FAQ
अब्दुर्रहीम ख़ानख़ाना (रहीम) — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
रहीम, यानी अब्दुर्रहीम ख़ानख़ाना, अकबर के दरबार के बड़े अमीर और सेनापति थे, बैरम ख़ाँ के बेटे। वे कविता "रहीम" नाम से लिखते थे, और उनके नीति के दोहे आज भी बहुत प्रसिद्ध हैं।
आईन-ए-अकबरी के अनुसार लाहौर में, 14 सफ़र 964 हिजरी को। उनका देहांत 1036 हिजरी में दिल्ली में, 72 वर्ष की आयु में हुआ।
गुजरात के बाग़ी सुल्तान मुज़फ़्फ़र को सरखेज की लड़ाई में हराने पर, जबकि उसकी सेना चार गुना बड़ी थी। अकबर ने इस जीत पर उन्हें पाँच हज़ारी मनसब और ख़ानख़ाना की उपाधि दी।
प्रेम का धागा झटके से मत तोड़ो, क्योंकि टूटा धागा फिर नहीं जुड़ता, और जुड़ भी जाए तो गाँठ पड़ जाती है। यानी टूटा रिश्ता पहले जैसा नहीं रहता।
नहीं, रहीम एक मुग़ल अमीर, सेनापति और कवि थे। इस कोश में वे "नीति-कवि" की श्रेणी में हैं, क्योंकि उनकी पहचान उनके नीति और जीवन-सीख के दोहों से है, हालाँकि कुछ दोहों में राम-नाम की भक्ति भी झलकती है।
