FAQ
नम्मालवार — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नम्मालवार तमिल वैष्णव परंपरा के बारह आलवारों में सबसे महान माने जाते हैं। उनका जन्म कुरुकूर (आज का आऴ्वार्तिरुनगरी) में हुआ, और वे शठकोप और परांकुश नामों से भी जाने जाते हैं।
परंपरा के अनुसार बालक मारन जन्म के बाद सोलह बरस एक इमली के पेड़ के नीचे आँखें मूँदे, मौन बैठा रहा। मधुरकवि की पहेली सुनकर ही उसने पहली बार मुँह खोला।
तिरुवाय्मोऴि नम्मालवार की 1102 पदों की रचना है, जो नालायिर प्रबंधम् का पूरा चौथा भाग है। श्रीवैष्णव परंपरा इसे बहुत आदर देती है और इसमें वेदों का सार मानती है।
मधुरकवि नम्मालवार के शिष्य थे, जो ख़ुद भी आलवारों में गिने जाते हैं। उन्होंने केवल दस पद रचे, और सब अपने गुरु नम्मालवार की स्तुति में।
परंपरा उन्हें कलियुग के आरंभ में रखती है। आधुनिक विद्वान Hooper के अनुसार उनका समय लगभग नौवीं सदी का पहला आधा है।
