FAQ
संत धन्ना — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
धन्ना पंद्रहवीं सदी के राजस्थान के एक जाट किसान-भक्त थे, जो Macauliffe के अनुसार टोंक इलाक़े के धुआँ गाँव में रहते थे। भक्तमाल उन्हें रामानंद का शिष्य बताती है, और उनके पद गुरु ग्रंथ साहिब में हैं।
प्रियादास की टीका के अनुसार एक ब्राह्मण ने बालक धन्ना को एक पत्थर ठाकुर कहकर दे दिया। धन्ना ने उसके आगे रोटी रखी, और जब तक ठाकुर न खाएँ, ख़ुद भी भूखे रहे। उनके सच्चे भाव से भगवान प्रकट हुए और भोग लगाने लगे।
स्वामी रामानंद। भक्तमाल के छप्पय 36 में रामानंद के शिष्यों में "धना" का नाम है, और प्रियादास कहते हैं कि भगवान ने ही धन्ना को रामानंद को गुरु बनाने को कहा।
धन्ना ने बोने का गेहूँ भूखे संतों को खिला दिया और ख़ाली खेत में हल चलाते रहे। नाभादास कहते हैं कि उस खेत में बिना बीज के अंकुर फूटे और पूरा खेत लहलहा उठा।
हाँ। Macauliffe के अनुसार धन्ना के पद गुरु ग्रंथ साहिब में राग आसा और धनासरी में हैं, जिनमें एक में वे नामदेव, कबीर, रैदास और सेन को याद करते हैं।
