FAQ
तिरुज्ञान संबंदर — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
संबंदर सातवीं सदी के तमिल शैव संत-कवि थे, जो तंजौर ज़िले के शीयाली में जन्मे। तमिल शैव परंपरा उन्हें अपने सबसे बड़े संतों में गिनती है, और उनके पद तमिल शैव भजन-संग्रह देवारम् में सबसे पहले आते हैं।
परंपरा के अनुसार तीन बरस की उम्र में उमा ने उन्हें दिव्य ज्ञान से भरा दूध पिलाया। इसलिए उन्हें "दिव्य ज्ञान से जुड़ा हुआ", यानी तिरुज्ञान संबंदर कहा गया।
देवारम् तमिल शैवों का पहला मान्य भजन-संग्रह है, जिसमें संबंदर, अप्पर और सुंदरर के पद हैं। Kingsbury के अनुसार इसे लगभग 1000 ई. में नंबि आंडार नंबि ने संकलित किया।
Kingsbury उनकी तिथि को उन गिनी-चुनी तिथियों में मानते हैं, जो लगभग पक्की हैं: वे 642 ई. के वातापि युद्ध के एक सेनापति के समकालीन थे, यानी सातवीं सदी के पहले आधे में।
Kingsbury के अनुसार अप्पर संबंदर के बड़े मित्र थे। संबंदर ने ही उन्हें "अप्पर" यानी "पिता" कहकर पुकारा, और दोनों कभी-कभी साथ-साथ मंदिरों की यात्रा करते थे।
