FAQ
मलूकदास — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
मलूकदास इलाहाबाद ज़िले के कड़ा गाँव के एक निर्गुण संत थे। बेलवेडियर के जीवन-चरित्र के अनुसार वे संवत् 1631 में जन्मे और संवत् 1739 में, 108 बरस की आयु में, चोला छोड़ा। कड़ा-मानिकपुर में उनके "मलूकदासी" संप्रदाय का केंद्र है।
यह दोहा मलूकदास के नाम से बहुत प्रसिद्ध है, पर बेलवेडियर के "मलूकदासजी की बानी" संग्रह में हमें यह नहीं मिला। इसलिए इसे उनकी पक्की वाणी कहकर नहीं, उनसे जोड़ी जाने वाली कहावत के रूप में देखना ठीक है।
बेलवेडियर के जीवन-चरित्र के अनुसार विट्ठलदास, जो द्रविड़ देश, यानी दक्षिण भारत, के एक महात्मा थे।
इस साखी का अर्थ है: सच्चा पीर (संत) वही है, जो दूसरे की पीड़ा जाने; जो पराई पीड़ा न जाने, वह फ़कीर बेपीर है।
कड़ा में। जीवन-चरित्र के अनुसार उनके कहने पर उनका शरीर जलाया नहीं गया, गंगा में प्रवाहित किया गया, और कड़ा में उनकी समाधि बनाई गई।
