता है, और कहता है कि और भी शिष्य-प्रशिष्य थे।
पक्की तिथि ज्ञात नहीं। Macauliffe उन्हें चौदहवीं सदी के अंत और पंद्रहवीं के पूर्वार्ध में रखते हैं, पर उनका हिसाब कबीर के जन्म 1398 पर टिका है, और Westcott उस तिथि को ही संदिग्ध मानते हैं।
Macauliffe के अनुसार रामानंद ने हर जाति के शिष्य स्वीकार किए, और कहा कि जो लोग भगवान की एक तरह सेवा करते हैं, वे भाई हैं और साथ खा-पी सकते हैं। उनके शिष्यों में जुलाहे, चमार, नाई, किसान और राजा, सब थे।
