FAQ
संत सेना — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सेन, जिन्हें सैन भी कहते हैं, बांधवगढ़ (बाद में रीवाँ) के राजा के दरबारी नाई और रामानंद के शिष्य माने जाने वाले भक्त थे। उनका एक आरती-पद गुरु ग्रंथ साहिब में है।
एक दिन सेन साधुओं की सेवा में लगे रहे और राजा की सेवा का समय निकल गया। भक्तमाल के अनुसार भगवान ने स्वयं सेन का रूप धरकर राजा को तेल लगाया। सच जानकर राजा सेन का शिष्य बन गया।
स्वामी रामानंद। भक्तमाल के छप्पय 36 में रामानंद के शिष्यों में "सेन" का नाम है, और Macauliffe भी उन्हें रामानंद का शिष्य बताते हैं।
हाँ। Macauliffe के अनुसार राग धनासरी में "सैण" का एक पद है, जो भगवान के नाम की आरती है।
प्रियादास उनका स्थान बांधवगढ़ बताते हैं। Macauliffe के अनुसार वहाँ के राजा का नाम राजाराम था, और बांधवगढ़ बाद में रीवाँ कहलाया।
