FAQ
नाभादास — अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
नाभादास, जिन्हें नाभाजी भी कहते हैं, "भक्तमाल" के रचयिता हैं, जो छप्पय छंद में भक्तों का यश-गान है। प्रियादास के अनुसार वे बचपन में अंधे थे और कील्ह और अग्रदास नाम के संतों ने उन्हें अपनाया। अग्रदास उनके गुरु थे।
पक्का नहीं कहा जा सकता। Macauliffe इसे लगभग 1578 ई. का मानते हैं। Growse कहते हैं कि आज का पाठ नाभाजी के शिष्य नारायणदास ने शाहजहाँ के समय में संपादित किया। प्रियादास की टीका संवत् 1769 (1713 ई.) की है।
अग्रदास (अग्रदेव)। भक्तमाल के मंगलाचरण में नाभादास ख़ुद कहते हैं, "श्रीगुरु अग्रदेव आज्ञा दई, हरि भक्तन को यश गाव"। प्रियादास के अनुसार कील्ह की आज्ञा से अग्रदास ने उन्हें मंत्र दिया।
प्रियादास की कथा के अनुसार गुरु अग्रदास ने नाभा की सूझ देखकर उन्हें संतों के रूप और गुण गाने की आज्ञा दी। नाभा ने कहा कि भक्तों का ओर-छोर कैसे पाऊँ, तो अग्रदास बोले कि वे स्वयं तुम्हारे हृदय में आकर सब कह देंगे।
Macauliffe के अनुसार ग्वालियर राज्य में। प्रियादास जन्म-स्थान नहीं बताते, बस इतना कहते हैं कि उनका जन्म "हनुमान वंश" में हुआ।
