FAQ
रसखान — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
रसखान कृष्ण-भक्त कवि थे, जिनकी कथा "दो सौ बावन वैष्णवन की वार्ता" में है। वार्ता के अनुसार वे दिल्ली में रहने वाले पठान थे, जो श्रीनाथजी का चित्र देखकर ब्रज चले आए और गुसाँईंजी के सेवक बने। उनके सवैये बहुत प्रसिद्ध हैं।
वार्ता के अनुसार कुछ वैष्णवों ने उन्हें श्रीनाथजी का चित्र दिखाया। वे उसी रात ब्रज चल दिए। मंदिर से निकाले जाने पर गोविंदकुंड पर तीन दिन भूखे पड़े रहे, तब श्रीनाथजी ने दर्शन दिए और गुसाँईंजी ने उन्हें नाम सुनाकर अपनाया।
वार्ता उन्हें "श्री गुसाँईंजी" का सेवक बताती है, जिन्होंने गोविंदकुंड पर उन्हें नाम सुनाया।
"सुजान रसखान" (कवित्त, सवैये, सोरठे और दोहे) और "प्रेमवाटिका" (प्रेम पर 53 दोहे)। 1929 के एक संग्रह की भूमिका के अनुसार किशोरीलाल गोस्वामी ने इन्हें उन्नीसवीं सदी के अंत में छपवाया।
जिस भगवान का पार शेष, गणेश, शिव, नारद और व्यास भी नहीं पाते, उसे ब्रज की अहीर की छोरियाँ एक कटोरी छाछ के लिए नाच नचाती हैं। यानी भगवान प्रेम के वश में हैं।
