FAQ
अंडाल — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
अंडाल, जिन्हें गोदा भी कहते हैं, तमिल वैष्णव परंपरा के बारह आलवारों में अकेली स्त्री संत हैं। वे श्रीविल्लिपुत्तूर के पेरियालवार की पाली हुई बेटी थीं, और तिरुप्पावै की रचयिता हैं।
परंपरा के अनुसार वे भगवान के लिए बनी माला पहले ख़ुद पहनती थीं। पिता ने इसे अपवित्र माना, पर भगवान ने कहा कि उन्हें वही माला चाहिए, जो अंडाल ने पहनी हो।
तिरुप्पावै अंडाल का तीस पदों का गीत है, जिसमें वे गोपी बनकर सहेलियों को भोर में जगाती हैं और भगवान को पाने का व्रत करती हैं। यह श्रीवैष्णव परंपरा में बहुत लोकप्रिय है।
परंपरा कलि संवत् 97 बताती है। आधुनिक विद्वान Hooper उन्हें उनके पिता पेरियालवार के साथ लगभग नौवीं सदी में रखते हैं।
परंपरा के अनुसार अंडाल ने श्रीरंगम के रंगनाथ को ही अपना पति माना। धूमधाम से उन्हें श्रीरंगम ले जाया गया, जहाँ वे रंगनाथ में लीन हो गईं।
